Mon. Jun 15th, 2026

बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिये बंगाल की खाड़ी पहल ने 20 मई, 2024 को समूह के चार्टर के लागू होने के साथ ही एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर ली है।

BIMSTEC समूह

  • बिम्सटेक सात सदस्य देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है, जिसमें दक्षिण एशिया के पाँच देश- बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया के दो देश-  म्याँमार एवं थाईलैंड शामिल हैं।
  • इसका गठन वर्ष 1997 में बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के देशों के बीच बहुमुखी तकनीकी और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था।
  • बिम्सटेक में शामिल देशों की कुल आबादी लगभग 1.5 बिलियन है तथा इनकी संयुक्त GDP 3.8 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है।

उत्पत्ति

  • इस उप-क्षेत्रीय संगठन की स्थापना वर्ष 1997 में बैंकॉक घोषणा को अपनाने के साथ हुई थी।
  • प्रारंभ में इसमें 4 सदस्य देश शामिल थे, इसलिये इसे ‘BIST-EC’ (बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका और थाईलैंड आर्थिक सहयोग) के नाम से जाना जाता था।
  • वर्ष 1997 में म्याँमार के इसमें शामिल होने के बाद इसका नाम बदलकर ‘BIMST-EC’ कर दिया गया।
  • वर्ष 2004 में नेपाल और भूटान के शामिल होने के साथ ही एक बार पुनः इसका नाम बदलकर ‘बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिये बंगाल की खाड़ी पहल’ (बिम्सटेक) कर दिया गया।

BIMSTEC चार्टर की प्रमुख विशेषताएँ

  • अंतर्राष्ट्रीय मान्यता: बिम्सटेक को एक विधिक इकाई के रूप में आधिकारिक दर्जा प्राप्त है, जिसके परिणामस्वरूप इसे कूटनीति एवं सहयोग के मामलों पर अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ प्रत्यक्ष तौर पर वार्ता करने का अधिकार है।
  • साझा लक्ष्य: यह चार्टर, बिम्सटेक के उद्देश्यों को रेखांकित करता है, जो सदस्य देशों के बीच विश्वास एवं मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित करने तथा बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में आर्थिक विकास व सामाजिक प्रगति में तेज़ी लाने पर केंद्रित है।
  • संरचित संगठन: बिम्सटेक के संचालन हेतु एक स्पष्ट रूपरेखा स्थापित की गई है, जिसमें शिखर सम्मेलन, मंत्रिस्तरीय और वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर नियमित बैठकों की रूपरेखा दी की गई है।
  • सदस्यता का विस्तार: यह चार्टर नए देशों को बिम्सटेक में शामिल होने और अन्य देशों को पर्यवेक्षकों के रूप में भाग लेने की अनुमति देकर भविष्योन्मुखी विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।

सहयोग के क्षेत्रों का पुनर्गठन करते हुए इनकी संख्या घटाकर 7 कर दी गई है और प्रत्येक सदस्य-राज्य एक क्षेत्र के लिये नेतृत्वकर्त्ता के रूप में कार्य करेगा।

  1. व्यापार, निवेश और विकास के लिये बांग्लादेश
  2. पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के के लिये भूटान
  3. ऊर्जा के साथ-साथ सुरक्षा के लिये भारत
  4. कृषि और खाद्य सुरक्षा के लिये
  5. पीपल-टू-पीपल कनेक्ट के लिये नेपाल
  6. विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के लिये श्रीलंका
  7. कनेक्टिविटी के लिये थाईलैंड

BIMSTEC

  • एक्ट ईस्ट नीति (Act East Policy) के अनुरूप: BIMSTEC भारत की एक्ट ईस्ट नीति के अधिक अनुरूप है। यह भारत को हिंद महासागर क्षेत्र और हिंद-प्रशांत में व्यापार एवं सुरक्षा प्राप्त करने में मदद करता है।
  • सार्क (SAARC) का विकल्प: उरी हमलों के प्रत्युत्तर में वर्ष 2016 के दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (South Asian Association for Regional Cooperation- SAARC) शिखर सम्मेलन में पाकिस्तान को अलग-थलग करने के भारत के प्रयासों के बाद, BIMSTEC एक बेहतर क्षेत्रीय सहयोग मंच के रूप में उभरा है, जो दक्षिण एशिया में सार्क का विकल्प प्रस्तुत करता है।
  • चीन के प्रतिकार के रूप में: जैसे-जैसे चीन दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (Belt and Road Initiative- BRI) का विस्तार कर रहा है, भारत इस बढ़ती उपस्थिति को अपने क्षेत्रीय प्रभुत्व के लिये एक चुनौती के रूप में देखता है।
  • इसका विरोध  करने के लिये, भारत BIMSTEC में अग्रणी भूमिका निभा रहा है और इसे क्षेत्रीय सहयोग के वैकल्पिक मंच के रूप में बढ़ावा दे रहा है।
  • अमूर्त संस्कृति को बढ़ावा देना: कला, संस्कृति और बंगाल की खाड़ी से संबंधित अन्य विषयों पर अनुसंधान हेतु बिहार के नालंदा विश्वविद्यालय में स्थापित सेंटर फॉर बे ऑफ बंगाल स्टडीज़ (CBS) जैसी पहल क्षेत्र की अमूर्त विरासत के संबंध में नई अंतर्दृष्टि प्रदान कर सकती है।
  • क्षेत्रीय सहयोग का मंच: यह दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के देशों को एक साथ लाता है तथा क्षेत्रीय सहयोग के संवर्द्धन हेतु एक मंच प्रदान करता है।
  • इसने सुरक्षा मामलों और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (Humanitarian Assistance and Disaster Relief- HADR) के प्रबंधन में गहन सहयोग को बढ़ावा दिया है।

Login

error: Content is protected !!