केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रस्ताव ‘उच्च प्रदर्शन जैव विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिये अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोज़गार के लिये जैव प्रौद्योगिकी (BioE3) नीति’ को मंज़ूरी दी।BioE3 नीति के साथ-साथ केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की तीन योजनाओं को मिलाकर एक योजना बना दी है, जिसे विज्ञान धारा कहा गया है, जिसका वित्तीय परिव्यय वर्ष 2025-26 तक 10,579 करोड़ रुपए है।
BioE3 नीति क्या
- BioE3 का उद्देश्य उच्च प्रदर्शन वाले जैव-विनिर्माण को बढ़ावा देना है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में जैव-आधारित उत्पादों का उत्पादन शामिल है।
- यह नीति व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप है, जैसे ‘नेट जीरो’ कार्बन अर्थव्यवस्था प्राप्त करना और सर्कुलर बायोइकोनॉमी के माध्यम से सतत् विकास को बढ़ावा देना।
- उद्देश्य: BioE3 नीति अनुसंधान एवं विकास (R&D) और उद्यमिता में नवाचार पर ज़ोर देती है, बायोमैन्युफैक्चरिंग, Bio-AI हब व बायोफाउंड्रीज की स्थापना करती है, जिसका उद्देश्य भारत के कुशल जैव प्रौद्योगिकी कार्यबल का विस्तार करना है, जो ‘पर्यावरण के लिये जीवनशैली’ कार्यक्रमों के साथ संरेखित है तथा पुनर्योजी जैव अर्थव्यवस्था मॉडल के विकास को लक्षित करता है।
- BioE3 नीति का उद्देश्य जैव विनिर्माण केंद्रों की स्थापना के माध्यम से विशेष रूप से टियर-II और टियर-III शहरों में महत्त्वपूर्ण रोज़गार सृजन करना है।
- ये केंद्र स्थानीय बायोमास का उपयोग कर क्षेत्रीय आर्थिक विकास और समतामूलक विकास को बढ़ावा देंगे।
- नीति में ज़िम्मेदार जैव प्रौद्योगिकी विकास सुनिश्चित करते हुए भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने के लिये नैतिक जैव सुरक्षा और वैश्विक नियामक संरेखण पर भी ज़ोर दिया गया है।
BioE3 नीति की मुख्य विशेषताओं में शामिल हैं
- जैव-आधारित रसायन और एंज़ाइम: पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिये उन्नत जैव-आधारित रसायनों और एंज़ाइमों का विकास।
- कार्यात्मक खाद्य पदार्थ और स्मार्ट प्रोटीन: पोषण एवं खाद्य सुरक्षा को बढ़ाने के लिये कार्यात्मक खाद्य पदार्थों और स्मार्ट प्रोटीन में नवाचार।
- प्रिसिजन बायोथेरेप्यूटिक्स: स्वास्थ्य सेवा परिणामों को बेहतर बनाने के लिये सटीक चिकित्सा और बायोथेरेप्यूटिक्स को आगे बढ़ाना।
- जलवायु लचीला कृषि: जलवायु परिवर्तन के लिये लचीले कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- कार्बन कैप्चर और उपयोग: विभिन्न उद्योगों में कुशल कार्बन कैप्चर और इसके उपयोग के लिये प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना।
- भविष्य के समुद्री और अंतरिक्ष अनुसंधान: जैव विनिर्माण में नई सीमाओं का पता लगाने के लिये समुद्री और अंतरिक्ष जैव प्रौद्योगिकी में अनुसंधान का विस्तार करना।
विज्ञान धारा योजना
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) देश में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार गतिविधियों के आयोजन, समन्वय तथा संवर्धन हेतु नोडल विभाग के रूप में कार्य करता है।विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित तीन प्रमुख केन्द्रीय क्षेत्र योजनाएँ-संस्थागत एवं मानव क्षमता निर्माण, अनुसंधान एवं विकास तथा नवाचार और प्रौद्योगिकी विकास व परिनियोजन, जो DST द्वारा कार्यान्वित थी, को एक एकीकृत योजना ‘विज्ञान धारा’ में विलय कर दिया गया है।
- उद्देश्य और लक्ष्य: तीनों योजनाओं को एक ही योजना में विलय करने से निधि उपयोग की दक्षता में सुधार होगा और विभिन्न उप-योजनाओं/कार्यक्रमों के बीच समन्वय स्थापित होगा।विज्ञान धारा योजना का उद्देश्य देश में अनुसंधान एवं विकास का विस्तार करना तथा पूर्णकालिक समकक्ष (FTE) शोधकर्त्ताओं की संख्या में वृद्धि करना है।केंद्रित हस्तक्षेप से लिंग समानता प्राप्त करने के लक्ष्य के साथ विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (STI क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी।विज्ञान धारा के अंतर्गत सभी कार्यक्रम विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के 5-वर्षीय लक्ष्यों के अनुरूप हैं तथा इनका उद्देश्य वर्ष 2047 तक विकसित भारत अर्थात “विकसित भारत 2047” के व्यापक दृष्टिकोण को ध्यान में रखना है।
