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विश्व आर्थिक मंच द्वारा “एम्प्लिफायिंग द ग्लोबल वैल्यू ऑफ अर्थ ऑब्ज़रवेशन” नामक एक नई रिपोर्ट ने वैश्विक रूप से आर्थिक विकास और स्थिरता में वृद्धि लाने हेतु पृथ्वी अवलोकन (Earth Observation-EO) डेटा की विशाल क्षमता पर प्रकाश डाला है।पृथ्वी अवलोकन डेटा में रिमोट सेंसिंग प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके पृथ्वी की भौतिक, रासायनिक और जैविक प्रणालियों के संबंध में जानकारी एकत्र करना, उनका विश्लेषण करना तथा प्रस्तुत करना शामिल है।इसमें ऊर्जा उत्सर्जन व परावर्तित छवियों के प्रसंस्करण के माध्यम से पृथ्वी की सतह, जैसे भूमि आवरण, महासागर, कृषि और वानिकी के संबंध में जानकारी प्राप्त करना शामिल है।इसे रिमोट सेंसिंग के माध्यम से प्राप्त किया जाता है, जो एक भू-स्थानिक तकनीक है जो किसी वस्तु, स्थान या घटना के साथ भौतिक संपर्क किये बिना उसके संबंध में डेटा एकत्र करती है।

रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएँ

  • EO डेटा का संभावित आर्थिक प्रभाव: EO डेटा वर्ष 2030 तक वैश्विक स्तर पर 3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से भी अधिक आर्थिक लाभ उत्पन्न कर सकता है।EO डेटा का वैश्विक मूल्य वर्तमान में 266 बिलियन अमरीकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2030 तक 700 बिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक होने की संभावना है।यह वर्ष 2030 तक वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (Global Gross Domestic Product- GDP) में संचयी रूप से 3.8 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का योगदान दे सकता है।
  • पर्यावरणीय लाभ: EO डेटा वर्ष 2030 तक प्रतिवर्ष 2 गीगाटन ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को समाप्त करने में सहायता कर सकता है।यह 476 मिलियन गैसोलीन-चालित कारों के अनुमानित संयुक्त वार्षिक उत्सर्जन के बराबर है।जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने और प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा करने के उद्देश्य से उपायों के लिये मार्गदर्शन प्रदान करने हेतु, EO जलवायु परिवर्तन, उत्सर्जन, पारिस्थितिकी तंत्र एवं जैवविविधता की व्यापक तौर पर निगरानी कर सकता है।
  • क्षेत्रीय अवसर: एशिया प्रशांत क्षेत्र वर्ष 2030 तक EO के मूल्य का सबसे बड़ा भाग प्राप्त करने के लिये तैयार है, जो 315 बिलियन अमेरिकी डॉलर के संभावित मूल्य तक पहुँच जाएगा।अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका महाद्वीप के देश EO डेटा मूल्य में वृद्धि का सबसे बड़ा भाग प्राप्त करने की स्थिति में हैं।
  • EO का सक्षम प्रौद्योगिकियों के साथ मिश्रण: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial intelligence- AI) और डिजिटल ट्विन्स (Digital twins) जैसी सक्षम तकनीकों का मिश्रण करने से EO डेटा के संरक्षण को गति मिल सकती है।डिजिटल ट्विन, किसी वस्तु या सिस्टम का आभासी प्रतिनिधित्व है जो किसी भौतिक वस्तु को सटीक रूप से प्रतिबिंबित करता है। यह वस्तु के पूरे जीवनचक्र को समाहित करता है, जिसे रियल टाइम डेटा के साथ अपडेट किया जाता है तथा यह निर्णय लेने में सहायता के लिये सिमुलेशन, मशीन लर्निंग एवं लॉजिक्स का उपयोग करता है।

पृथ्वी अवलोकन डेटा के अनुप्रयोग के प्रमुख क्षेत्र

  • पर्यावरण निगरानी एवं प्रबंधन: सैटेलाईट इमेजरी का उपयोग करके अमेज़न वर्षावन जैसे जंगलों में वनों की कटाई (जिसमें रूप से अवैध कटाई करना भी शामिल है) संबंधी गतिविधियों की निगरानी करना।मरुस्थलों के प्रसार पर नज़र रखना और सहारा जैसे क्षेत्रों में मरुस्थलीकरण की निगरानी करना।तटीय क्षेत्रों और समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों की निगरानी करना, जैसे; प्रवाल भित्ति विरंजन एवं तेल रिसाव।
  • कृषि एवं परिशुद्ध कृषि पद्धतियाँ: फसलों की निगरानी के लिये मल्टीस्पेक्ट्रल सैटेलाईट इमेजरी का उपयोग करना। कृषि पैदावार का अनुमान लगाना तथा गेहूँ, चावल और मक्का जैसी फसलों के लिये परिशुद्ध कृषि पद्धतियों का अनुकूलन करना।कृषि क्षेत्रों में मृदा की नमी के स्तर का आकलन करना और सूखे की आशंका वाले क्षेत्रों में सिंचाई की आवश्यकता वाले क्षेत्रों की पहचान करना।फसलों को प्रभावित करने वाले कीटों और रोगों के प्रसार का पता लगाना तथा उनका मानचित्रण करना।
  • शहरी नियोजन एवं विकास: शंघाई (चीन) और मुंबई (भारत) जैसे तेज़ी  से बढ़ते नगरों में नगरीय क्षेत्रों के मानचित्रण एवं नगरीय प्रसार की निगरानी करना।नई सड़कों, हवाई अड्डों और आवास परियोजनाओं जैसे बुनियादी ढाँचे के विकास के लिये उपयुक्त स्थानों की पहचान करना।टोक्यो (जापान) जैसे बड़े नगरों में भूमि उपयोग पैटर्न तथा नगरीय विकास में परिवर्तन की निगरानी करना।
  • प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन: अमेरिका में पर्मियन बेसिन (अमेरिका में दूसरा सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस उत्पादक क्षेत्र) जैसे क्षेत्रों में खनिज संसाधनों एवं खनन गतिविधियों का मानचित्रण तथा निगरानी करना।अफ्रीका और मध्य पूर्व जैसे कुछ भूजल की कमी वाले क्षेत्रों में झीलों, नदियों और भूजल स्तर तथा जल संसाधनों की निगरानी करना।
  • जलवायु परिवर्तन अध्ययन: ग्लेशियरों, समुद्री बर्फ तथा आर्कटिक और अंटार्कटिक जैसे ध्रुवीय क्षेत्रों में परिवर्तन की निगरानी करना।ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन एवं जलवायु पर इस उत्सर्जन के प्रभाव सहित वैश्विक तापमान और वायुमंडलीय स्थितियों पर नज़र रखना।

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