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गूगल सहित कुछ बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों ने AI डेटा केंद्रों में बढ़ती बिज़ली की मांग को पूरा करने के क्रम में परमाणु ऊर्जा खरीदने संबंधी समझौतों पर हस्ताक्षर किये।

बड़ी टेक कंपनियाँ परमाणु ऊर्जा में निवेश

  • गूगल: गूगल ने कैरोस पावर द्वारा विकसित किये जा रहे कई स्माॅल मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) से परमाणु ऊर्जा खरीदने के लिये समझौता किया है।यह AI प्रौद्योगिकियों के विकास के लिये 500 मेगावाट कार्बन मुक्त बिजली उपलब्ध कराएगा।
  • माइक्रोसॉफ्ट: माइक्रोसॉफ्ट ने अमेरिका में थ्री माइल आइलैंड परमाणु ऊर्जा संयंत्र को पुनः शुरू करने के लिये कांस्टेलेशन एनर्जी के साथ 20 वर्ष का विद्युत क्रय समझौता किया है।इससे लगभग 835 मेगावाट कार्बन-मुक्त ऊर्जा उपलब्ध होगी, जिससे माइक्रोसॉफ्ट के कार्बन-नेगेटिव बनने के लक्ष्य को समर्थन मिलेगा।
  • अमेज़न: अमेज़न ने परमाणु ऊर्जा को समर्थन देने के लिये तीन समझौते किये हैं। इसमें वॉशिंगटन में SMR के लिये एनर्जी नॉर्थवेस्ट के साथ साझेदारी, एक्स-एनर्जी के साथ SMR विकास में निवेश और वर्जीनिया में डोमिनियन एनर्जी के साथ सहयोग शामिल है।
  • OpenAI: OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने न्यूक्लियर स्टार्टअप ओक्लो का समर्थन किया है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2027 तक परिचालन करना है।ऑल्टमैन ने वर्ष 2021 में परमाणु संलयन कंपनी हेलियन में भी निवेश किया।

बड़ी टेक कम्पनियाँ परमाणु ऊर्जा की ओर रुख क्यों कर रही हैं?

  • AI से ऊर्जा की बढ़ती मांग: इलेक्ट्रिक पावर रिसर्च इंस्टीट्यूट (EPRI), एक गैर-लाभकारी संगठन, ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि डेटा केंद्रों की विद्युत् की खपत वर्ष 2030 तक दोगुनी से भी अधिक हो सकती है। अनुमान है कि डेटा केंद्र (जो AI परिचालनों के लिये महत्त्वपूर्ण हैं) वर्ष 2030 तक संयुक्त राज्य अमेरिका की 9% विद्युत् की खपत करेंगे, जो उनके वर्तमान उपयोग से दोगुने से भी अधिक है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा की सीमाएँ: परमाणु ऊर्जा से AI कंपनियों के परिचालन हेतु चौबीस घंटे निरंतर और कार्बन मुक्त विद्युत् उपलब्ध होती है।पवन और सौर जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत अस्थायी प्रकृति के हैं।स्थिरता: प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियाँ अपने कार्बन उत्सर्जन को कम करने और स्थिरता लक्ष्यों को प्राप्त करने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही हैं। उदाहरण के लिये गूगल के अनुसार वर्ष 2023 में वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 13% की वृद्धि हुई, जिससे विकास और स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की चुनौतियों पर प्रकाश पड़ता है।रणनीतिक साझेदारी और निवेश: प्रौद्योगिकी दिग्गज कंपनियाँ परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश करने के लिये ऊर्जा कंपनियों के साथ रणनीतिक साझेदारी कर रही हैं। उदाहरण के लिये माइक्रोसॉफ्ट ने दीर्घकालिक कार्बन-मुक्त ऊर्जा सुनिश्चित करने के लिये अमेरिका में थ्री माइल आइलैंड परमाणु संयंत्र को पुनर्जीवित करने के क्रम में कांस्टेलेशन एनर्जी के साथ साझेदारी की।
  • आर्थिक लाभ की संभावना: परमाणु ऊर्जा में निवेश करने से अब प्रौद्योगिकी कंपनियों को एक विश्वसनीय ऊर्जा स्रोत प्राप्त करने में मदद मिलेगी, जो ऊर्जा प्रतिस्पर्द्धा के तीव्र होने के साथ-साथ और भी अधिक मूल्यवान हो जाएगा।
  • जलवायु परिवर्तन संबंधी चिंता: जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा विश्वसनीयता संबंधी चिंताओं के कारण परमाणु ऊर्जा अधिक आकर्षक हो गई है, जिससे प्रौद्योगिकी कंपनियाँ इस क्षेत्र में अपने निवेश को उचित ठहराने के लिये प्रेरित हो रही हैं।

भारत में परमाणु ऊर्जा परिदृश्य

  • भारत का वर्ष 2032 तक अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को तीन गुना बढ़ाकर 22,480 मेगावाट तथा वर्ष 2050 तक 25% विद्युत् परमाणु स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य है।
  • REC (ग्रामीण विद्युतीकरण निगम) द्वारा वर्ष 2030 तक नवीकरणीय और परमाणु परियोजनाओं के लिये 6 ट्रिलियन रुपए आवंटित करने की योजना है।
  • NTPC, NPCIL (भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम) के साथ साझेदारी कर अणुशक्ति विद्युत निगम का गठन कर रही है, जिसका ध्यान परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण एवं संचालन पर केंद्रित होगा।
  • भारत की योजना 10 नए रिएक्टर स्थापित करने तथा SMR का विकास और परमाणु प्रौद्योगिकियों में नवप्रवर्तन के लिये निजी कंपनियों के साथ सहयोग करने की है।

स्माल मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) के बारे में मुख्य बातें

  • SMR के बारे में: SMR उन्नत परमाणु रिएक्टर हैं जो पारंपरिक परमाणु रिएक्टरों के आकार का लगभग एक तिहाई हैं।
  • लघु आकार (S): 300 मेगावाट (E) तक की विद्युत क्षमता।
  • मॉड्यूलर (M): घटकों को पूर्वनिर्मित किया जाता है और स्थापना स्थल तक ले जाया जाता है।
  • परमाणु रिएक्टर (R): कम कार्बन बिजली उत्पन्न करने के लिये परमाणु विखंडन का उपयोग करें।

लाभ

  • स्मॉलर फूटप्रिंट: SMR को बड़े रिएक्टरों के लिये अनुपयुक्त स्थानों पर स्थापित किया जा सकता है।
  • लागत और निर्माण दक्षता: प्रीफैब्रिकेशन और मॉड्यूलर डिज़ाइन निर्माण समय और लागत को कम करते हैं।
  • ऑफ-ग्रिड क्षमता: SMR, विशेष रूप से माइक्रो रिएक्टर (10 मेगावाट तक), दूरदराज़ के क्षेत्रों में बिजली प्रदान कर सकते हैं।
  • रीफ्यूलिंग आवृत्ति में कमी: SMR को केवल प्रत्येक 3 से 7 वर्षों में रीफ्यूलिंग की आवश्यकता होती है, तथा कुछ बिना रीफ्यूलिंग के 30 वर्षों तक चलते हैं।

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