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विज्ञान पत्रिका नेचर ने ‘स्वच्छ भारत मिशन (SBM) के तहत शौचालय निर्माण और भारत में शिशु मृत्यु दर’ शीर्षक से एक अध्ययन प्रकाशित किया है।इसने वर्ष 2011 से 2020 के दौरान 35 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और 600 से अधिक ज़िलों के डेटा का विश्लेषण किया।

अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष

  • शिशु मृत्यु में कमी: वर्ष 2011-2020 के दौरान वार्षिक तौर पर संभावित रूप से होने वाली 60,000-70,000 शिशु मृत्यु आँकड़ों में स्वच्छ भारत मिशन (SBM) के कारण कमी आई है।SBM के तहत 30% से अधिक शौचालयों का निर्माण करने वाले ज़िलों में प्रति 1,000 जन्मों पर शिशु मृत्यु दर में 5.3 की कमी और बाल मृत्यु दर में  6.8 की कमी देखी गई। SBM के बाद ज़िला-स्तरीय शौचालय उपलब्धता प्रत्येक 10% की वृद्धि के कारण शिशु मृत्यु दर (IMR) में 0.9 अंकों की कमी और पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर (U5MR) में औसतन 1.1 अंकों की कमी हुई है।
  • IMRमें त्वरित गिरावट: SBM के बाद की अवधि के दौरान IMR में कमी में तेज़ी आई, जिसमें 8-9% वार्षिक गिरावट आई, जबकि SBM से पहले की अवधि (वर्ष 2000-2014 के दौरान) में 3% वार्षिक गिरावट हुई थी।शौचालय की उपलब्धता: SBM के प्रारंभिक पाँच वर्षों में शौचालयों की उपलब्धता दोगुनी हो गई और खुले में शौच 60% से घटकर 19% हो गया।वर्ष 2014 से 2020 तक सरकार ने 109 मिलियन घरेलू शौचालयों का निर्माण किया और घोषणा की कि 600,000 से अधिक गाँव खुले में शौच से मुक्त (ODF) हैं।
  • बेहतर स्वच्छता के अतिरिक्त लाभ: शौचालयों तक बेहतर पहुँच के व्यापक लाभ हैं, जिनमें महिलाओं की सुरक्षा, कम चिकित्सा व्यय के कारण वित्तीय बचत और समग्र रूप से जीवन की गुणवत्ता में सुधार शामिल है।ODF गाँवों में परिवारों ने स्वास्थ्य लागत पर सालाना औसतन 50,000 रुपए की बचत की।
  • SBM का अनूठा दृष्टिकोण: शौचालय निर्माण को सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) एवं सामुदायिक सहभागिता में पर्याप्त निवेश के साथ जोड़ने का SBM का दृष्टिकोण खुले में शौच से निपटने के लिये व्यापक रणनीतियों का प्रतिनिधित्व करता है।

स्वच्छ भारत मिशन

  • यह राष्ट्रीय स्तर का स्वच्छता अभियान है, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री द्वारा स्वतंत्रता दिवस 2014 पर की गई थी तथा इसका शुभारंभ 2 अक्तूबर 2014 को गांधी जयंती के अवसर पर किया गया था।
  • यह भारत का अभी तक का सबसे बड़ा स्वच्छता अभियान है, जिसमें 30 लाख सरकारी कर्मचारी, स्कूल और कॉलेज के छात्र शामिल हैं।
  • फरवरी 2020 में SBM के दूसरे चरण को स्वीकृति प्रदान की गई थी, जिसका उद्देश्य ODF स्थिति को बनाए रखना और ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन (SLWM) पर ध्यान केंद्रित करना था।

