इंडोनेशिया के बाली में हुए 10वें वर्ल्ड वाटर फोरम में जारी विश्व बैंक की नई रिपोर्ट, “वाटर फॉर शेयर्ड प्रॉस्पेरिटी” चिंताजनक वैश्विक जल संकट तथा विश्व भर में मानव और आर्थिक विकास पर इसके प्रभाव को उजागर करती है।
रिपोर्ट की प्रमुख बिंदु
जल की कमी के चिंताजनक आँकड़े
- विश्व स्तर पर जल और स्वच्छता सेवाओं तक पहुँच में महत्त्वपूर्ण अंतर मौज़ूद हैं। वर्ष 2022 तक, विश्व भर में 2.2 बिलियन लोगों के पास सुरक्षित रूप से प्रबंधित पेयजल सेवाओं तथा 3.5 बिलियन लोगों के पास सुरक्षित रूप से प्रबंधित स्वच्छता तक पहुँच नहीं है। बुनियादी पेयजल और स्वच्छता सेवाओं से वंचित दस में से आठ लोग ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करते हैं।
जल तक पहुँच में क्षेत्रीय असमानताएँ
- ताज़े जल (Freshwater) के वितरण में असमानता: वैश्विक जनसंख्या के 36% के साथ चीन और भारत के पास विश्व का केवल 11% ताज़ा जल है, जबकि 5% जनसंख्या के साथ उत्तरी अमेरिका के पास 52% ताज़ा जल है।
- अफ्रीका और एशिया: कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के पास अफ्रीका के आधे से अधिक जल संसाधन हैं, फिर भी साहेल, दक्षिणपूर्वी अफ्रीका तथा दक्षिण एवं मध्य एशिया जैसे क्षेत्र में जल-संकट बना हुआ हैं।
- निम्न आय वाले देश: इन देशों में सुरक्षित पेयजल तक पहुँच में कमी देखी गई है, वर्ष 2000 के बाद से अतिरिक्त 197 मिलियन लोगों तक इसकी पहुँच नहीं है।
- अधिकारहीन समूह: पहुँच में असमानताएँ लिंग, स्थान, जातीयता, नस्ल और अन्य सामाजिक पहचान के आधार पर हाशिये पर रहने वाले समूहों को भी प्रभावित करती हैं।
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
- जलवायु परिवर्तन से जल-संबंधी जोखिम बढ़ गए हैं, जिससे विकासशील देशों को अधिक गंभीर और लंबे समय तक सूखे तथा बाढ़ जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
- 800 मिलियन से अधिक लोग ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहाँ सूखा पड़ने का जोखिम काफी अधिक है और इससे दोगुने लोग बाढ़-प्रवण क्षेत्रों में निवास करते हैं।
- वर्ष 2100 तक मौसम संबंधी सूखे का वैश्विक भूमि क्षेत्र के 15% अधिक भाग को प्रभावित करने का अनुमान है, जो तापमान प्रभावों पर विचार करने पर लगभग 50% तक बढ़ जाता है।
- मध्य यूरोप, एशिया, हॉर्न ऑफ अफ्रीका, भारत, उत्तरी अमेरिका, अमेज़ोनिया और मध्य ऑस्ट्रेलिया ऐसे क्षेत्र हैं जो इससे सर्वाधिक प्रभावित होंगे।
- निर्धन जनसंख्या जल से संबंधित जोखिमों के प्रति अधिक संवेदनशील होती है और उनके पास अनुकूलन की सीमित क्षमता होती है, जिससे निर्धनता चक्र कायम रहता है।
मानव पूंजी एवं आर्थिक विकास
- शैक्षिक प्राप्ति तथा समग्र मानव पूंजी विकास हेतु जल और स्वच्छता सेवाओं तक पहुँच महत्त्वपूर्ण है।
- कम आय वाले देशों में 56% रोज़गार मुख्य रूप से जल-गहन क्षेत्रों में मौज़ूद हैं, जो जल की उपलब्धता के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं।
- उप-सहारा अफ्रीका में 62% नौकरियाँ पानी पर निर्भर हैं, और कम वर्षा से सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि बहुत प्रभावित होती है।
सामाजिक सामंजस्य एवं संघर्ष
- प्रभावी एवं न्यायसंगत जल प्रबंधन सामुदायिक विश्वास और सहयोग को बढ़ावा देता है, जबकि कुप्रबंधन संघर्षों को बढ़ा सकता है।
- बेहतर जल संसाधन प्रबंधन समावेशिता को बढ़ावा देकर तथा तनाव को कम करके शांति एवं सामाजिक सामंजस्य में योगदान देता है।
सतत् जल प्रबंधन हेतु अनुशंसित हस्तक्षेप
- सर्वाधिक निर्धन जनसंख्या के लिये जल-जलवायु जोखिमों (hydro-climatic risks) के प्रति समुत्थानशीलता को बढ़ावा देना आवश्यक है।
- इसके लिये जल संसाधनों का बेहतर विकास, प्रबंधन एवं आवंटन ज़रूरी है।
- निर्धनता कम करने और साझा समृद्धि (Shared Prosperity) बढ़ाने के लिये जल सेवाओं की न्यायसंगत व समावेशी की पहुँच को बढ़ावा देना आवश्यक है।
वर्ल्ड वाटर फोरम, 2024
- 10वाँ वर्ल्ड वाटर फोरम, 2024 (10th World Water Forum- WWF) वाटर फॉर शेयर्ड प्रोस्पेरिटी (Water for Shared Prosperity) की थीम के साथ, इंडोनेशिया गणराज्य की सरकार व विश्व जल परिषद द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गयाI
- इसका लक्ष्य ग्रह के सतत् एवं न्यायसंगत विकास हेतु राजनीतिक प्राथमिकता के रूप में जल का संरक्षण करने के लिये अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को एकत्रित करना है।
- विश्व जल परिषद, वर्ष 1996 में स्थापित और मार्सिले में स्थित एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जिसमें भारत सहित 52 देशों के 260 सदस्य संगठन हैं।
- यह विश्व का सबसे बड़ा कार्यक्रम है और वर्ष 1997 के बाद से प्रत्येक तीन वर्ष में एक पृथक देश इसकी मेज़बानी करता ह।
- यह जल समुदाय और प्रमुख निर्णय निर्माताओं को सभी के लिये स्वच्छ एवं उपयुक्त जल उपलब्ध कराने के लिये वैश्विक जल चुनौतियों पर सहयोग करने तथा दीर्घकालिक प्रगति प्रतिबद्धताएँ पूर्ण करने के लिये एक बेहतर मंच प्रदान करता है।
