भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार ने हाल ही में हरित बायोहाइड्रोजन और जैव ऊर्जा (बायोएनर्जी) उत्पादन हेतु अवक्रमित भूमि पर बायोमास खेती करने हेतु चर्चा के लिये बैठक बुलाई।इस महत्त्वपूर्ण बैठक में बायोमास खेती के लिये अवक्रमित भूमि (बंजर) का उपयोग करने की क्षमता का पता लगाने हेतु प्रमुख हितधारकों और अनुसंधान संस्थानों को एक साथ लाया गया। बैठक में बायोमास खेती के लिये अवक्रमित भूमि के उपयोग का पता लगाने हेतु प्रमुख हितधारक सरकारी मंत्रालयों, ज्ञान भागीदारों एवं अनुसंधान संस्थानों को एक साथ लाया गया। भारत में वर्ष 1999 से एक प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) है। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम वर्ष 1999-2001 तक देश के पहले PSA रहे थे।PSA के कार्यालय का उद्देश्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के मामलों में प्रधानमंत्री तथा कैबिनेट को व्यावहारिक और उद्देश्यपूर्ण सलाह प्रदान करना है।PSA कार्यालय को वर्ष 2018 में कैबिनेट सचिवालय के अधीन रखा गया था।
बैठक के प्रमुख बिंदु
बायोमास खेती की संभावनाएँ
- समुद्री शैवाल की खेती: बायोएनर्जी उत्पादन और समुद्री जैव विनिर्माण स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिये बायोमास के रूप में समुद्री शैवाल की खेती की संभावनाओं पर प्रकाश डाला गया।
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने शैवाल, शीरा (Molasses) और गन्ने आदि का उपयोग करके हरित ऊर्जा के लिये बायोमास उत्पादन पर एक प्रस्तुति दी।
सरकारी कार्यक्रम और डेटा उपयोग
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का एक उद्देश्य बायोमास-आधारित हरित बायोहाइड्रोजन उत्पादन के लिये केंद्रित पायलट (Focused Pilots) योजना शुरू करना है।
- नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of New & Renewable Energy- MNRE) ने बायोएनर्जी के लिये मंत्रालय में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला तथा अतिरिक्त कृषि-अवशेष अधिशेष संबंधी डेटा के लिये राष्ट्रीय बायोमास एटलस पर भी चर्चा की।
आर्थिक और सामरिक रूपरेखा
- बायोमास पर डेटा: राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर (National Remote Sensing Centre- NRSC) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation- ISRO) ने कृषि-अवशेषों एवं अवक्रमित भूमि से बायोमास उपलब्धता के लिये ‘भुवन’ नामक पोर्टल प्रस्तुत किया तथा बायोमास की क्षमता को समझने पर ज़ोर दिया।
भारत का राष्ट्रीय बायोमास एटलस वह टूल है जो लोगों को देश की बायोमास उपलब्धता के विश्लेषण में सहायता करता है।नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के तहत सरदार स्वर्ण सिंह राष्ट्रीय जैव-ऊर्जा संस्थान (SSS-NIBE) के बायोमास एवं ऊर्जा प्रबंधन प्रभाग ने एक एटलस विकसित किया।यह एटलस राज्य-वार और फसल-वार प्रति फसल उपलब्ध विभिन्न अवशेषों के अंशों के साथ-साथ फसलों की छवियों तथा उनके फसल अवशेषों के अनुपात को भी दर्शाता है।
अवक्रमित भूमि पर बायोमास खेती
- अवक्रमित भूमि पर बायोमास खेती से तात्पर्य ऐसी भूमि पर फसल या कार्बनिक पोधों को उगाने की प्रथा से है, जो मृदा के अपरदन, लवणीकरण अथवा वनों की कटाई जैसे कारकों के कारण पारंपरिक कृषि के लिये अनुपयुक्त हो गई है।
- बायोमास नवीकरणीय कार्बनिक पदार्थ है जो पादपों और जानवरों से प्राप्त होता है। बायोमास में सूर्य से संग्रहीत रासायनिक ऊर्जा होती है जो पादपों द्वारा प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से उत्पन्न होती है।
