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चीन ने बीजिंग में 9वें चीन-अफ्रीका सहयोग फोरम की मेजबानी की।9वें चीन-अफ्रीका सहयोग फोरम में, चीन ने अफ्रीकी देशों के लिए 51 बिलियन डॉलर के वित्तपोषण का वचन दिया, जिसमें पूरे महाद्वीप में 30 बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए सहायता भी शामिल है।यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब चीन के सामने आर्थिक चुनौतियां हैं तथा अफ्रीका में उसके बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे में निवेश पर जांच बढ़ रही है।इस वर्ष शिखर सम्मेलन का विषय “आधुनिकीकरण को आगे बढ़ाने के लिए हाथ मिलाना और साझा भविष्य के साथ एक उच्च स्तरीय चीन-अफ्रीका समुदाय का निर्माण करना” है। इस वर्ष के शिखर सम्मेलन का मुख्य लक्ष्य अगले तीन वर्षों में चीन-अफ्रीका सहयोग के लिए आम सहमति और कार्य योजना स्थापित करना है।

चीन-अफ्रीका सहयोग मंच

  • उत्पत्ति: चीन और अफ्रीकी देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को औपचारिक रूप देने के लिये वर्ष  2000 में इसकी स्थापना की गई थी, जिसमें प्रत्येक तीन वर्ष में एक शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाता है, जिसमें चीन और अफ्रीका बारी-बारी से मेज़बान होता है।
  • प्रतिभागी: FOCAC में 53 अफ्रीकी देश इसके सदस्य हैं, केवल एस्वातिनी देश ही इसका अपवाद है, जो चीन की “एक चीन” नीति के विरुद्ध ताइवान के साथ राजनयिक संबंध रखता है।अफ्रीकी संघ आयोग, महाद्वीपीय ब्लॉक जिसे अपने सदस्य देशों में सहयोग और आर्थिक एकीकरण सुनिश्चित करने का कार्य सौंपा गया है, भी इसका एक सदस्य है।
  • वर्ष 2024 शिखर सम्मेलन की मुख्य बातें: शिखर सम्मेलन की थीम है “Joining Hands to Advance Modernization and Build a High-Level China-Africa Community with a Shared Future.” अर्थात “आधुनिकीकरण को आगे बढ़ाने और साझा भविष्य के साथ एक उच्च स्तरीय चीन-अफ्रीका समुदाय बनाने के लिये हाथ मिलाना।”शिखर सम्मेलन का उद्देश्य शासन, औद्योगीकरण, कृषि उन्नयन और चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (Belt and Road Initiative- BRI) परियोजनाओं को आगे बढ़ाने जैसे प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करना है।चीन ने अफ्रीकी देशों को लगभग 51 अरब अमेरिकी डॉलर की धनराशि देने का वादा किया है, जिससे पूरे महाद्वीप में 30 बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को समर्थन मिलेगा।शिखर सम्मेलन में बीजिंग घोषणापत्र और FOCAC-बीजिंग कार्य योजना (2025-27) को अपनाया गया, जिसमें चीन-अफ्रीका साझेदारी को गहरा करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

अफ्रीका के साथ चीन के संबंध

  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार 2023 में अफ्रीका और चीन के बीच व्यापार 282 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच जाएगा।
  • चीन अफ्रीका के निर्यात (मुख्यतः धातु, खनिज उत्पाद और ईंधन जैसी प्राथमिक वस्तुएँ) का 20% और अफ्रीकी आयात (मुख्यतः विनिर्मित वस्तुएँ, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा मशीनरी) का 16% हिस्सा है।
  • तंजानिया-जाम्बिया रेलवे, एक अंतर्राष्ट्रीय रेलवे, अफ्रीका में चीन की पहली प्रमुख बुनियादी ढाँचा परियोजना थी, जो महाद्वीप के साथ उसके जुड़ाव में एक महत्त्वपूर्ण कदम था।
  • अफ्रीका में चीन का निवेश, विशेष रूप से BRI के तहत, महत्त्वपूर्ण रहा है। पश्चिमी ऋणों की तुलना में कम बाधाओं के कारण अफ्रीकी राष्ट्र अक्सर वित्तपोषण के लिये चीन की ओर रुख करते हैं, लेकिन “ऋण जाल कूटनीति” के बारे में चिंताएँ उभरी हैं, आलोचकों का आरोप है कि चीन के बड़े पैमाने पर ऋण भू-राजनीतिक लाभ का कारण बन सकते हैं।

भारत की अफ्रीका के साथ वर्तमान में सहभागिता

  • भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन (IAFS): संबंधों को मज़बूत करने के उद्देश्य से शुरू किये गए IAFS का वर्ष 2015 के बाद से कोई आयोजन नहीं हुआ है। कोविड-19 महामारी के कारण चौथे शिखर सम्मेलन में विलंब हुआ, जिसे पहले वर्ष 2020 में आयोजित करने के लिये योजनाबद्ध किया गया था।
  • हालिया पहल: अफ्रीका के लिये 2018 के मार्गदर्शक सिद्धांत भारतीय विदेश नीति में अफ्रीका को प्राथमिकता देने और व्यापार, डिजिटल नवाचार और जलवायु सहयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं।भारत की 2023 G20 अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ (AU) को G20 का स्थायी सदस्य बनाया गया।G20 अध्यक्षता के बाद से भारत वॉयस ऑफ द ग्लोबल साउथ समिट (VOGSS) की मेज़बानी करता रहा है, जिसमें सभी अफ्रीकी देश भाग लेते हैं।भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान और उसके बाद अभी तक VOGSS के तीन संस्करण आयोजित किये  जा चुके हैं।
  • रक्षा एवं सुरक्षा: भारत-अफ्रीका रक्षा वार्ता (IADD) सुरक्षा सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को उजागर करती है।
  • आर्थिक संबंध: भारत अफ्रीका का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जिसका द्विपक्षीय व्यापार लगभग 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर तथा संचयी निवेश 75 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है।अफ्रीकी महाद्वीपीय मुक्त व्यापार क्षेत्र समझौता (AfCFTA) गहन आर्थिक एकीकरण की संभावनाओं के मार्ग खोलता है। भारत अपनी शुल्क-मुक्त टैरिफ वरीयता (DFTP) योजना के माध्यम से कम विकसित देशों (LDC) को गैर-पारस्परिक शुल्क-मुक्त बाज़ार पहुँच प्रदान करने वाला पहला विकासशील देश है।
  • डिजिटल और तकनीकी सहयोग: भारत अफ्रीका के डिजिटल परिवर्तन का समर्थन करने के लिये डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना में अपनी विशेषज्ञता का लाभ उठाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

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