अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण एवं UNEP द्वारा गठित जलवायु और स्वच्छ वायु गठबंधन द्वारा संयुक्त रूप से जारी “जीवाश्म ईंधन के दहन से उत्सर्जित होने वाले मीथेन को कम करने की अनिवार्यता नामक एक नई रिपोर्ट में ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिये मीथेन उत्सर्जन में कमी लाने के महत्त्व पर बल दिया गया है।
रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु
मीथेन उत्सर्जन और ग्लोबल वार्मिंग
- ग्लोबल वार्मिंग को पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लिये मीथेन उत्सर्जन में कमी लाना आवश्यक है।
- मीथेन एक अत्यधिक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है, औद्योगिक क्रांति के बाद से वैश्विक स्तर पर कुल ग्लोबल वार्मिंग के लगभग 30% के लिये यह एकल रूप से ज़िम्मेदार है।
- ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिये मीथेन उत्सर्जन में कमी लाने वाले प्रयासों से वर्ष 2050 तक लगभग 0.1°C तापमान वृद्धि को ही नियंत्रित किया जा सकता है।
मीथेन उत्सर्जन का वर्तमान परिदृश्य
- विश्व स्तर पर प्रतिवर्ष लगभग 580 मिलियन टन मीथेन उत्सर्जित होता है।
- इस उत्सर्जन में मानवीय गतिविधियों का योगदान 60% है।
- वर्ष 2022 में केवल जीवाश्म ईंधनों के उपयोग से लगभग 120 मिलियन टन मीथेन उत्सर्जित हुआ।
- उत्सर्जन की वर्तमान गति एवं तीव्रता को देखते हुए वर्ष 2020 और 2030 के बीच मानवजनित मीथेन उत्सर्जन में 13% तक की वृद्धि हो सकती है।
लक्षित रूप से मीथेन उत्सर्जन में कमी लाने की आवश्यकता
- जीवाश्म ईंधन के उपयोग में भारी कटौती के बावजूद, मीथेन उत्सर्जन की समस्या का समाधान नहीं करने से वर्ष 2050 तक वैश्विक तापमान में 1.6 डिग्री सेल्सियस से अधिक की वृद्धि हो सकती है।
- डीकार्बोनाइज़ेशन प्रयासों के साथ ही हमें मीथेन उत्सर्जन में लक्षित रूप से कमी लाने का प्रयास करना चाहिये।
- मौजूदा प्रौद्योगिकियों के उपयोग से वर्ष 2030 तक जीवाश्म ईंधन जनित 80 मिलियन टन से अधिक वार्षिक मीथेन उत्सर्जन को नियंत्रित किया जा सकता है।
- अनुमान है कि इस तरह के समाधान लागत प्रभावी होंगे।
- नेट ज़ीरो परिदृश्य में तेल और गैस क्षेत्र में सभी मीथेन कटौती उपायों के लिये वर्ष 2030 तक लगभग 75 बिलियन अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता है।
- ऊर्जा क्षेत्र से मीथेन उत्सर्जन को कम करने के लिये नियमित वेंटिंग व फ्लेरिंग को खत्म करने और लीक की मरम्मत करने जैसी कार्रवाइयाँ आवश्यक हैं तथा इसके लिये संगठनों ने उचित नियामक ढाँचे का आह्वान किया है।
- अधिकांश उपायों को उद्योग द्वारा ही वित्त पोषित किया जाना चाहिये, लेकिन कई निम्न और मध्यम आय वाले देशों को कुछ हस्तक्षेपों के लिये पूंजी तक पहुँच बनाने में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है, जिन्हें रियायती वित्तपोषण के बिना लागू नहीं किया जा सकता है।
आर्थिक एवं स्वास्थ्य लाभ
- मीथेन ज़मीनी स्तर पर ओज़ोन प्रदूषण का प्राथमिक कारण है और इसके शमन प्रयासों से “वर्ष 2050 तक लगभग 10 लाख असामयिक मौतों को रोकने में मदद मिलेगी।
- मीथेन शमन लक्ष्यों को प्राप्त करने से गेहूँ, चावल, सोया और मक्का (मकई) की 95 मिलियन टन फसल के नुकसान को रोका जा सकेगा।
- ये बचत वर्ष 2021 में अफ्रीका में उत्पादित गेहूँ, चावल, सोया और मक्का की मात्रा के लगभग 60% के बराबर है।
- फसलों, श्रम एवं वानिकी के ऐसे नुकसान से बचने से “वर्ष 2020 और 2050 के दौरान कुल प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ 260 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक होगा”।
