भारत में दुनिया का सिर्फ 2 फीसदी मक्का पैदा होता है. जो भारत में उत्पादन है उनमें से भी करीब 47 फीसदी पोल्ट्री फीड में चला जाता है. यहां इसका औद्योगिक इस्तेमाल बहुत कम होता है. लेकिन अब वक्त बदल रहा है. अब एथेनॉल उत्पादन (Ethanol Production) के लिए इसकी खेती को बढ़ावा देने का प्लान बनाया गया है. जिसकी जिम्मेदारी सरकार ने भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान (IIMR) को दी है. वरिष्ठ मक्का वैज्ञानिक डॉ. एस एल जाट ने कहा कि इसके लिए केंद्र सरकार ने “एथेनॉल उद्योगों के जलग्रहण क्षेत्र में मक्का उत्पादन में बढ़ोतरी” नाम से प्रोजेक्ट शुरू किया गया है. देश को एशिया के शीर्ष मक्का निर्यातक से शुद्ध आयातक में बदल दिया है।यह महत्त्वपूर्ण बदलाव स्थानीय उद्योगों को प्रभावित कर रहा है और वैश्विक मक्का आपूर्ति शृंखला में बदलाव ला रहा है।
मक्का के संदर्भ में मुख्य तथ्य
- मक्का (Zea mays L.) एक अत्यंत बहुपयोगी फसल है, जिसे इसकी उच्च आनुवंशिक उपज क्षमता के कारण ‘अनाज की रानी/Queen of cereals’ के रूप में जाना जाता है।
- विश्व स्तर पर मक्का अनाज उत्पादन में महत्त्वपूर्ण योगदान देती है और संयुक्त राज्य अमेरिका इसका सबसे बड़ा उत्पादक देश है तथा इसकी उत्पादकता भी सर्वाधिक है।
- भारत में मक्का तीसरी सबसे महत्त्वपूर्ण खाद्यान्न फसल है, जो राष्ट्रीय खाद्यान्न में लगभग 9% का योगदान देती है तथा कृषि सकल घरेलू उत्पाद में 100 बिलियन रुपए से अधिक का योगदान देती है।
- इस फसल का उपयोग भोजन, पशु आहार और औद्योगिक उत्पादों सहित विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है।
- उपज के अनुकूल स्थितियाँ: मक्का विभिन्न प्रकार की मिट्टी में उगती है, जिसमें दोमट रेतीली मिट्टी से लेकर चिकनी दोमट मिट्टी तक शामिल है। इसके लिये अनुकूलतम स्थितियाँ अच्छी जल निकासी वाली मृदा, उच्च कार्बनिक पदार्थ और तटस्थ PH वाली मृदा हैं।
- उत्पादकता बनाए रखने के लिये खराब जल निकासी और उच्च लवणता वाले खेतों से बचना महत्त्वपूर्ण है।
- वर्षा: 50-100 सेमी.
- मौसमी खेती: भारत में मक्का खरीफ, रबी और वसंत तीनों ऋतुओं में उगाया जा सकता है।
- वर्षा आधारित परिस्थितियों और जैविक/अजैविक कारकों के कारण रबी मक्का की तुलना में खरीफ मक्का की उत्पादकता कम है।
- वैश्विक रैंकिंग: भारत विश्व में मक्का का 5वाँ सबसे बड़ा उत्पादक (दिसंबर 2023 तक) और 14वाँ सबसे बड़ा निर्यातक (2022) है।
- मक्का की आपूर्ति के लिये भारत के रणनीतिक लाभों में साल भर उत्पादन, एक प्रभावी बीज तंत्र और सुलभ बंदरगाह शामिल हैं। हालाँकि उच्च घरेलू मांग इसके वर्तमान निर्यात महत्त्व को सीमित करती है।
- प्रमुख उत्पादक राज्य: कर्नाटक, मध्य प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु, तेलंगाना, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश।
भारत शुद्ध मक्का आयातक क्यों बन गया है
- इथेनॉल ब्लेंडिंग लक्ष्य: भारत द्वारा वर्ष 2025-26 तक गैसोलीन में इथेनॉल की मात्रा 20% बढ़ाने के प्रयास से मक्का आधारित इथेनॉल की मांग बढ़ गई है।जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति (NPB) 2018 मक्का और अनाज आधारित इथेनॉल के ब्लेंडिंग की अनुमति देती है, जिससे बढ़ती मांग को पूरा करने के लिये इथेनॉल उत्पादन क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।
- गन्ने से मक्का की ओर संक्रमण: अनावृष्टि के कारण सरकार ने ईंधन के लिये गन्ने के प्रयोग पर रोक लगा दी, जिससे इथेनॉल डिस्टिलरियों को विकल्प के रूप में मक्का की ओर रुख करना पड़ा।भारत ने वर्ष 2023-24 में 34.6 मिलियन टन (mt) मक्का का उत्पादन किया, जिसकी आपूर्ति-मांग के अंतर को कम करने के लिये उत्पादन को दोगुना करने की योजना है।
- घरेलू आपूर्ति पर प्रभाव: इथेनॉल के लिये मक्का का प्रयोग करने की ओर संक्रमण ने पोल्ट्री और स्टार्च उद्योगों में कमी उत्पन्न कर दी है, जिससे दशकों में देश में पहली बार मक्का का आयात हुआ है।