प्रमुख सिद्धांत और लक्ष्य

  • शौचालय निर्माण: वैयक्तिक, समूह/क्लस्टर और सामुदायिक शौचालयों का निर्माण करना जिसका उद्देश्य खुले में शौच को समाप्त करना अथवा कम करने था, जो बाल मृत्यु दर का एक प्रमुख कारण है।
  • उपयोग की निगरानी: न केवल निर्माण अपितु शौचालय के उपयोग की निगरानी के लिये एक उत्तरदायी तंत्र स्थापित करना।
  • सार्वजनिक जागरूकता: खुले में शौच के हानिकारक प्रभावों के बारे में लोगों को अधिक जागरूक करना और शौचालय के उपयोग को प्रोत्साहित करना।
  • व्यवहार परिवर्तन: समर्पित ग्राउंड स्टाफ और अभियानों के माध्यम से लोगों के दृष्टिकोण, मानसिकता और स्वच्छता के प्रति व्यवहार को बदलने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
  • स्वच्छ गाँव: गाँवों में स्वच्छता बनाए रखना और ग्राम पंचायतों के माध्यम से प्रभावी ठोस तथा तरल अपशिष्ट प्रबंधन सुनिश्चित करना।
  • जल आपूर्ति: सभी घरों में जल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये जल की पाइपलाइनें संस्थापित करना।
  • वित्त पोषण और बजट आवंटन: वर्ष 2015 से 2020 तक SBM का औसत वार्षिक बजट लगभग 1.25 बिलियन अमरीकी डॉलर था, जो राष्ट्रीय स्वच्छता और लोक स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने में सरकार के पर्याप्त निवेश को दर्शाता है।
  • वित्तीय और तकनीकी सहायता: शौचालय निर्माण और अपशिष्ट प्रबंधन सहित स्वच्छता प्रयासों के लिये केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकारों को वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है।स्वच्छ भारत कोष के अंतर्गत बुनियादी ढाँचा संबंधी उद्देश्यों के लिये सार्वजनिक, कॉर्पोरेट और व्यक्तिगत योगदान किया जा सकता है।स्वच्छ भारत प्रेरक, टाटा ट्रस्ट द्वारा भर्ती किये गए स्वयंसेवक हैं जो स्वच्छता गतिविधियों की प्रगति की निगरानी करते हैं।

स्वच्छ भारत मिशन (SBM) का महत्त्व

  • प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप: बेहतर स्वच्छता को वैश्विक स्तर पर शिशु मृत्यु दर में महत्त्वपूर्ण गिरावट से संबद्ध माना जाता है। 1900 के दशक की शुरुआत संयुक्त राज्य अमेरिका तथा अन्य पश्चिमी देशों में भी इसी प्रकार की प्रवृत्ति देखी गई थी।शोध से पुष्टि होती है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत बेहतर स्वच्छता भारत में बाल मृत्यु दर (IMR) और शिशु मृत्यु दर (5 वर्ष से कम आयु- U5MR) को कम करने में महत्त्वपूर्ण घटक रही है।
  • एशियाई पहेली‘ (Asian Enigma) पर चर्चा: यह अध्ययन ‘एशियाई पहेली’ पर पूर्ववर्ती शोध का समर्थन करता है, जहाँ आर्थिक प्रगति के बावजूद भारत में बच्चों में स्टंटिंग की उच्च दर का संबंध व्यापक रूप से खुले में शौच से था।SBM के अंतर्गत खुले में शौच में कमी से स्वच्छता में सुधार के माध्यम से इस समस्या का समाधान होगा, जिससे बच्चों में स्टंटिंग (उम्र का अनुसार कम ऊँचाई) की दर में कमी लाने में दीर्घकालिक प्रभाव पड़ने की आशा है।
  • आर्थिक लाभ: यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार स्वच्छ भारत मिशन में निवेश किये गए प्रत्येक रुपए से स्वास्थ्य देखभाल लागत में कमी, उत्पादकता में वृद्धि आदि के कारण 4.3 रुपए का रिटर्न मिलता है।यदि स्वच्छ भारत मिशन ने स्वच्छता में सुधार के साथ खुले में शौच को समाप्त करने का लक्ष्य हासिल कर लिया, तो नुकसान की लागत GDP के 2.7% तक कम हो जाएगी। इससे मौजूदा स्थिति की तुलना में 8.1 ट्रिलियन रुपए की बचत होगी।

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