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वाणिज्य विभाग के आँकड़ों से पता चला है कि वर्ष 2023-24 में भारत के कृषि निर्यात में 8.2% की गिरावट आई है, जिसका मुख्य कारण विभिन्न वस्तुओं पर सरकारी प्रतिबंधों का लगना है। इस बीच, खाद्य तेल की कम कीमतों के कारण कृषि आयात में 7.9% की गिरावट आई है।ये प्रवृतियाँ कृषि क्षेत्र को स्थिर करने तथा घरेलू उपलब्धता एवं बाज़ार वृद्धि, दोनों को सुनिश्चित करने के लिये एक संतुलित कृषि निर्यात-आयात नीति की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।

भारतीय कृषि निर्यात एवं आयात की वर्तमान स्थिति

कृषि निर्यात

  • वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान भारत के कृषि निर्यात में 8.2% की भारी गिरावट देखी गई, जिससे यह 48.82 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया।
  • यह गिरावट वित्तीय वर्ष 2022-23 में 53.15 बिलियन अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड-तोड़ स्थिति के बाद देखी गयी।

अस्वीकृत वस्तुएँ

  • चीनी निर्यात: अक्तूबर 2023 से चीनी निर्यात की अनुमति नहीं दी गई, जिससे 2023-24 में निर्यात पिछले वर्ष के 5.77 बिलियन अमेरिकी डॉलर से घटकर 2.82 बिलियन अमेरिकी डॉलर रह गया।
  • गैर-बासमती चावल निर्यात: घरेलू उपलब्धता और खाद्य मुद्रास्फीति पर चिंताओं के कारण जुलाई 2023 से सभी प्रकार के सफेद गैर-बासमती चावल निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
  • वर्तमान में गैर बासमती वाले क्षेत्र में केवल उबले हुए अनाज के नौवहन (Shipments)  की अनुमति है, जिस पर 20% शुल्क लगता है।
  • इन प्रतिबंधों ने कुल गैर-बासमती निर्यात को वर्ष 2022-23 में रिकॉर्ड 6.36 बिलियन अमेरिकी डॉलर से घटाकर वर्ष 2023-24 में 4.57 बिलियन अमेरिकी डॉलर कर दिया है।
  • गेहूँ निर्यात: मई, 2022 में गेहूँ का निर्यात बंद हो गया, जो 2021-22 में 2.12 बिलियन अमेरिकी डॉलर से घटकर 2023-24 में 56.74 मिलियन अमेरिकी डॉलर रह गया।
  • प्याज निर्यात: मई 2024 में केंद्र ने प्याज के निर्यात से प्रतिबंध हटा दिया। इसके साथ ही 550 अमेरिकी डॉलर प्रतिटन का न्यूनतम मूल्य (जिसके नीचे कोई निर्यात नहीं हो सकता) और 40% शुल्क निर्धारित किया गया।
  • आधिकारिक आँकड़ों से ज्ञात होता है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान प्याज का कुल निर्यात केवल 17.08 लाख टन हुआ, जिसका मूल्य 467.83 मिलियन अमेरिकी डॉलर था, जबकि वित्तीय वर्ष 2022-23 में यह 25.25 लाख टन था, जिसका मूल्य लगभग 561.38 मिलियन अमेरिकी डॉलर था।
  • हालाँकि, बासमती चावल और मसालों के निर्यात में वृद्धि देखी गई, बासमती चावल 5.84 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया और मसालों के निर्यात ने पहली बार 4 बिलियन अमेरिकी डॉलर का आँकड़ा पार कर लिया।
  • समुद्री उत्पादों, अरंडी का तेल (Castor Oil) और अन्य अनाज (मुख्य रूप से मक्का) के निर्यात में भी वृद्धि दर्ज़ की गई, जिसने समग्र निर्यात के बास्केट की वृद्धि में योगदान दिया।

कृषि आयात

  • वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान भारत के कृषि आयात में 7.9% की गिरावट देखी गई, जो वैश्विक बाज़ार स्थितियों और घरेलू मांग के प्रभाव को स्पष्ट करती है।
  • खाद्य तेल आयात में कमी:
  • समग्र कृषि आयात में उल्लेखनीय गिरावट मुख्यतः एक ही वस्तु के कारण थी: खाद्य तेल।
  • रूस-यूक्रेन युद्ध के ठीक एक वर्ष बाद 2022-23 में भारत में वनस्पति वसा का आयात 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया, जबकि इस दौरान वनस्पति तेलों की वैश्विक कीमतें अपने चरम पर थीं।
  • हालाँकि, वर्ष 2023-24 में औसत FAO वनस्पति तेल उप-सूचकांक घटकर 123.4 अंक हो गया, जो न्यूनतम वैश्विक कीमतों का संकेत देता है।
  • परिणामस्वरूप, पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान वनस्पति तेल का आयात 15 बिलियन अमेरिकी डॉलर से कम हुआ।

