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जेन हुआ 15, पूर्वी चीन सागर से चलने वाला एक भारी मालवाहक, ने भारत में अडानी के विझिंजम बंदरगाह पर माल उतारकर इतिहास रच दिया। इस उपलब्धि ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े कंटेनर जहाजों के मानचित्र पर ला कर खड़ा किया है।

विझिंजम अंतर्राष्ट्रीय बंदरगाह परियोजना

  • विझिंजम इंटरनेशनल ट्रांसशिपमेंट डीपवाटर मल्टीपर्पज़ सीपोर्ट केरल सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्त्वाकांक्षी परियोजना है।
  • यह मुख्य रूप से क्रूज़ टर्मिनल, लिक्विड बल्क बर्थ तथा अतिरिक्त टर्मिनलों की सुविधाओं से युक्त है जिसे ट्रांसशिपमेंट एवं गेटवे कंटेनर व्यवसाय के कार्य को पूरा करने के लिये डिज़ाइन किया गया है।
  • अदानी पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड वर्तमान में सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से बंदरगाह का विकास कर रहा है, जिसमें डिज़ाइन, निर्माण, वित्त, संचालन व हस्तांतरण (Design, Build, Finance, Operate, and Transfer- DBFOT) ढाँचे के अनुसार प्रबंधित घटक शामिल हैं।
  • यह केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित है।  भारत के दक्षिणी तट पर इसकी अवस्थिति अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग मार्गों तक आसान पहुँच प्रदान करती है।
  • यह कोलंबो, सिंगापुर और दुबई जैसे वैश्विक ट्रांसशिपमेंट केंद्रों के साथ प्रतिस्पर्द्धा करने की स्थिति में है, जिससे विदेशी गंतव्यों तक कंटेनर आवाजाही की लागत कम हो जाएगी।
  • बंदरगाह की प्राकृतिक गहराई 18 मीटर से अधिक है, जिसे आगे 20 मीटर तक बढ़ाया जा सकता है।
  • इस गहराई के चलते यह बंदरगाह पर्याप्त कार्गो क्षमता वाले बड़े जहाज़ों और मुख्य जहाज़ों को समायोजित करने में सक्षम है।
  • पहले चरण में प्रारंभिक क्षमता एक मिलियन (बीस फुट समतुल्य इकाई) TEU निर्धारित की गई है, जिसमें 6.2 मिलियन TEU तक विस्तार की संभावना है।
  • परियोजना प्रगति:
  • इस परियोजना से 5,000 प्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर उत्पन्न होने और औद्योगिक गलियारे तथा क्रूज़ पर्यटन को प्रोत्साहित किये जाने की उम्मीद है।
  • परियोजना लगभग 65.46 प्रतिशत पूरी हो चुकी है। मुख्य रूप से प्राकृतिक आपदाओं, विरोध प्रदर्शनों और लॉजिस्टिकल संबंधी चुनौतियों जैसे कारकों के कारण पिछले कुछ वर्षों में इस परियोजना में देरी हुई है।
  • वर्तमान समय-सीमा दिसंबर 2024 तक पहले चरण के परिचालन के लिये तैयार होने की उम्मीद है।

भारत को डीपवॉटर कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट की आवश्यकता

  • भारत में 12 प्रमुख बंदरगाह हैं। हालाँकि देश में अत्यधिक बड़े मालवाहक जहाज़ों को संभालने के लिये लैंडसाइड मेगा-पोर्ट और टर्मिनल अवसंरचना का अभाव है।
  • इसलिये भारत का लगभग 75 प्रतिशत ट्रांसशिपमेंट कार्गो परिचालन भारत के बाहर के बंदरगाहों, मुख्य रूप से कोलंबो, सिंगापुर और क्लैंग बंदरगाहों के माध्यम से किया जाता है।
  • वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत का कुल ट्रांसशिपमेंट कार्गो लगभग 4.6 मिलियन TEU (TEU अर्थात् 20 फुट समतुल्य इकाइयों की कार्गो क्षमता) था, जिसमें से लगभग 4.2 मिलियन TEU का भारत के बाहर संचालन किया गया था।
  • एक बंदरगाह को ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में विकसित करने से विदेशी मुद्रा बचत, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, अन्य भारतीय बंदरगाहों पर आर्थिक गतिविधि में वृद्धि, संबंधित लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढाँचे का विकास, रोज़गार सृजन, बेहतर संचालन/लॉजिस्टिक्स दक्षता और राजस्व हिस्सेदारी में वृद्धि जैसे महत्त्वपूर्ण लाभ प्राप्त होंगे।
  • इससे जहाज़ सेवाओं, रसद और बंकरिंग (जहाज़ों के लिये ईंधन की आपूर्ति) सहित संबंधित व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलता है।
  • एक गहन जल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट भारी संख्या में कंटेनर ट्रांसशिपमेंट को आकर्षित कर सकता है जिनका वर्तमान में परिचालन कोलंबो, सिंगापुर और दुबई की ओर हो रहा है।

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