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कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने कृषि-खाद्य प्रणाली में धारणीयता को प्रोत्साहित करने के लिये केरल के कोच्चि में 16वीं कृषि विज्ञान कॉन्ग्रेस का उद्घाटन किया है।राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी  द्वारा आयोजित कृषि विज्ञान कॉन्ग्रेस (ASC) ऐसी सिफारिशें प्रस्तुत करेगा जो कृषि क्षेत्र को अधिक संधारणीयता के मार्ग पर आगे बढ़ने में सुविधा प्रदान करेंगी।

कृषि विज्ञान कॉन्ग्रेस (ASC): यह कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के विशेषज्ञों, शोधकर्त्ताओं, चिकित्सकों और हितधारकों को एकजुट करने तथा कृषि, धारणीयता व संबंधित विषयों के विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा करने के लिये एक मंच के रूप में कार्य करता है।

राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (NAAS): यह भारत में कृषि विज्ञान और अनुसंधान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित एक प्रतिष्ठित संगठन है। इसका प्राथमिक उद्देश्य कृषि वैज्ञानिकों को कृषि तथा संबंधित विज्ञान के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण मुद्दों एवं प्रगति पर विचार-विमर्श करने के लिये एक मंच प्रदान करना है।

धारणीय कृषि-खाद्य प्रणाली

  • धारणीय कृषि-खाद्य प्रणाली पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक रूप से व्यवहार्य कृषि उत्पादन, वितरण, उपभोग तथा अपशिष्ट प्रबंधन के लिये एक समग्र दृष्टिकोण है।
  • इन प्रणालियों का लक्ष्य दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करते हुए वर्तमान खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करना, पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभावों को कम करना, आजीविका में सुधार करना और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देना है।
  • वर्ष 2020 में वैश्विक कृषि खाद्य प्रणालियों का उत्सर्जन 16 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर था, जो वर्ष 2000 के बाद से 9% की वृद्धि को दर्शाता है।

कृषि खाद्य प्रणालियों में स्थिरता की आवश्यकता

भोजन की बढ़ती मांग

  • भोजन की बढ़ती वैश्विक मांग के कारण बढ़ती आबादी की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये पर्याप्त और निरंतर खाद्य उत्पादन सुनिश्चित करने हेतु धारणीय कृषि-खाद्य प्रणालियों की आवश्यकता होती है।

पर्यावरणीय क्षरण

  • अस्थिर कृषि पद्धतियों के कारण व्यापक पर्यावरणीय क्षरण पर्यावरण के और अधिक नुकसान को कम करने के लिये धारणीय तरीकों में परिवर्तन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

जलवायु परिवर्तन चुनौतियाँ

  • जलवायु परिवर्तन कृषि के लिये एक बड़ा खतरा है। इन मुद्दों को संबोधित करने और जलवायु परिवर्तन में इस क्षेत्र की भूमिका को कम करने के लिये धारणीय प्रथाएँ महत्त्वपूर्ण हैं।
  • भारत में कई धारणीय और जलवायु प्रतिरोधी कृषि पद्धतियाँ हैं जो विश्व स्तर पर महत्त्वपूर्ण कृषि विरासत प्रणाली (Globally Important Agricultural Heritage Systems- GIAHS) से मान्यता प्राप्त हैं, जैसे पोक्कली चावल, केरल के समुद्र स्तर के नीचे कुट्टनाड कृषि प्रणाली आदि।

धारणीय कृषि खाद्य प्रणालियों को अपनाने का महत्त्व

उन्नत तकनीकी हस्तक्षेप

  • वैज्ञानिक नवाचार और उन्नत तकनीकी हस्तक्षेप धारणीय कृषि पद्धतियों, कुशल संसाधन उपयोग में सहायता और नकारात्मक पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने के लिये महत्त्वपूर्ण हैं।

जीनोम एडिटिंग और आधुनिक प्रौद्योगिकियाँ

  • पारंपरिक प्रजनन विधियों की सीमा को संबोधित करते हुए कृषि में तकनीकी सफलताओं के लिये जीनोम एडिटिंग और अन्य आधुनिक प्रौद्योगिकियों को मुख्य उपकरण के रूप में उजागर किया गया है।

कार्बन-तटस्थ कृषि पद्धतियाँ

  • जलवायु प्रभावों को कम करने, पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के वैश्विक प्रयासों में योगदान के लिये कार्बन-तटस्थ कृषि प्रथाओं में परिवर्तन किया जा सकता है।

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