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द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि भारत में लोग आयरन, कैल्शियम और फोलेट जैसे आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों का भरपूर मात्रा में सेवन नहीं कर रहे हैं। इस अध्ययन में 185 देशों में 15 सूक्ष्म पोषक तत्वों के सेवन को लेकर अनुमान लगाया गया है, जो बिना सप्लीमेंट वाले आहार पर आधारित है। इस शोध की अगुवाई हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के द्वारा की गई है।

सूक्ष्म पोषक तत्त्व

सूक्ष्म पोषक तत्त्वों का परिचय: सूक्ष्म पोषक तत्त्वों  में शरीर के लिये बहुत कम मात्रा में आवश्यक विटामिन और खनिज शामिल होते हैं। उदाहरण के लिये, आयरन, विटामिन ए, आयोडीन आदि।वे सामान्य वृद्धि और विकास के लिये आवश्यक एंजाइम, हार्मोन तथा अन्य पदार्थों के उत्पादन हेतु महत्त्वपूर्ण होते हैं।

सूक्ष्म पोषक तत्त्वों की कमी का प्रभाव

  • गंभीर स्थितियाँ: सूक्ष्म पोषक तत्त्वों की कमी से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं, खासकर बच्चों और गर्भवती महिलाओं में। उदाहरण के लिये एनीमिया।
  • सामान्य स्वास्थ्य: सूक्ष्म पोषक तत्त्वों की कमी से कम दिखाई देने वाली लेकिन महत्त्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं जैसे कि ऊर्जा का स्तर कम होना, मानसिक स्पष्टता और समग्र क्षमता में कमी।
  • दीर्घकालिक प्रभाव: ये कमियाँ शैक्षिक परिणामों, कार्य उत्पादकता को प्रभावित कर सकती हैं और अन्य बीमारियों तथा स्वास्थ्य स्थितियों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ा सकती हैं।

प्रकार

अल्पपोषण

  • वेस्टिंग: लंबाई के हिसाब से कम वज़न को वेस्टिंग कहते हैं। यह तब होता है जब किसी व्यक्ति को खाने के लिये पर्याप्त भोजन नहीं मिला हो और/या उसे कोई संक्रामक रोग हो।
  • स्टंटिंग: आयु के हिसाब से कम लंबाई को स्टंटिंग कहते हैं। यह अक्सर अपर्याप्त कैलोरी सेवन के कारण होता है, जिससे लंबाई के हिसाब से वज़न कम हो जाता है।
  • अंडरवेट: आयु के हिसाब से कम वज़न वाले बच्चों को अंडरवेट कहते हैं। कम वज़न वाला बच्चा स्टंटेड, वेस्टेड या दोनों हो सकता है।

सूक्ष्म पोषक तत्त्वों से संबंधित कुपोषण

  • विटामिन ए की कमी: विटामिन ए के अपर्याप्त सेवन से दृष्टि दोष, कमज़ोर प्रतिरक्षा और अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं।
  • आयरन की कमी: एनीमिया का कारण बनता है, जिससे शरीर की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता प्रभावित होती है, जिससे थकान और कमज़ोरी होती है।
  • आयोडीन की कमी: थायरॉयड से संबंधित विकार होते हैं, जिससे विकास और संज्ञानात्मक विकास प्रभावित होता है।
  • मोटापा: अत्यधिक कैलोरी का सेवन, अक्सर एक गतिहीन जीवन शैली के साथ मिलकर मोटापे का कारण बन सकता है। यह शरीर में अतिरिक्त वसा के संचय के कारण होता है , जो हृदय संबंधी बीमारियों और मधुमेह जैसे स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न करता है।वयस्कों में अधिक वज़न को 25 या उससे अधिक के बॉडी मास इंडेक्स (BMI) के रूप में परिभाषित किया जाता है, जबकि मोटापा 30 या उससे अधिक के BMI को दर्शाता है।
  • आहार संबंधी गैर-संचारी रोग (NCD): इसमें हृदय संबंधी रोग, जैसे दिल का दौरा और स्ट्रोक शामिल हैं, जो अक्सर उच्च रक्तचाप से जुड़े होते हैं, जो मुख्य रूप से अस्वास्थ्यकर आहार एवं अपर्याप्त पोषण से उत्पन्न होते हैं।

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