Sat. Jun 13th, 2026

15 जनवरी, 2022 को टोंगा में हुंगा टोंगा-हुंगा हापाई ज्वालामुखी का विस्फोट एक अविश्वसनीय प्राकृतिक घटना थी जिसके व्यापक और दूरगामी परिणाम हुए। विस्फोट ने न केवल एक विनाशकारी सुनामी उत्पन्न की बल्कि पूरे विश्व में ध्वनि तरंगें उत्पन्न कीं साथ ही समताप मंडल में अभूतपूर्व मात्रा में जल वाष्प भी छोड़ी। हाल ही में जर्नल ऑफ क्लाइमेट में प्रकाशित एक अध्ययन में इस ज्वालामुखी विस्फोट के दीर्घकालिक जलवायु प्रभावों की जांच की गई है। अध्ययन से पता चला है कि जनवरी 2022 में हुंगा टोंगा-हुंगा हापाई ज्वालामुखी के विस्फोट का वैश्विक मौसम के पैटर्न पर महत्त्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है।

हुंगा टोंगा-हुंगा हापाई ज्वालामुखी

  • यह एक अंतर-समुद्री ज्वालामुखीय विस्फोट है जिसमें दो छोटे निर्जन द्वीप, हुंगा-हापाई और हुंगा-टोंगा शामिल हैं।
  • पिछले कुछ दशकों से इस ज्वालामुखी में नियमित रूप से विस्फोट रहा है।
  • यह ज्वालामुखी द्वारा प्रति हज़ार वर्ष में किये जाने वाले सबसे बड़े विस्फोटों में से एक है।
  • इसके अत्यधिक विस्फोटक होने का एक कारण ईंधन-शीतलक परस्पर क्रिया (Fuel-Coolant interaction) है।
  • हुंगा टोंगा विस्फोट की अनूठी विशेषता यह है कि इससे समताप मण्डल में बड़े पैमाने पर जलवाष्प का उत्सर्जन होता है।
  • आमतौर पर ज्वालामुखीय धुआँ, जिसमें अधिकांशतः सल्फर डाइऑक्साइड होता है, पृथ्वी की सतह को अस्थायी रूप से शीतल कर देता है।
  • जब सल्फर डाइऑक्साइड को सल्फेट एरोसोल में परिवर्तित किया जाता है, तो सूर्य का प्रकाश अंतरिक्ष में परावर्तित होती है, जिससे सतह का तापमान कम हो जाता है, जब तक कि सल्फेट या तो सतह पर वापस नहीं आ जाता या वर्षा द्वारा विस्थापित नहीं कर दिया जाता।
  • हुंगा टोंगा ज्वालामुखी का जलवायु पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

वर्ष 2023 में असाधारण ओज़ोन छिद्र

  • चूँकि, हुंगा टोंगा एक अंतर समुद्री ज्वालामुखी है, इसलिये इसके विस्फोट के दौरान 100-150 मिलियन टन जलवाष्प उत्पन्न हुई, जिससे समताप मंडल में जल की मात्रा लगभग 5% बढ़ गई।
  • समताप मंडल में यह जलवाष्प ओज़ोन परत के विनाश में योगदान देती है तथा एक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस के रूप में कार्य करती है।
  • अध्ययन में पाया गया कि अगस्त से दिसंबर 2023 तक देखे गए वृहद ओज़ोन छिद्र का मुख्य कारण आंशिक रूप से हुआ टोंगा विस्फोट था।
  • यह ओज़ोन छिद्र लगभग दो वर्ष पहले ही बन गया था, क्योंकि विस्फोट से उत्पन्न जलवाष्प को अंटार्कटिका के ऊपर ध्रुवीय समतापमण्डल तक पहुँचने के लिये पर्याप्त समय मिल गया था।

