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  • भारत ने खाद्य सुरक्षा के लिए वर्ष 2022-23 विपणन वर्ष में किसानों को सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से विश्व व्यापार संगठन (WTO) के शांति खंड को लागू किया।
  • भारत ने WTO को सूचित किया है कि उसने विपणन वर्ष 2022-2023 के लिए चावल के लिए कृषि समझौते (AOA) के तहत निर्दिष्ट न्यूनतम सीमा को पार कर लिया है।
  • भारत में वर्ष 2022-23 में चावल उत्पादन का मूल्य 52.8 बिलियन डॉलर था, इस दौरान किसानों को 6.39 बिलियन डॉलर की सब्सिडी दी गई।इसका तात्पर्य यह है कि भारत में चावल सब्सिडी उत्पादन के मूल्य का 12 प्रतिशत थी, जिससे वैश्विक व्यापार नियमों के अनुसार,10 प्रतिशत घरेलू समर्थन सीमा का उल्लंघन हुआ है।इस उल्लंघन के लिए भारत पर कोई करवाई नहीं की जा सकती है क्योंकि भारत ने “शांति खंड” लागू कर दिया है।
  • इसे लागू करने का उद्देश्य “भारत की गरीब और कमजोर आबादी की घरेलू खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करना है, न कि व्यापार करना है”।

शांति खंड

  • यह विश्व व्यापार संगठन के कृषि समझौते के अनुच्छेद 13 को संदर्भित करने के लिए व्यापार वार्ताकारों द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक शब्द है।
  • इसकी स्थापना WTOके द्वारा दिसंबर 2013 में बाली मंत्रिस्तरीय बैठक में की गई थी।
  • यह विकासशील देशों को गेहूं और चावल के लिए सीमा का उल्लंघन करने की चुनौतियों से प्रतिरक्षा प्रदान करता है।
  • इसमें यह निर्धारित किया गया है कि किसी भी देश को अपने ही लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों से कानूनी रूप से रोका नहीं जाएगा, भले ही सब्सिडी कृषि पर WTO समझौते में निर्दिष्ट सीमाओं का उल्लंघन करती हो।
  • भारत, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और चीन उन 80 WTO सदस्य देशों में शामिल हैं। जिन्होंने खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक स्टॉकहोल्डिंग (PSH) पर स्थायी समाधान खोजने के लिए पाठ आधारित वार्ता शुरू करने का आह्वान किया है।
  • यह धारा तब तक रहेगी जब तक खाद्य भंडारण की समस्या का स्थायी समाधान नहीं मिल जाता।

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