- BioE3 नीति को पूरक बनाना: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थागत बुनियादी ढाँचे को बढ़ाना और महत्त्वपूर्ण मानव संसाधन पूल का विकास करना।बुनियादी अनुसंधान, टिकाऊ ऊर्जा, जल आदि क्षेत्र में उपयोग योग्य अनुसंधान को बढ़ावा देता है। स्कूल से लेकर उद्योग स्तर तक नवाचारों का समर्थन करता है और शिक्षा, सरकार एवं उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाता है।
जैव प्रौद्योगिकी
- जैव प्रौद्योगिकी एक ऐसा क्षेत्र है, जो जीवविज्ञान को प्रौद्योगिकी के साथ जोड़ता है, सेलुलर और बायोमॉलिक्यूलर प्रक्रियाओं का प्रयोग करके ऐसे उत्पाद एवं प्रौद्योगिकी बनाता है, जो हमारे जीवन को बेहतर बनाते हैं तथा हमारे ग्रह की सुरक्षा करते हैं।
लाभ
- स्वास्थ्य सेवा में प्रगति: मेडिकल बायोटेक्नोलॉजी (रेड बायोटेक) उन्नत दवाओं, टीकों और उपचारों के विकास को सक्षम बनाता है, जिसमें व्यक्तिगत चिकित्सा, जीन थेरेपी और लक्षित कैंसर उपचार शामिल हैं।इसके अतिरिक्त जैसा कि कोविड-19 महामारी द्वारा प्रदर्शित किया गया है, यह टीकों के निर्माण को गति देता है। स्टेम सेल अनुसंधान और ऊतक इंजीनियरिंग क्षतिग्रस्त ऊतकों एवं अंगों को पुनर्जीवित करने की क्षमता प्रदान करते हैं, जिससे उन रोगों के उपचार के नए मार्ग खुलते हैं जिन्हें लाइलाज माना जाता था।
- कृषि सुधार: कृषि जैव प्रौद्योगिकी (ग्रीन बायोटेक) के तहत पादप वर्ग में आनुवंशिक संशोधन और इंजीनियरिंग शामिल है, जो कीटों, बीमारियों एवं अनावृष्टि जैसे पर्यावरणीय तनावों के प्रति अधिक प्रतिरोधी फसल किस्मों का उत्पादन कर सकते हैं, जिससे खाद्य सुरक्षा में सुधार होता है।बायोटेक उन्नत पोषण प्रोफाइल वाली फसलों के विकास की अनुमति देता है, जैसे कि गोल्डन राइस, जो कुपोषण से निपटने के लिये विटामिन A से भरपूर होता है।
- पर्यावरणीय स्थिरता: जैव प्रौद्योगिकी के तहत तेल रिसाव, भारी धातुओं और प्लास्टिक जैसे प्रदूषकों (बायोरेमेडिएशन) को साफ करने के लिये सूक्ष्मजीवों का प्रयोग किया जाता है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्भरण करने और पर्यावरणीय क्षति को कम करने में मदद मिलती है।औद्योगिक जैव प्रौद्योगिकी (व्हाइट बायोटेक) जैव प्रौद्योगिकी को औद्योगिक प्रक्रियाओं में लागू करती है, जैसे जैव ईंधन, जैव प्लास्टिक और बायोडिग्रेडेबल पदार्थों का उत्पादन।यह पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने और स्वच्छ उत्पादन विधियों के माध्यम से स्थिरता को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। जैव प्रौद्योगिकी नवाचार अपशिष्ट पदार्थों को रीसाइकिल और अपसाइकिल करने में मदद करते हैं, परिपत्र अर्थव्यवस्था में योगदान करते हैं तथा लैंडफिल को कम करते हैं।
- आर्थिक विकास: जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान, विकास और विनिर्माण क्षेत्रों में रोज़गार सृजित करके आर्थिक विकास को गति देता है। जैव प्रौद्योगिकी में निवेश करने वाले देश अत्याधुनिक नवाचारों में अग्रणी हैं, जिससे उन्हें वैश्विक बाज़ारों और व्यापार में प्रतिस्पर्द्धात्मक बढ़त मिलती है।
- जलवायु परिवर्तन शमन: कुछ जैव प्रौद्योगिकी वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर उसका उपयोग कर सकती हैं, जिससे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद मिलती है।जैव प्रौद्योगिकी स्वच्छ जैव ईंधन के उत्पादन में सहायता करती है, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करती है और कार्बन फूटप्रिंट्स को कम करती है।
- सामग्रियों में नवाचार: जैव प्रौद्योगिकी जैव-आधारित फाइबर और उच्च-प्रदर्शन जैव-कंपोज़िट सहित नवीन सामग्रियों की इंजीनियरिंग को सक्षम बनाती है, जिनका फैशन से लेकर एयरोस्पेस तक के उद्योगों में अनुप्रयोग किया जा सकता है।
