Sat. Jun 13th, 2026

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने प्रमुख पर्यावरण निकायों के विलय द्वारा एकीकृत क्षेत्रीय कार्यालय की स्थापना के फैसले को वापस ले लिया है।

क्या था मंत्रालय का प्रस्ताव

  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) ने शुरू में विभिन्न पर्यावरण संगठनों के कार्यालयों को विलय करके एकीकृत क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित करने के लिए एक पुनर्गठन योजना का प्रस्ताव दिया था । इस प्रस्तावित विलय में शामिल संस्थाएँ भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI), राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB), और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) थीं।
  • इस पुनर्गठन के पीछे का उद्देश्य एक सुव्यवस्थित संरचना बनाना था और, जैसा कि उल्लेख किया गया है, “व्यापार करने में आसानी” को बढ़ावा देना था। हालाँकि, इस योजना को कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों की आलोचना का सामना करना पड़ा, जो चिंतित थे कि विलय से इन प्रमुख पर्यावरण संगठनों का अधिकार और प्रभावशीलता कमजोर हो जाएगी।

भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI)

  • यह एक सरकारी एजेंसी है जिसकी ज़िम्मेदारी वन सर्वेक्षण, मूल्यांकन और संबंधित अनुसंधान करना है।
  • FSI ने “वन संसाधनों का निवेश पूर्व सर्वेक्षण” (PISFR) का स्थान लिया है, जो FAO और UNDP की सहायता से वर्ष 1965 में भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक पहल थी।
  • भारत राज्य वन रिपोर्ट (ISFR) FSI का द्विवार्षिक प्रकाशन है।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण

  • यह टाइगर टास्क फोर्स की सिफारिश के बाद दिसंबर 2005 में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय है।
  • यह प्रोजेक्ट टाइगर और भारत के टाइगर रिज़र्व के प्रबंधन के लिये ज़िम्मेदार है।
  • केंद्रीय पर्यावरण मंत्री NTCA का अध्यक्ष है और राज्य पर्यावरण मंत्री इसका उपाध्यक्ष है।

वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (Wildlife Crime Control Bureau)

  • यह देश में संगठित वन्यजीव अपराध से निपटने हेतु स्थापित एक वैधानिक बहु-विषयक निकाय (WPA 1972) है।
  • ब्यूरो का मुख्यालय नई दिल्ली में है। यह राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव वाले वन्यजीव अपराधों, प्रासंगिक नीति और कानूनों से संबंधित मुद्दों पर भारत सरकार को सलाह देता है।
  • इसके अतिरिक्त यह EXIM नीति, CITES और वन्य जीवन संरक्षण अधिनियम (Wild Life Protection Act) द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार वनस्पतियों एवं जीवों की खेप के निरीक्षण के दौरान सीमा शुल्क अधिकारियों का समर्थन और परामर्श देता है।

केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण

  • यह भारत में चिड़ियाघरों के कामकाज़ के विनियमन तथा निगरानी करने और इसके द्वारा निर्धारित मानकों एवं मानदंडों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिये एक वैधानिक निकाय (WPA 1972) भी है।
  • मान्यता प्रदान करने के प्राथमिक कार्य के अलावा CZA चिड़ियाघरों के बीच वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम [Wildlife (Protection) Act], 1972 की अनुसूची- I और II के तहत सूचीबद्ध लुप्तप्राय श्रेणी के जानवरों के आदान-प्रदान को भी नियंत्रित करता है।
  • पर्यावरण मंत्री (Environment Minister) CZA का अध्यक्ष है।

Login

error: Content is protected !!