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तेलंगाना में वर्ष 2022 में शुरू किये गए वर्कफ्री पायलट प्रोजेक्ट के माध्यम से व्यक्तियों और परिवारों पर यूनिवर्सल बेसिक इनकम (UBI) के सकारात्मक परिणाम पर प्रकाश डाला गया है।

वर्कफ्री पायलट प्रोजेक्ट

  • यह परियोजना यूरोपीय अनुसंधान परिषद द्वारा वित्तपोषण के साथ यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ, मोंटफोर्ट सोशल इंस्टीट्यूट, हैदराबाद और इंडिया नेटवर्क फॉर बेसिक इनकम के बीच एक सहयोगात्मक प्रयास है।
  • पायलट प्रोजेक्ट के तहत एक वयस्क को 1,000 रुपए और एक बच्चे को 18 महीने तक 500 रुपये प्रतिमाह का भुगतान किया जाता है।
  • यह परियोजना हैदराबाद की पाँच मलिन बस्तियों में 1,250 निवासियों को सहायता प्रदान करती है।
  • वर्कफ्री पायलट प्रोजेक्ट को एक परिवर्तनकारी पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो व्यक्तियों और परिवारों पर इसके सकारात्मक परिणामों को उजागर करती है।
  • तेलंगाना के कुछ निवासी स्थानांतरण से प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुए थे और उन्हें UBI समर्थन के माध्यम से वित्तीय स्थिरता मिली है। उन्होंने नकद सहायता का उपयोग चूड़ी व्यवसाय शुरू करने के लिये किया जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
  • निवासियों ने नकद सहायता का उपयोग भोजन, ईंधन, कपड़े खरीदने और यूटिलिटी बिलों का भुगतान करने के लिये भी किया, जो आमतौर पर मासिक खर्च का बड़ा हिस्सा होता है।

अन्य समान पायलट प्रोजेक्ट

  • स्व-रोज़गार महिला संघ (Self Employed Women’s Association- SEWA) पायलट प्रोजेक्ट वर्ष 2011 में दिल्ली और मध्य प्रदेश में आयोजित किया गया था। इस प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लगभग 100 परिवारों को प्रतिमाह 1,000 रुपए मिलते थे।

यूनिवर्सल बेसिक इनकम

  • सार्वभौमिक बुनियादी आय एक सामाजिक कल्याण प्रस्ताव है जिसमें सभी लाभार्थियों को बिना शर्त हस्तांतरण भुगतान के रूप में नियमित रूप से एक गारंटीकृत आय प्राप्त होती है।  
  • एक बुनियादी आय प्रणाली के लक्ष्यों में गरीबी को कम करना और ऐसे अन्य आवश्यकता-आधारित सामाजिक कार्यक्रमों को प्रतिस्थापित करना शामिल है जिसके लिये संभावित रूप से अधिक नौकरशाही संलग्नता की आवश्यकता होती है। 
  • UBI आमतौर पर बिना शर्तों के या न्यूनतम शर्तों के साथ सभी (या आबादी के एक अत्यंत बड़े भाग) तक पहुँच बनाने का लक्ष्य रखती है।

गुण

  • गरीबी उन्मूलन: यह सभी के लिये, विशेष रूप से सबसे कमज़ोर और हाशिये पर स्थित समूहों के लिये एक न्यूनतम आय सीमा प्रदान करके गरीबी तथा आय असमानता को कम करती है। यह लोगों को खाद्य, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास जैसी बुनियादी आवश्यकताओं को वहन करने में भी मदद कर सकती है।
  • एक स्वास्थ्य प्रोत्साहक: गरीबी और वित्तीय असुरक्षा से संबद्ध तनाव, दुश्चिंता तथा अवसाद को कम करके शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाती है। यह लोगों को बेहतर स्वास्थ्य देखभाल, स्वच्छता और पोषण तक पहुँच बनाने में भी सक्षम कर सकती है।
  • सरलीकृत कल्याण प्रणाली: यह विभिन्न लक्षित सामाजिक सहायता कार्यक्रमों को प्रतिस्थापित कर मौजूदा कल्याण प्रणाली को सुव्यवस्थित कर सकती है। यह प्रशासनिक लागत को कम करती है और साधन-परीक्षण, पात्रता आवश्यकताओं एवं बेनिफिट क्लिफ (benefit cliffs) से जुड़ी जटिलताओं को समाप्त करती है।
  • व्यक्तिगत स्वतंत्रता में वृद्धि: UBI लोगों को वित्तीय सुरक्षा और उनके कार्य, शिक्षा एवं व्यक्तिगत जीवन के बारे में चयन की अधिक स्वतंत्रता प्रदान करती है।
  • आर्थिक प्रोत्साहक: यह प्रत्यक्ष रूप से व्यक्तियों के हाथों में धन का प्रवेश कराती है, जो उपभोक्ता व्यय को उत्प्रेरित करती है और आर्थिक विकास को गति देती है। यह स्थानीय व्यवसायों को बढ़ावा दे सकती है, वस्तुओं एवं सेवाओं के लिये मांग उत्पन्न कर सकती है तथा रोज़गार के अवसर सृजित कर सकती है।
  • यह लोगों को उद्यमशीलता की राह पर आगे बढ़ने, जोखिम उठाने और रचनात्मक या सामाजिक रूप से लाभकारी गतिविधियों में संलग्न होने के लिये सशक्त कर सकती है जो अन्यथा आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं भी हो सकते हैं।

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