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हाल ही में हरित श्रेय कार्यक्रम के तहत पर्यावरण जहाज़ सूचकांक (ESI) में सूचीबद्ध पहला भारतीय पत्तन बना है, जिसे अंतर्राष्ट्रीय पत्तन एवं पत्तन संघ (IAPH) द्वारा मान्यता प्राप्त हुई है। यह उपलब्धि न केवल गोवा के लिए, बल्कि भारत के लिए भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

पर्यावरण जहाज़ सूचकांक

  • ESI एक ऐसी प्रणाली है जिसे समुद्री जहाज़ों के पर्यावरणीय प्रदर्शन के मूल्यांकन और उन्हें पुरस्कार देने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • यह उन जहाज़ों की पहचान करता है जो अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के मौजूदा उत्सर्जन मानकों के मुकाबले वायु उत्सर्जन को कम करने में बेहतर प्रदर्शन करते हैं।
  • IMO की 2023 की ग्रीनहाउस गैस (GHG) रणनीति: IMO की रणनीति के अनुसार, वर्ष 2030 तक अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग की कार्बन तीव्रता में कम से कम 40% की कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है।
  • ESI की उत्पत्ति: ESI पहल 1 जनवरी 2011 को शुरू हुई और इसका डेटाबेस IAPH के प्रशासन के अधीन है।

ESI की मुख्य विशेषताएँ

  • पत्तन-केंद्रित प्रणाली: इसे पत्तनों से पत्तनों तक की प्रणाली के रूप में विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है।
  • स्वैच्छिक भागीदारी: इसमें जहाज़ मालिकों को स्वैच्छिक आधार पर अपने जहाज़ों के पर्यावरणीय प्रदर्शन को प्रदर्शित करने की अनुमति दी गई है।
  • प्रयोज्यता: यह आकार या कार्य से परे सभी प्रकार के समुद्री जहाज़ों पर प्रभावी हो सकता है।
  • स्वचालित गणना: इसकी गणना और रखरखाव स्वचालित रूप से किया जाता है।
  • प्रोत्साहन: पत्तन और प्राधिकारी उच्च ESI स्कोर वाले जहाज़ों को कम पत्तन शुल्क या प्राथमिकता बर्थिंग जैसे प्रोत्साहन दे सकते हैं।

मोरमुगाओ पत्तन प्राधिकरण (MPA)

  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: मोरमुगाओ पत्तन वर्ष 1888 में शुरू किया गया था।
  • गोवा में खनन के एक प्रमुख उद्योग के रूप में उभरने के साथ, मोरमुगाओ पत्तन को लौह अयस्क टर्मिनल के रूप में विकसित किया गया।
  • प्रमुख पत्तन का पदनाम: मोरमुगाओ पत्तन को वर्ष 1964 में एक प्रमुख पत्तन घोषित किया गया था।
  • लौह अयस्क पारगमन में वृद्धि (विशेष रूप से औद्योगिक पुनर्निर्माण के दौरान जापान की मांग के कारण) मोरमुगाओ पत्तन के विकास में प्रमुख सहायता मिली।
  • रणनीतिक विकास योजनाएँ: वर्ष 1965 में लौह अयस्क बाज़ार में ब्राज़ील और ऑस्ट्रेलिया के साथ प्रतिस्पर्द्धा एवं गहरे जल तक पहुँच और उच्च क्षमता वाली लोडिंग के लिये मोरमुगाओ पत्तन को विकसित करने के क्रम में एक परिप्रेक्ष्य योजना की शुरुआत की गई थी।
  • हरित परिवर्तन: हरित श्रेय कार्यक्रम (जिसके तहत उन जहाज़ों को पत्तन शुल्क पर छूट प्रदान की जाती है जो हरित ईंधन का उपयोग करते हैं और जिनसे नाइट्रोजन ऑक्साइड तथा सल्फर ऑक्साइड का उत्सर्जन नहीं होता है) को अक्टूबर 2023 में शुरू किया गया था।

अंतर्देशीय जलमार्गों पर विकास

  • राष्ट्रीय जलमार्ग (NW) का विस्तार: भारत 111 राष्ट्रीय जलमार्ग (NW) विकसित कर रहा है जो 20,000 किलोमीटर से अधिक लंबा होगा।
  • अंतर्देशीय जल परिवहन केंद्रों की वर्तमान स्थिति: वर्तमान में लगभग 50 अंतर्देशीय जल परिवहन केंद्र कार्यरत हैं।
  • कार्गो यातायात वृद्धि: वित्त वर्ष 2013-14 से, अंतर्देशीय जलमार्गों के माध्यम से परिवहन किये जाने वाले कार्गो यातायात में तेज़ी से वृद्धि देखी गई है, वित्त वर्ष 2014-15 में कुल यातायात 29.16 मिलियन टन से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 में 133.03 मिलियन टन हो गया है।
  • प्रभावी लक्ष्य: समुद्री भारत विज़न 2030 और समुद्री अमृत काल विज़न 2047 के तहत, सरकार का अंतर्देशीय जलमार्गों के माध्यम से वस्तुओं के यातायात को 2030 तक 200 मिलियन टन और वर्ष 2047 तक 500 मिलियन टन तक बढ़ाने का लक्ष्य है।

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