भारत के नियंत्रक और महालेखा-परीक्षक (Comptroller and Auditor-General of India- CAG) की प्रदर्शन ऑडिट रिपोर्ट ने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (Ayushman Bharat-Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana- PMJAY) में अनियमितताओं को उजागर किया है।
आयुष्मान भारत-PMJAY
- PM-JAY पूर्ण रूप से सरकार द्वारा वित्तपोषित विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना है।
- फरवरी 2018 में लॉन्च हुई यह योजना माध्यमिक देखभाल के साथ-साथ तृतीयक देखभाल हेतु प्रति परिवार 5 लाख रुपए की बीमा राशि प्रदान करती है।
- स्वास्थ्य लाभ पैकेज में सर्जरी, दवा एवं दैनिक उपचार, दवाओं की लागत और निदान शामिल हैं।
- यह एक पात्रता आधारित योजना है जो नवीनतम सामाजिक- आर्थिक जाति जनगणना (SECC) डेटा द्वारा पहचाने गए लाभार्थियों को लक्षित करती है।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) ने राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को बचे हुए (अप्रमाणित) SECC परिवारों के खिलाफ टैगिंग के लिये समान सामाजिक-आर्थिक प्रोफाइल वाले गैर-सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) लाभार्थी परिवार डेटाबेस का उपयोग करने हेतु लचीलापन प्रदान किया है।
वित्तीयन
- इस योजना का वित्तपोषण संयुक्त रूप से किया जाता है, सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मामले में केंद्र एवं विधायिका के बीच 60:40, पूर्वोत्तर राज्यों तथा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल एवं उत्तराखंड के लिये 90:10 और विधायिका के बिना केंद्रशासित प्रदेशों हेतु 100% केंद्रीय वित्तपोषण।
नोडल एजेंसी
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) को राज्य सरकारों के साथ संयुक्त रूप से PMJAY के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत एक स्वायत्त इकाई के रूप में गठित किया गया है।
- राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA) राज्य में ABPMJAY के कार्यान्वयन के लिये ज़िम्मेदार राज्य सरकार का शीर्ष निकाय है।
CAG द्वारा उजागर किये गए मुद्दे
मृत मरीज़ों का उपचार
- जिन मरीज़ों को पहले “मृत” दिखाया गया था, वे भी इस योजना के तहत उपचार का लाभ उठाते रहे।
- ऐसे सबसे ज़्यादा मामले छत्तीसगढ़, हरियाणा, झारखंड में थे और सबसे कम मामले अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, असम तथा चंडीगढ़ से थे।
- इस योजना के तहत निर्दिष्ट उपचार के दौरान 88,760 रोगियों की मृत्यु हो गई। इन रोगियों के संबंध में नए उपचार से संबंधित कुल 2,14,923 दावों को सिस्टम में भुगतान के रूप में दिखाया गया है।
अवास्तविक घरेलू आकार
- ऐसे उदाहरण हैं जहाँ पंजीकृत घर का आकार असामान्य रूप से बड़ा, यानी 11 से 201 सदस्यों तक का था।
- इस तरह की विसंगतियाँ लाभार्थी पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान उचित सत्यापन नियंत्रण की कमी का सुझाव देती हैं।
पेंशनभोगी को लाभ
- कुछ राज्यों में पेंशनभोगियों के पास PMJAY कार्ड प्राप्त हुए, साथ ही वे इस योजना के अंर्तगत उपचार का लाभ उठा रहे थे।
- योजना से अयोग्य लाभार्थियों को हटाने के लिये देरी से की गई कार्रवाई के कारण अयोग्य व्यक्तियों को PMJAY के अंर्तगत लाभ प्राप्त हुआ।
फर्ज़ी मोबाइल नंबर और आधार
- इससे जानकारी प्राप्त हुई कि कुछ लाभार्थियों को एक ही फर्ज़ी मोबाइल नंबर से पंजीकृत किया गया था, जिससे संभवतः सत्यापन प्रक्रिया से समझौता किया गया।
- इसी तरह कुछ आधार नंबरों को कई लाभार्थियों से जोड़ा गया था, जिससे उचित सत्यापन पर सवाल उठ रहे थे।
प्रणालीगत विफलताएँ
- CAG की रिपोर्ट ने प्रणालीगत मुद्दों को प्रदर्शित किया, जिसमें सार्वजनिक अस्पताल-आरक्षित प्रक्रियाएँ सुनिश्चित करने वाले निजी अस्पताल, ढाँचागत अपर्याप्तता, उपकरण की कमी के साथ चिकित्सा कदाचार के मामले भी शामिल रहे।
- पर्याप्त सत्यापन नियंत्रण का अभाव, अमान्य नाम, अवास्तविक जन्म तिथि, फर्ज़ी PMJAY ID आदि।
- कई राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में सूचीबद्ध अस्पतालों में उपलब्ध उपकरण गैर-कार्यात्मक पाए गए।
लंबित ज़ुर्माना
- रिपोर्ट में 9 राज्यों के 100 अस्पतालों पर 12.32 करोड़ रुपए के लंबित ज़ुर्माने की बात सामने आई है।
योजना में डेटा संग्रहण
- यह संभव है कि कुछ मामलों में क्षेत्रीय स्तर के कार्यकर्त्ताओं द्वारा कुछ यादृच्छिक दस-अंकीय संख्या दर्ज की गई हो।
- इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के वर्तमान IT पोर्टल में केवल वैध मोबाइल नंबर लेने हेतु आवश्यक सुधार हुए हैं, यदि लाभार्थी के पास पूर्व में ऐसा नंबर है।
