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उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के तहत उपभोक्ता मामले विभाग  ने मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्रों के लिये मरम्मत के अधिकार की रूपरेखा पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया।इसमें मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के लिये “मरम्मत सूचकांक” शुरू करने पर चर्चा की गई ताकि उपभोक्ताओं को उन्हें खरीदने से पहले उचित निर्णय लेने में मदद मिल सके।इस पहल का उद्देश्य बढ़ती ई-अपशिष्ट की समस्या का समाधान करना तथा निर्माताओं को आसानी से मरम्मत योग्य वस्तुओं का उत्पादन करने के लिये प्रोत्साहित करना है।

कार्यशाला की मुख्य विशेषताएँ क्या

  • कार्यशाला का उद्देश्य: कार्यशाला का उद्देश्य मरम्मत योग्यता सूचकांक स्थापित करने, उत्पाद की दीर्घायु को बढ़ावा देने तथा मोबाइल एवं इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के पुनः उपयोग में उपभोक्ता अनुभव को बढ़ाने के लिये मरम्मत संबंधी जानकारी का लोकतंत्रीकरण करने पर उद्योग हितधारकों के बीच आम सहमति बनाना था।यह मरम्मत विकल्पों की कमी या उच्च मरम्मत लागत के कारण उपभोक्ताओं को नए उत्पाद खरीदने की आवश्यकता को रोकने में मदद करता है।
  • नियोजित अप्रचलन से निपटना: यह चर्चा “नियोजित अप्रचलन” की प्रथा से निपटने पर केंद्रित थी, जहाँ निर्माता आवश्यक मरम्मत जानकारी, मरम्मत मैनुअल/वीडियो और स्पेयर पार्ट्स तक पहुँच को प्रतिबंधित करते हैं।इसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया कि मरम्मत संबंधी जानकारी और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता की कमी के कारण उपभोक्ता अपने उपकरणों को छोड़कर नए खरीदने को मजबूर होते हैं या फिर ग्रे मार्केट (अनौपचारिक बाज़ार) से जोखिम भरे नकली पार्ट्स खरीदने को मज़बूर होते हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय सर्वोत्तम पद्धतियाँ : चर्चा में फ्राँस, यूरोपियन यूनियन, यूनाइटेड किंगडम की अंतर्राष्ट्रीय सर्वोत्तम पद्धतियों को एकीकृत करने और मरम्मत क्षमता बढ़ाने के लिये दीर्घावधिक उत्पादों के डिज़ाइन पर ज़ोर  दिया गया।चर्चाओं में टिकाऊ उत्पाद डिज़ाइन के महत्त्व, पारिस्थितिकीय चिंताओं तथा “उपयोग और निपटान” की अर्थव्यवस्था से “सर्कुलर इकोनॉमी” की ओर स्थानांतरित होने की आवश्यकता तथा “विचारहीन उपभोग” के स्थान पर “विचारपूर्ण उपयोग” को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर चर्चा की गई।

मरम्मत योग्यता सूचकांक के संबंध में मुख्य तथ्य

  • परिभाषा: मरम्मत योग्यता सूचकांक एक अनिवार्य लेबल है, जिसे निर्माता उत्पाद की मरम्मत योग्यता के बारे में जानकारी प्रदान करने के लिये विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर प्रदर्शित करते हैं।
  • तकनीकी दस्तावेज़ों की उपलब्धता: उत्पाद की मरम्मत में सहायता करने वाले मैनुअल और गाइड तक पहुँच।
  • वियोजन में आसानी: किसी उत्पाद को कितनी आसानी से अलग किया जा सकता है ताकि उसके घटकों तक पहुँचा जा सके और उनकी मरम्मत की जा सके।
  • स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता और मूल्य निर्धारण: स्पेयर पार्ट्स कितनी आसानी से उपलब्ध हैं और उपभोक्ताओं के लिये उनकी लागत कितनी है।
  • मरम्मत योग्यता सूचकांक की स्कोरिंग प्रणाली: उत्पादों को 1 से 5 के पैमाने पर स्कोर किया जाएगा।
  • 1 का स्कोर: ऐसे उत्पाद जिनमें क्षति का उच्च जोखिम होता है तथा जिनके एक भाग तक पहुँचने के लिये कई घटकों को तोड़ना पड़ता है।
  • 5 का स्कोर: ऐसे उत्पाद जिनकी मरम्मत आसान है तथा बैटरी या डिस्प्ले जैसे प्रमुख भागों तक सीधी पहुँच है एवं उन्हें अनावश्यक रूप से अलग नहीं किया जा सकता।

राईट टू रिपेयर

  • उपभोक्ता वस्तुओं के लिये ‘राईट टू रिपेयर’ अंतिम उपभोक्ताओं, उपभोक्ताओं तथा सभी व्यवसायों को बिना किसी निर्माता या तकनीकी प्रतिबंध के अपने स्वामित्व वाले या सेवा वाले उपकरणों की मरम्मत करने की अनुमति देता है।
  • यह निर्माताओं को उपकरण, पार्ट्स और दस्तावेज़ों तक पहुँच को सीमित करके रिपेयर को उनकी अधिकृत सेवाओं तक सीमित करने से प्रतिबंधित करता है।

राईट टू रिपेयर की विशेषताएँ

  • सूचना तक पहुँच: उपभोक्ताओं को रिपेयर मैनुअल, व्यवस्था (स्कीमैटिक्स) और सॉफ्टवेयर अपडेट तक पहुँच होनी चाहिये।
  • पुर्ज़ों और उपकरणों की उपलब्धता: थर्ड पार्टी और व्यक्तियों को रिपेयर के लिये आवश्यक भागों एवं उपकरणों तक पहुँच में सक्षम होना चाहिये।
  • लीगल अनलॉकिंग: उपभोक्ताओं को डिवाइस को अनलॉक या संशोधित करने की अनुमति दी जानी चाहिये जैसे कि कस्टम सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करना।
  • मरम्मत के अनुकूल डिज़ाइन: डिवाइस को आसान रिपेयर के लिये डिज़ाइन किया जाना चाहिये।

राईट टू रिपेयर की आवश्यकता

  • बढ़ता ई-अपशिष्ट: उपकरणों की मरम्मत में कठिनाई से इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट में वृद्धि होती है।भारत ई-अपशिष्ट में विश्व का तीसरा सबसे बड़ा योगदानकर्त्ता है, जहाँ प्रत्येक वर्ष लगभग 3.2 मिलियन मीट्रिक टन ई-अपशिष्ट उत्पन्न होता है, जो केवल चीन एवं संयुक्त राज्य अमेरिका से पीछे है।
  • रिपेयर का एकाधिकार: निर्माता प्रायः थर्ड पार्टी रिपेयर में बाधाएँ उत्पन्न करते हैं, जो उपभोक्ता की पसंद को सीमित करता है और लागत बढ़ाता है।
  • नियोजित अप्रचलन: कंपनियाँ बार-बार प्रतिस्थापन को प्रोत्साहित करने के लिये सीमित जीवनकाल वाले उत्पाद डिज़ाइन करती हैं।
  • स्थायित्व: यह उपकरणों के जीवन को बढ़ाकर और उनके रखरखाव, पुन: उपयोग, उन्नयन, पुनर्चक्रण तथा अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार करके परिपत्र अर्थव्यवस्था लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगा।

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