2024 ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) ने भारत में कुपोषण की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई है। कुपोषण और खाद्य असुरक्षा की सीमा पर प्रकाश डालते हुए, रिपोर्ट कुछ चौंकाने वाले आंकड़े बताती है। विशेष रूप से, भारत में अनुमानित 200 मिलियन कुपोषित आबादी ब्राजील की पूरी आबादी के लगभग बराबर है और भारत की कुल आबादी का लगभग 14% है। 2024 GHI रिपोर्ट के अनुसार, भारत 127 देशों में से 105वें स्थान पर है, जिसे ‘गंभीर’ श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है। कंसर्न वर्ल्डवाइड एक अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठन है जो विश्व के सबसे गरीब देशों में गरीबी को दूर और पीड़ा को कम करने पर केंद्रित है।वेल्टहंगरहिल्फ़, जिसकी स्थापना वर्ष 1962 में “भूख से मुक्त अभियान” की जर्मन शाखा के रूप में की गई थी, जर्मनी में स्थित एक निजी सहायता संगठन है।
वैश्विक भुखमरी सूचकांक
- वैश्विक भुखमरी सूचकांक (GHI) एक समकक्ष समीक्षा वाला सूचकांक है, जो कंसर्न वर्ल्डवाइड और वेल्टहंगरहिल्फ द्वारा वार्षिक आधार पर प्रकाशित की किया जाता है।
- GHI एक ऐसा उपकरण है जिसे वैश्विक, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर भुखमरी को व्यापक रूप से मापने और ट्रैक करने के लिये डिज़ाइन किया गया है, जो समय के साथ भुखमरी के कई आयामों को दर्शाता है।
- GHI स्कोर की गणना 100-बिंदु पैमाने पर की जाती है, जो भुखमरी को दर्शाता है – 0 सबसे अच्छा स्कोर है (जिसका अर्थ है भुखमरी नहीं है) और 100 सबसे खराब स्कोर है।
चार घटक संकेतक
- अल्प-पोषण: जनसंख्या का वह हिस्सा जिसका कैलोरी सेवन अपर्याप्त है, यह संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन द्वारा परिभाषित स्वस्थ जीवन को बनाए रखने के लिये अपर्याप्त कैलोरी सेवन को संदर्भित करता है।
- बाल बौनापन: पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों का समूह जिनकी ऊँचाई उनकी उम्र के आधार पर कम है, दीर्घकालिक कुपोषण को दर्शाता है।
- शिशु दुर्बलता: पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों का हिस्सा जिनका वजन उनकी ऊँचाई के अनुपात में कम है, गंभीर कुपोषण को दर्शाता है।
- शिशु मृत्यु दर: अपने पाँच वें जन्मदिन से पहले मरने वाले बच्चों का समूह, जो कि आंशिक रूप से अपर्याप्त पोषण और अस्वास्थ्यकर वातावरण के घातक मिश्रण को दर्शाता है।
रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष
भारत-विशिष्ट निष्कर्ष:2024 की रिपोर्ट में भारत का स्कोर 27.3 है जो भुखमरी का एक गंभीर स्तर है, जो GHI स्कोर (2023) – 28.7 (‘गंभीर’) से थोड़ा बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है।
- कुपोषित बच्चे – 13.7%
- अविकसित बच्चे – 35.5%
- कमज़ोर बच्चे – 18.7% (विश्व स्तर पर सबसे अधिक)
- शिशु मृत्यु दर – 2.9%
GHI 2024 में वैश्विक रुझान
- विश्व के लिये वर्ष 2024 का GHI स्कोर 18.3 है, जो वर्ष 2016 के 18.8 की तुलना में थोड़ा बेहतर प्रदर्शन है, तथा इसे “मध्यम” माना जाता है।
- बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका जैसे दक्षिण एशियाई पड़ोसी देश बेहतर प्रदर्शन करते हैं तथा “मध्यम” श्रेणी में आते हैं।
- भारत के प्रयासों की मान्यता: रिपोर्ट विभिन्न पहलों के माध्यम से खाद्य और पोषण परिदृश्य में सुधार हेतु भारत की “महत्त्वपूर्ण राजनीतिक इच्छाशक्ति” को स्वीकार करती है: पोषण अभियान (राष्ट्रीय पोषण मिशन), पीएम गरीब कल्याण योजना (PMGKAY), राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन।
- अपर्याप्त GDP वृद्धि: रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि भूख में कमी या बेहतर पोषण की गारंटी नहीं देती है, इसलिए गरीब-समर्थक विकास और सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को दूर करने पर केंद्रित नीतियों की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
जीएचआई 2024 पर भारत की प्रतिक्रिया
- दोषपूर्ण कार्यप्रणाली: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने पोषण ट्रैकर से प्राप्त आंकड़ों की अनुपस्थिति की आलोचना की है , जिसमें कथित तौर पर 7.2% बाल कुपोषण दर का संकेत मिलता है।
- बाल स्वास्थ्य पर ध्यान: सरकार ने कहा कि चार जीएचआई संकेतकों में से तीन बच्चों के स्वास्थ्य से संबंधित हैं और संभवतः ये संपूर्ण जनसंख्या का पूर्ण प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।
- छोटे नमूने का आकार: सरकार ने “अल्पपोषित जनसंख्या का अनुपात” सूचक की सटीकता के बारे में संदेह व्यक्त किया, क्योंकि यह एक छोटे नमूने के आकार के जनमत सर्वेक्षण पर आधारित है।