ऑस्ट्रेलिया में ग्रीष्मकालीन आर्द्रता में वृद्धि

  • मॉडल ने वर्ष 2024 के ग्रीष्मकाल में सदर्न एनुलर मोड (Southern Annular Mode) के सकारात्मक चरण की भविष्यवाणी की, जिससे ऑस्ट्रेलिया में ग्रीष्मकालीन आर्द्रता की संभावना बढ़ जाएगी।
  • यह अपेक्षित अल-नीनो स्थितियों के विपरीत था और मॉडल दो वर्ष पूर्व ही इसका पूर्वानुमान लगाने में सक्षम था।

क्षेत्रीय मौसम व्यवधान

  • अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2029 तक ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी भाग में सामान्य से अधिक ठंड और वर्षा होगी।
  • उत्तरी अमेरिका में सर्दियाँ सामान्य से अधिक गर्म हो सकती हैं, जबकि स्कैंडिनेविया में सर्दियाँ सामान्य से अधिक ठंडी हो सकती हैं।
  • इन क्षेत्रीय मौसम पैटर्नों का कारण, टोंगा विस्फोट के परिणामस्वरूप वायुमंडलीय तरंगों के प्रवाह पर पड़ने वाला प्रभाव है, जो स्थानीय मौसम की स्थिति को प्रत्यक्षतः प्रभावित करता है।
  • यह क्षेत्र-विशिष्ट जलवायु पूर्वानुमान और अनुकूलन रणनीतियों की आवश्यकता पर बल देता है।

वैश्विक तापमान पर न्यूनतम प्रभाव

  • वैश्विक औसत तापमान पर विस्फोट का प्रभाव बहुत कम, लगभग 0.015°C था।
  • लगभग एक वर्ष तक देखे गए अविश्वसनीय रूप से उच्च तापमान को टोंगा विस्फोट के उद्भव का कारण नहीं माना जा सकता।

अंतर-समुद्री ज्वालामुखी

  • अंतर-समुद्री ज्वालामुखी (Undersea Volcano) विस्फोट एक ऐसे ज्वालामुखी में होता है जो समुद्र की सतह के नीचे स्थित होता है। समुद्र के भीतर अनुमानित एक मिलियन ज्वालामुखी हैं और उनमें से अधिकांश टेक्टोनिक प्लेटों के निकट स्थित हैं।
  • इन छिद्रों से लावा के अतिरिक्त राख भी निकलती है। ये समुद्र के तल पर जमा हो जाते हैं और समुद्री टीले (जल के नीचे स्थित पर्वत जो समुद्र के तल पर निर्मित होते हैं लेकिन जल की सतह तक नहीं पहुंँचते हैं) का निर्माण करते हैं।

ईंधन-शीतलक इंटरैक्शन

  • यदि मैग्मा समुद्र के जल में धीरे-धीरे ऊपर उठता है, तो लगभग 1200 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर भी मैग्मा तथा जल के बीच भाप की एक पतली परत निर्मित होती है। यह मैग्मा की बाह्य सतह को शीतल करने के लिये इंसुलेशन परत के रूप में कार्य करती है। लेकिन यह प्रक्रिया तब प्रभावी नहीं होती जब तक कि ज्वालामुखी गैस से भरी मैग्मा का विस्फोट न हो।
  • जब मैग्मा तेज़ी से जल में प्रवेश करता है तो भाप की परत जल्द ही बाधित हो जाती है, जिससे गर्म मैग्मा शीतल जल के साथ सीधे संपर्क में आ जाता है। यह हथियार-स्तर के रासायनिक विस्फोटों के समान है।
  • अत्यंत हिंसक विस्फोटों से मैग्मा अलग-अलग हो जाता है।
  • एक शृंखला प्रतिक्रिया तब शुरू होती है, जब नए मैग्मा के टुकड़े जल के लिये गर्म आंतरिक सतहों (Hot Interior Surfaces) को उजागर करते हैं और विस्फोट अंततः ज्वालामुखी कणों को बाहर निकालते हैं तथा सुपरसोनिक गति के साथ विस्फोट करते हैं।

Login

error: Content is protected !!