अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट नेशनल मेडिकल जर्नल ऑफ इंडिया में प्रकाशित हुई है, जिसमें न्यूनतम आहार विविधता विफलता (MDDF) पर ध्यान केंद्रित करती है।
न्यूनतम आहार विविधता
- न्यूनतम आहार विविधता एक विश्वसनीय संकेतक है, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा अनुमोदित किया गया है।
- यह बच्चों के लिए विविध खाद्य समूहों और आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता और उपभोग को दर्शाता है।
- डब्ल्यूएचओ के अनुसार, पोषण संबंधी कारक लगभग 35 प्रतिशत बाल मृत्यु का कारण बनते हैं और वैश्विक स्तर पर कुल रोग भार में 11 प्रतिशत का योगदान करते हैं।
हालिया रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष
- डेटा स्रोत: वैज्ञानिकों ने राष्ट्रीय परिवार एवं स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के राउंड 3, 4 और 5 के डेटासेट का उपयोग किया।
- MDDF दर: एनएफएचएस-3 (2005-06) में 87.4% से घटकर एनएफएचएस-5 (2019-21) में 77.1% हो गई।
- MDDF का प्रचलन: गिरावट के बावजूद, उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत के आठ राज्यों में 6-23 महीने के बच्चों में 80% से अधिक MDDF है।
भारतीय राज्यों में MDDF
- सर्वाधिक MDDF:
- उत्तर प्रदेश (86.1%)
- राजस्थान (85.1%)
- गुजरात (84%)
- महाराष्ट्र (81.9%)
- मध्य प्रदेश (81.6%)
क्षेत्रीय रुझान: 2019-21 तक, मध्य भारत में MDDF का प्रचलन 6% था।विश्लेषित 707 जिलों में से केवल 95 जिलों में MDDF का प्रचलन 60% से कम था, जो मुख्य रूप से दक्षिण, पूर्व, उत्तर-पूर्व और उत्तर में स्थित हैं।
आहार विविधता: अंडे, विटामिन A युक्त खाद्य पदार्थ, सब्जियां और मांस खाद्य पदार्थों सहित आठ समूहों के अंतर्गत खाद्य पदार्थों की खपत NFHS-3 से NFHS-5 के बीच बढ़ी है।लॉजिस्टिक मॉडलिंग में पाया गया कि युवा, अशिक्षित माताओं, लड़कियों, गरीब परिवारों, एनीमिया से पीड़ित बच्चों, कम वजन वाले शिशुओं, और आंगनवाड़ी/ICDS केंद्रों पर नियमित स्वास्थ्य जांच न कराने वाले बच्चों में MDDF अधिक है।
सिफारिशें
- अध्ययन में पोषण संसाधनों के वितरण में गहन नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
- कुपोषण और आहार उपभोग की जांच के लिए लाभार्थी जनसंख्या परामर्श और कार्यक्रम कार्यान्वयन के लिए स्थानीय स्वशासन प्रणालियों को मजबूत करने की आवश्यकता है।
- पोषण अभियान और ICDS जैसे कार्यक्रम सक्रिय हैं, लेकिन पोषण संसाधनों में अंतर को पूरा करने के लिए मजबूत अभिसरण की आवश्यकता है।
