नई दिल्ली में भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा आयोजित 19वें भारत-अफ्रीका व्यापार सम्मेलन में भारत ने 2030 तक अफ्रीकी देशों को अपने निर्यात को दोगुना करके 200 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने की महत्त्वाकांक्षी योजना का अनावरण किया है।इस रणनीतिक प्रयास का उद्देश्य आर्थिक संबंधों को सुदृढ़ करना तथा पारस्परिक चुनौतियों और अवसरों का समाधान करना है।
भारत अफ्रीकी देशों को अपना निर्यात कैसे दोगुना करेगा
- कृषि और कृषि उत्पाद: भारतीय कंपनियाँ उन्नत बीज प्रौद्योगिकियों, कृषि प्रसंस्करण विधियों को साझा करके और इनक्यूबेशन केंद्रों की स्थापना करके अफ्रीका की खाद्य उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद करने के लिये तैयार हैं।भारत प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और द्विपक्षीय व्यापार का विस्तार करके अफ्रीका की खाद्य सुरक्षा को महत्त्वपूर्ण रूप से बढ़ा सकता है, जो वर्ष 2022 तक 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच जाएगा।
- फार्मास्यूटिकल्स: वर्ष 2023 में अफ्रीका को फार्मास्यूटिकल निर्यात पहले से ही 3.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच चुका है, इसमें वृद्धि की महत्त्वपूर्ण संभावनाएँ हैं, क्योंकि भारत सस्ती दवाएँ और स्वास्थ्य देखभाल समाधान प्रदान कर सकता है।
- ऑटोमोबाइल: भारत का लक्ष्य अफ्रीका में वाहनों, विशेषकर दोपहिया और किफायती कारों की बढ़ती मांग का लाभ उठाकर अपने ऑटोमोबाइल निर्यात का विस्तार करना है।
- नवीकरणीय ऊर्जा: भारत और अफ्रीका नवीकरणीय ऊर्जा, विशेष रूप से सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी होने की अनूठी स्थिति में हैं। “एक विश्व, एक ग्रिड” की परिकल्पना का उद्देश्य भूमि और जल के ऊपर ऊर्जा ग्रिड को जोड़ना है।सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और ऊर्जा-कुशल समाधानों में भारत की विशेषज्ञता ने अफ्रीका में संधारणीय ऊर्जा स्रोतों की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।20 से अधिक अफ्रीकी देश अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance- ISA) में भाग ले रहे हैं, जो नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग के प्रति मज़बूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- रसद और परिवहन: रसद और परिवहन बुनियादी ढाँचे में सुधार को भारत तथा अफ्रीकी देशों के बीच सुचारू व्यापार प्रवाह को सुविधाजनक बनाने के लिये महत्त्वपूर्ण माना जाता है।भारत कुशल लॉजिस्टिक्स अवसंरचना और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी के विकास में सहायता के लिये अपने पीएम गति शक्ति मास्टर प्लान और यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस पोर्टल (Unified Logistics Interface Portal- ULIP) को अफ्रीका के साथ साझा करने की योजना बना रहा है।अफ्रीकी महाद्वीपीय मुक्त व्यापार क्षेत्र (African Continental Free Trade Area- AfCFTA) ने ऑटोमोबाइल और लॉजिस्टिक्स को भारत तथा अफ्रीका के बीच सहयोग की पर्याप्त संभावना वाले क्षेत्रों के रूप में पहचाना है।AfCFTA एक मुक्त व्यापार समझौता है जिसे अफ्रीका के भीतर शुल्क मुक्त व्यापार को सुविधाजनक बनाने के लिये विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को खत्म करना है साथ ही वस्तुओं, सेवाओं तथा लोगों की मुक्त आवाजाही को बढ़ावा देना है।
- यह पहल अफ्रीका के विकास एजेंडा 2063 का हिस्सा है, जो पूरे महाद्वीप में एकीकृत आर्थिक बाज़ार की परिकल्पना करता है।अफ्रीका के साथ भारत के मौजूदा व्यापार में कच्चे तेल से लेकर रसायन और वस्त्र तक कई तरह के उत्पाद शामिल हैं। AfCFTA द्वारा व्यापार विविधीकरण तथा मूल्य संवर्द्धन की दिशा में उठाए गए कदम भारत के निर्यात हितों एवं निवेश रणनीतियों के साथ अच्छी तरह से सुमेलित हैं।
