इस्लामाबाद में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शासनाध्यक्षों की परिषद की 23वीं बैठक का आयोजन हुआ, जिसमें कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई और आठ प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों में SCO के बजट, सचिवालय के संचालन, और आतंकवाद विरोधी प्रयासों जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।
शिखर सम्मेलन के मुख्य निष्कर्ष
भारत की चिंता
- भारत ने क्षेत्रीय शांति और विकास के लिए आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद के खिलाफ चेतावनी दी।
- भारत ने चीन की बेल्ट एंड रोड पहल का समर्थन नहीं किया, जो क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सिद्धांतों के खिलाफ है।
- रूस पर प्रतिबंध: बैठक में पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए “एकतरफा प्रतिबंधों” की आलोचना की गई।
- डिजिटल एजेंडा: भारत के डिजिटल एजेंडे को आगे बढ़ाया गया, जिसमें डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) और डिजिटल समावेशन को SCO सहयोग के ढांचे में शामिल किया गया।
भारत के लिए SCO का महत्व
- आतंकवाद का मुकाबला: क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना (आरएटीएस) के माध्यम से आतंकवादी गतिविधियों और मादक पदार्थों की तस्करी पर जानकारी और खुफिया जानकारी तक पहुंच प्राप्त होती है।
- मध्य एशिया में सहयोग: यह भारत को कनेक्ट सेंट्रल एशिया नीति को आगे बढ़ाने में सहायता करता है।
- भारत-रूस सहयोग: SCO भारत और रूस के बीच घनिष्ठ सहयोग के लिए एक मंच प्रदान करता है।
- ऊर्जा सुरक्षा: इस क्षेत्र में विश्व के प्राकृतिक गैस और तेल के महत्वपूर्ण भंडार मौजूद हैं।
- चीनी प्रभुत्व को संतुलित करना: चाबहार बंदरगाह और INSTC जैसे परियोजनाओं के माध्यम से चीनी प्रभाव को संतुलित किया जा सकता है।
SCO की चुनौतियाँ
- सदस्य देशों के बीच विवाद: विभिन्न सदस्य देशों के बीच मतभेद और विवाद SCO के कार्यों को प्रभावित कर सकते हैं।
- चीनी और रूसी प्रभुत्व की प्रतिस्पर्धा: चीन और रूस के बीच शक्तियों का संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है।
- भिन्न हितों का टकराव: सदस्य देशों के भिन्न भिन्न हित भी संगठन के समक्ष चुनौतियां पेश करते हैं।
SCO के बारे में
- मुख्यालय: बीजिंग, चीन
- उत्पत्ति: 2001 में कजाकिस्तान, चीन, किर्गिज गणराज्य, रूस, ताजिकिस्तान, और उजबेकिस्तान द्वारा स्थापित स्थायी अंतर-सरकारी अंतर्राष्ट्रीय संगठन।
- वर्तमान सदस्य: भारत, ईरान, कजाकिस्तान, चीन, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और बेलारूस। अफगानिस्तान और मंगोलिया को पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त है।
लक्ष्य
- सदस्य देशों के बीच आपसी विश्वास, मैत्री और पड़ोसी संबंधों को मजबूत करना।
- राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में प्रभावी सहयोग को बढ़ावा देना।
