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विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) द्वारा जारी ग्रीनहाउस गैस बुलेटिन (GGB) वायुमंडल में दीर्घकालीन ग्रीनहाउस गैसों (LLGHG) की सांद्रता और उनके प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यह बुलेटिन वायुमंडलीय संरचना में परिवर्तन और जलवायु पर इसके प्रभावों को समझने में सहायक है।GAW कार्यक्रम वायुमंडल, महासागरों, और पृथ्वी के जीवमंडल के बीच अंतःक्रियाओं पर नज़र रखता है और CO₂, CH₄, और N₂O जैसी दीर्घकालीन ग्रीनहाउस गैसों की सांद्रता का अवलोकन करता है।

GGB के मुख्य बिंदु

  • सांद्रता स्तर: 2023 में वैश्विक औसत सतह सांद्रता के आधार पर, CO₂ की सांद्रता 1750 (पूर्व-औद्योगिक स्तर) से 151%, मीथेन (CH₄) 265%, और नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O) 125% बढ़ गई है।
  • विकिरण बल में वृद्धि: 1990 से 2023 तक दीर्घकालीन ग्रीनहाउस गैसों से विकिरण बल में 5% की वृद्धि हुई है, जिसमें अकेले CO₂ का योगदान 81% रहा है। विकिरण बल मापता है कि ये गैसें पृथ्वी के ऊर्जा संतुलन को कैसे प्रभावित करती हैं, जिससे गर्मी बढ़ती है।
  • वायुमंडलीय मीथेन वृद्धि: पिछले तीन वर्षों में वायुमंडलीय मीथेन (CH₄) में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है, जो जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक आर्द्रभूमि से उच्च उत्सर्जन के कारण हुई है।
  • जलवायु परिवर्तन पर प्रभाव: बढ़ते तापमान और महासागरीय अम्लीकरण के चलते पारिस्थितिकी तंत्र में अधिक ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन हो सकता है, वन्य आग से CO₂ का उत्सर्जन बढ़ सकता है, और महासागर कम अवशोषण कर सकते हैं। यह सब ग्लोबल वार्मिंग को और बढ़ा सकता है।

विकिरण बल और इसके महत्व

  • विकिरण बल, जलवायु प्रणाली में प्रति इकाई क्षेत्र में जोड़ी या हटाई जाने वाली ऊर्जा की मात्रा को दर्शाता है। जब ग्रीनहाउस गैसें ऊष्मा को रोकती हैं, तो यह ऊष्मा पृथ्वी को गर्म करती है, जिससे जलवायु असंतुलन पैदा होता है।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) का परिचय

  • संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी: WMO का मुख्यालय जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में स्थित है।
  • स्थापना: 1950 में हुई।
  • सदस्यता: इसके 187 सदस्य राज्य (भारत सहित) और 6 सदस्य क्षेत्र हैं।

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