- विश्व व्यापार संगठन सुधारों के लिये एकीकृत दृष्टिकोण: भारत ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) सुधारों, विशेष रूप से खाद्य सुरक्षा, कृषि और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण जैसे क्षेत्रों में एकीकृत अफ्रीकी रुख का आह्वान किया है।वैश्विक व्यापार वातावरण में आवश्यक बदलावों को आगे बढ़ाने के लिये एक समन्वित दृष्टिकोण आवश्यक है, जो तेज़ी से संरक्षणवादी बन गया है।
- ड्यूटी-फ्री टैरिफ वरीयता और FTA: भारत ने गैर-पारस्परिक आधार पर अफ्रीका के 27 सबसे कम विकसित देशों (LDC) को ड्यूटी-फ्री टैरिफ वरीयता (DFTP) प्रदान की है।भारत द्वारा DFTP योजना LDC से भारत को आयात पर टैरिफ वरीयता प्रदान करती है, जो सबसे कम सामाजिक-आर्थिक संकेतकों वाले विकासशील देश हैं।इसके अतिरिक्त भारत व्यापार की मात्रा को बढ़ाने और वस्तुओं के आदान-प्रदान की सीमा में विविधता लाने के लिये दक्षिण अफ्रीका सहित अफ्रीकी देशों के साथ नए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) की संभावना तलाशने का इच्छुक है।
सामरिक सहयोग
- अफ्रीकी संघ के लिये समर्थन: भारत ने अफ्रीकी संघ की G-20 में पूर्ण सदस्यता का समर्थन करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे वैश्विक मंच पर अफ्रीकी आवाज़ को बुलंद करने की उसकी प्रतिबद्धता और प्रबल हुई है।
- विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ): भारत अपने निवेशकों को अफ्रीका के विनिर्माण क्षेत्रों में स्थायी उपस्थिति बनाने के लिये प्रोत्साहित करता है और आर्थिक संबंधों को गहरा करने के साधन के रूप में SEZ का विस्तार करने पर विचार करता है।
- ग्लोबल साउथ का प्रतिनिधित्व: भारत का लक्ष्य ग्लोबल साउथ के लिये एक अग्रणी आवाज़ बनना है, जो बहुपक्षीय मंचों पर समान और समावेशी विकास का समर्थन करता है, जो अफ्रीका सहित विकासशील देशों की भू-राजनीतिक एवं आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के व्यापक लक्ष्य के साथ संरेखित होता है।
भारत-अफ्रीका व्यापार में वर्तमान रुझान
- व्यापार के आँकड़े: वित्त वर्ष 2022-23 में भारत और अफ्रीका के बीच द्विपक्षीय व्यापार 9.26% बढ़कर लगभग 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया। निर्यात का मूल्य 51.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर और आयात का मूल्य 46.65 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा।
- वित्त वर्ष 24 में भारत ने अफ्रीकी देशों को 38.17 बिलियन अमेरिकी डॉलर की वस्तु निर्यात की, जिसमें नाइज़ीरिया, दक्षिण अफ्रीका और तंजानिया जैसे प्रमुख गंतव्य शामिल थे।
- प्रमुख निर्यातों में पेट्रोलियम उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स, चावल और वस्त्र शामिल थे।
- अफ्रीकी संघ संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और संयुक्त अरब अमीरात के बाद भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है।
- अफ्रीकी संघ के भीतर नाइज़ीरिया भारत का शीर्ष व्यापारिक भागीदार है, जिसका व्यापार में 20.91% हिस्सा है।
आयात संरचना: अफ्रीका से भारत के आयात में प्राथमिक उत्पादों और प्राकृतिक संसाधनों का प्रभुत्व है। शीर्ष आयातों में शामिल हैं:
- ईंधन: आयात का 61% हिस्सा, मुख्य रूप से नाइजीरिया, अंगोला और अल्जीरिया से कच्चा तेल।
- कीमती पत्थर और काँच: 20% हिस्सा, घाना, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से प्राप्त।
- सब्जियाँ, धातुएँ और खनिज: बेनिन, सूडान, जाम्बिया, दक्षिण अफ्रीका, मोरक्को और कोटे डी आइवर सहित विभिन्न अफ्रीकी देशों से प्राप्त।
निर्यात संरचना:
- ईंधन: 20%, जिसमें मोज़ाम्बिक, टोगो, तंज़ानिया, केन्या और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों को गैर-कच्चा पेट्रोलियम तेल शामिल है।
- रसायन: 18.5%, जिसमें नाइजीरिया, मिस्र और केन्या को फार्मास्यूटिकल्स शामिल हैं।
- मशीनें और इलेक्ट्रिकल्स: 12.59%, नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका और मिस्र को निर्यात किये गए।
- आर्थिक निवेश: भारत ने 43 अफ्रीकी देशों में 206 बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में 12.37 बिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक का निवेश किया है, जिसका लाखों लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
