राष्ट्रीय वैमानिकी एवं अंतरिक्ष प्रशासन (National Aeronautics and Space Administration- NASA) ने पृथ्वी के ध्रुवों पर ऊष्मा उत्सर्जन का अध्ययन करने के लिये क्यूबसैट (CubeSat) नामक लघु उपग्रहों की एक जोड़ी को प्रक्षेपित किया है।PREFIRE/प्रीफायर (पोलर रेडिएंट एनर्जी इन द फार-इन्फ्रारेड एक्सपेरिमेंट) मिशन का उद्देश्य पृथ्वी के ध्रुवों से निकलने वाले ऊष्मा उत्सर्जन का अध्ययन करके ग्रह के ऊर्जा बजट (Energy Budget) को समझने वाले एक महत्त्वपूर्ण अंतराल को दूर करना है।इस मिशन में दो क्यूबसैट शामिल हैं जो थर्मल इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोमीटर से युक्त हैं तथा आर्कटिक और अंटार्कटिका क्षेत्रों से उत्सर्जित इन्फ्रारेड एवं सुदूर इन्फ्रारेड विकिरण का मापन करते हैं।
पृथ्वी और अंतरिक्ष के मध्य भविष्य में ताप विनिमय संबंधी परिवर्तनों तथा बर्फ के पिघलने, वायुमंडलीय तापमान एवं वैश्विक मौसम पर उनके प्रभावों पर पूर्वानुमान की सटीकता में सुधार देखा जा सकता है।क्यूब सैटेलाइट (क्यूबसैट) एक मानकीकृत, कम लागत वाला, उपग्रह का छोटा डिज़ाइन है, जिसका उपयोग आमतौर पर तकनीकी प्रदर्शन और अनुसंधान के लिये किया जाता है। यह एक नैनोसैटेलाइट (Nanosatellite) है जिसका वज़न 10 किलोग्राम से भी कम है।ये अपेक्षाकृत सस्ते हैं और बड़ी संख्या में प्रक्षेपित किये जा सकते हैं, जिससे ये वैज्ञानिक अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी प्रदर्शन के लिये एक मूल्यवान उपकरण बन जाते हैं।
राष्ट्रीय वैमानिकी एवं अंतरिक्ष प्रशासन
- राष्ट्रीय वैमानिकी एवं अंतरिक्ष प्रशासन (NASA) संयुक्त राज्य अमेरिका के संघीय सरकार की कार्यकारी शाखा की एक स्वतंत्र एजेंसी है जो नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रम के साथ-साथ वैमानिकी और अंतरिक्ष अनुसंधान के लिये उत्तरदायी है।
- राष्ट्रीय वैमानिकी एवं अंतरिक्ष अधिनियम, 1958 के तहत स्थापित।
- मुख्यालय : वॉशिंगटन, डीसी, अमेरिका।
इतिहास
- द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद अमेरिका की पूर्व सोवियत संघ (वह सुपर पावर जो 1991 में कई संप्रभु देशों में विभक्त हो गई, जिसमें रूसी संघ, कज़ाखस्तान, यूक्रेन आदि हैं) के साथ सीधी प्रतिस्पर्द्धा थी। इस अवधि को शीतयुद्ध कहा गया।
- 4 अक्तूबर, 1957 को सोवियत संघ के स्पुतनिक लॉन्च ने प्रथम बार किसी पिंड को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया था।
- इसके बाद नवंबर में और भी बड़ा स्पुतनिक II छोड़ा गया जो लाइका नामक मादा डॉग को साथ ले गया।
- जनवरी 1958 के आखिर में अमेरिका ने एक्सप्लोरर 1 लॉन्च किया, सेना की रॉकेट टीम ने द्वितीय विश्वयुद्ध में विकसित रॉकेट प्रौद्योगिकी का प्रयोग कर इस मिशन को पूरा किया।
- यद्यपि एक छोटा सा अंतरिक्षयान जिसका भार केवल 30 पॉण्ड था, ने वान एलेन रेडिएशन बेल्ट की खोज की। यह नाम यूनिवर्सिटी ऑफ लोवा के वैज्ञानिक डॉ. जेम्स वान एलेन के नाम पर रखा गया था जिसने अंतरिक्ष विज्ञान में एक नए विषय की शुरुआत की।
- एक्सप्लोरर 1 के बाद मार्च 1958 में नौसेना का वेंगार्ड लॉन्च किया गया जिसका व्यास 1.6 इंच और भार केवल 3 पाउंड था।
- नासा का जन्म प्रत्यक्ष तौर पर स्पुतनिक की लॉन्चिंग और अंतरिक्ष में तकनीकी सर्वोच्चता दिखाने की भविष्य की दौड़ से जुड़ा था।
- शीतयुद्ध की प्रतिद्वंद्विता के चलते अमेरिका के राष्ट्रपति ड्वाइट डी. आइज़नहावर ने 29 जुलाई, 1958 को नेशनल ऐरोनॉटिक्स एंड स्पेस एक्ट पर हस्ताक्षर किये, जिसमें पृथ्वी के वायुमंडल और अंतरिक्ष में उड़ान की समस्याओं पर अनुसंधान की व्यवस्था थी।
- अंतरिक्ष में सैनिक बनाम नागरिक नियंत्रण पर लंबी बहस के बाद अधिनियम ने एक नई नागरिक एजेंसी को जन्म दिया जिसे राष्ट्रीय वैमानिकी एवं अंतरिक्ष प्रशासन (NASA) नाम दिया गया।
नासा के उद्देश्य
- अंतरिक्ष के बारे में मानवीय ज्ञान को बढ़ाना
- अंतरिक्ष संबंधी प्रौद्योगिकी के नवप्रवर्तन में विश्व का नेतृत्व करना
- ऐसे वाहनों का विकास करना जो अंतरिक्ष में उपकरणों और सजीव जीवों दोनों को ले जा सके
- अधिकतम संभव वैज्ञानिक उन्नति की प्राप्ति के लिये अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसियों से समन्वय करना