दलहन आयात में वृद्धि

  • वर्ष 2023-24 में दलहन आयात लगभग दोगुना होकर 3.75 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जो वर्ष 2015-16 और वर्ष 2016-17 के क्रमशः 3.90 बिलियन अमेरिकी डॉलर तथा 4.24 बिलियन अमेरिकी डॉलर के स्तर के बाद सर्वाधिक है।
  • दलहन आयात में वृद्धि इस आवश्यक वस्तु की घरेलू मांग की पूर्ति करने के लिये विदेशी स्रोतों पर निरंतर निर्भरता को उजागर करती है।

भारत के कृषि निर्यात और आयात को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक

  • निर्यात प्रतिबंध: सरकार ने घरेलू उपलब्धता और खाद्य मुद्रास्फीति पर चिंताओं के कारण चावल, गेहूँ, चीनी और प्याज़ जैसी वस्तुओं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है।
  • इन प्रतिबंधों के कारण इन वस्तुओं के निर्यात में उल्लेखनीय गिरावट आई है।
  • वैश्विक कीमतों में उतार चढ़ाव: संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन (Food and Agriculture Organization- FAO) के खाद्य मूल्य सूचकांक (आधार: 2014-16= 100) का उपयोग वैश्विक कृषि-वस्तु कीमतों को ट्रैक करने के लिये एक संदर्भ के रूप में किया जाता है।
  • FAO खाद्य मूल्य सूचकांक वर्ष 2013-14 में औसतन 119.1 अंक से गिरकर वर्ष 2013-14 और वर्ष 2019-20 के बीच 96.5 अंक हो गया, जो वैश्विक कृषि-वस्तु कीमतों में गिरावट को प्रदर्शित करता है।
  • वैश्विक कीमतों में इस गिरावट ने भारत के कृषि निर्यात की लागत प्रतिस्पर्द्धात्मकता को कम कर दिया।
  • हालाँकि, कोविड-19 महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक मूल्य सुधार के कारण वर्ष 2022-23 में FAO सूचकांक 140.8 अंक तक बढ़ गया।
  • वैश्विक कीमतों में इस वृद्धि के परिणामस्वरूप वर्ष 2022-23 में भारत का कृषि निर्यात और आयात वित्तीय वर्ष 2023-24 में गिरावट से पहले, अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुँच गया।
  • वर्ष 2023-24 में औसत FAO सूचकांक घटकर 121.6 अंक हो गया, जबकि वनस्पति तेल उप-सूचकांक घटकर 123.4 अंक हो गया, जिससे भारत के खाद्य तेल आयात बिल में गिरावट आई।
  • सरकारी नीतियाँ: दालों और खाद्य तेलों पर कम अथवा शून्य आयात शुल्क को बनाए रखने का सरकार का निर्णय घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के उसके लक्ष्य के विपरीत है।
  • यह नीति घरेलू कृषि के बजाय आयात को बढ़ावा देती है, जिससे संभावित रूप से किसानों को फसलों में विविधता लाने के प्रति हतोत्साहित किया जा सकता है। अंततः यह दीर्घकालिक कृषि विकास और आत्मनिर्भरता को कमज़ोर करता है।

कृषि निर्यात नीति

  • एक कृषि निर्यात नीति में सरकारी नियमों, कार्यों और प्रोत्साहनों का एक संग्रह होता है जिसका उद्देश्य एक विशिष्ट राष्ट्र से कृषि वस्तुओं के निर्यात को विनियमित करना तथा बढ़ावा देना होता है।
  • इस नीति में कृषि उत्पादकों और निर्यातकों की अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुँच को बढ़ावा देने तथा उनकी प्रतिस्पर्द्धा को बढ़ाने के लिये निर्यात सब्सिडी, शुल्क में कमी, गुणवत्ता मानक, बाज़ार पहुँच समझौते, वित्तीय प्रोत्साहन एवं व्यापार संवर्द्धन पहल शामिल हैं।
  • भारत की कृषि निर्यात नीति, 2018: दिसंबर 2018 में सरकार ने भारत को वैश्विक कृषि में अग्रणी शक्ति के रूप में स्थापित करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिये उचित नीतिगत उपायों का उपयोग करके भारत की कृषि निर्यात क्षमता का लाभ उठाने के उद्देश्य से, एक व्यापक कृषि निर्यात नीति लागू की।
  • उद्देश्य: इसका लक्ष्य वर्ष 2022 तक कृषि निर्यात को 30 अरब डॉलर से दोगुना करके 60 अरब डॉलर से अधिक करना है।
  • नीति में यह उम्मीद की जा रही थी कि किसानों को विदेशी बाज़ार में निर्यात के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा।
  • यह जातीय, जैविक, पारंपरिक और गैर-पारंपरिक कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देगा।
  • कृषि निर्यात नीति के कार्यान्वयन की निगरानी के लिये एक निगरानी ढाँचा स्थापित किया जाएगा।

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