गृह मंत्रालय ने अपनी 2022-23 की वार्षिक रिपोर्ट में भारत-म्याँमार सीमा पर 100 किलोमीटर की स्मार्ट फेंसिंग प्रणाली तैयार करने की योजना पेश की है।SFS एक तकनीकी रूप से उन्नत सीमा सुरक्षा बुनियादी ढाँचा है जिसे संवेदनशील सीमा क्षेत्रों पर निगरानी और नियंत्रण में सुधार व बेहतरी के लिये डिज़ाइन किया गया है।इसमें आमतौर पर भौतिक संरचनाओं, सेंसर, कैमरे और संचार प्रणालियों का संयोजन शामिल होता है।”स्मार्ट” शब्द का तात्पर्य सीमा पर खतरों की प्रभावी ढंग से निगरानी और प्रतिक्रिया करने के लिये प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की प्रणाली की क्षमता से है।
भारत-म्याँमार सीमा के निकट स्मार्ट फेंसिंग प्रणाली की आवश्यकता
नृजातीय हिंसा और विद्रोह
- मणिपुर में नृजातीय हिंसा एक प्रमुख चिंता का विषय रही है, जिसके परिणामस्वरूप 3 मई, 2022 से 175 से अधिक लोगों की मौत हुई। पूर्वोत्तर राज्यों में मणिपुर में वर्ष 2022 में दर्ज कुल 201 में से 137 उग्रवाद से संबंधित घटनाएँ हुई हैं।
- मणिपुर मैतेई, नगा, कुकी, ज़ोमी, हमार विद्रोही समूहों की गतिविधियों से प्रभावित है।
- मणिपुर में नृजातीय हिंसा के लिये ज़िम्मेदार कुछ कारकों के रूप में बिना बाड़े वाली सीमा की उपस्थिति तथा म्याँमार से अनियमित प्रवासन को ज़िम्मेदार ठहराया गया है।
- इसके परिणामस्वरूप विभिन्न इंडियन इंसरजेंट ग्रुप्स (IIG) द्वारा हिंसा, ज़बरन वसूली तथा विविध मांगें शुरू हो गई हैं, जो भारत के पड़ोसी देशों में सुरक्षित आश्रय/शिविर बनाए हुए हैं।
- स्मार्ट फेंसिंग प्रणाली उग्रवादियों और अवैध तत्त्वों द्वारा अनधिकृत प्रवेश तथा घुसपैठ को रोकेगी, जिससे एक गंभीर सुरक्षा समस्या का समाधान होगा।
निगरानी बढ़ाना
- स्मार्ट फेंसिंग प्रणाली सीमा उल्लंघनों की निगरानी तथा जवाबी कार्यवाई करने के लिये उन्नत निगरानी प्रौद्योगिकियों से लैस है।
जटिल सुरक्षा चुनौतियों से निपटना
- इसे सामाजिक-आर्थिक विकास, जनजातीय संघर्ष और प्रवासन जैसे कारकों के कारण पूर्वोत्तर क्षेत्र को नाज़ुक सुरक्षा स्थिति का सामना करना पड़ता है।
- स्मार्ट फेंसिंग प्रणाली इन खतरों को कम करने और क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने हेतु एक कारगर उपाय है।
भारत-म्यांमार सीमा से संबंधित मुख्य बिंदु
- भारत म्यांमार के साथ 1643 किमी. से अधिक लंबी भूमि सीमा के साथ-साथ बंगाल की खाड़ी में समुद्री सीमा भी साझा करता है। चार पूर्वोत्तर राज्य, अर्थात् अरुणाचल प्रदेश (520 किमी.), नगालैंड (215 किमी.), मणिपुर (398 किमी.) और मिज़ोरम (510 किमी.)।
- गृह मंत्रालय की 2022-23 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार 1,643 किमी. में से 1,472 किमी. का सीमांकन पूर्ण हो चुका है।
- म्याँमार भारत से सटा एकमात्र आसियान देश है और इसलिये, यह दक्षिण-पूर्व एशिया का प्रवेश द्वार है।
- इसकी सीमा कई हिस्सों में खुली हुई और बिना फेंसिंग की है, जिससे द्विपक्षीय समझौते के तहत लोगों एवं वस्तुओं की निर्बाध आवाजाही की अनुमति मिलती है। सीमा पर अवैध गतिविधियाँ भी देखी जाती हैं तथा यह विभिन्न विद्रोही समूहों की गतिविधियों से भी प्रभावित होती है जो इस क्षेत्र में सक्रिय हैं और प्रायः म्याँमार में शरण लेते हैं।
- भारत और म्याँमार के बीच एक निर्बाध आवाजाही व्यवस्था (FMR) मौजूद है। “FMR के तहत पहाड़ी जनजातियों का प्रत्येक सदस्य, जो या तो भारत का नागरिक है या म्याँमार का नागरिक है और जो भारत-म्याँमार सीमा के दोनों ओर 16 किमी. के भीतर किसी भी क्षेत्र का निवासी है, सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी सीमा पास (एक वर्ष की वैधता) जारी किये जाने पर सीमा पार कर सकता है और प्रति यात्रा दो सप्ताह तक रह सकता है।
- मणिपुर सरकार ने कोविड-19 महामारी के बाद वर्ष 2020 से FMR को निलंबित कर दिया है।
