पारा पर मिनामाटा कन्वेंशन , जो अपनी छठी वर्षगांठ का प्रतीक है, एक महत्वपूर्ण वैश्विक समझौता है जिसका उद्देश्य लोगों और पर्यावरण को पारा के जोखिम के हानिकारक प्रभावों से बचाना है।
मिनामाता
- पारा पर मिनामाटा कन्वेंशन मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को पारा और उसके यौगिकों के प्रतिकूल प्रभावों से बचाने के लिए एक वैश्विक संधि है।
- 2013 में जिनेवा, स्विट्जरलैंड में अंतर सरकारी वार्ता समिति के पांचवें सत्र में इस पर सहमति व्यक्त की गई थी। यह 2017 में लागू हुआ।
- पूरे जीवनचक्र में पारे के मानवजनित उत्सर्जन को नियंत्रित करना कन्वेंशन के तहत प्रमुख दायित्वों में से एक है।
- कन्वेंशन पारे के अंतरिम भंडारण और उसके अपशिष्ट हो जाने पर उसके निपटान, पारे से दूषित स्थलों के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर भी चर्चा करता है।
- भारत ने कन्वेंशन का अनुमोदन कर दिया है।
पारा प्रदूषण
- पारा पृथ्वी की भू-पर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला एक तत्त्व है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले शीर्ष दस रसायनों समूहों में से एक माना है।
पारा के प्रमुख अनुप्रयोग
थर्मामीटर और बैरोमीटर
- पारे के तापीय विस्तार का उच्च गुणांक और देखने में सरलता इसे पारंपरिक थर्मामीटर तथा बैरोमीटर में उपयोग के लिये उपयुक्त बनाती है।
रासायनिक और खनन प्रक्रियाएँ
- पारे का उपयोग क्लोरीन के उत्पादन और सोने के खनन सहित विभिन्न रासायनिक व खनन प्रक्रियाओं में किया जाता है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल स्विच
- इसका उपयोग विभिन्न विद्युत अनुप्रयोगों में किया जाता है क्योंकि चालकता तथा कम प्रतिरोध के कारण पारा अच्छा विद्युत कनेक्शन प्रदान करने के लिये उपयुक्त है।
पारा प्रदूषण के स्रोत
प्राकृतिक स्रोत
- ज्वालामुखी विस्फोटों से कम मात्रा में पारा निकलता है।
- चट्टानों और मृदा अपरदन का कारण पारा जल निकायों में जा सकता है।
मानवजनित स्रोत
- कुटीर और लघु पैमाने पर सोने का खनन (ASGM): ASGM पारा प्रदूषण का एक प्रमुख स्रोत है, जहाँ पारा का उपयोग अयस्क से सोना निकालने के लिये किया जाता है।
- पारा का उपयोग अयस्कों से सोने के कणों को निकालने के लिये किया जाता है, जिससे कि मिश्रण (Amalgams) बनता है और इसे बाद में गर्म करके पारा को वाष्पित कर दिया जाता है, जिससे सोना बच जाता है।
- सोने के खनन कार्य में लगे कारीगर वैश्विक पारा प्रदूषण के 37% के लिये ज़िम्मेदार हैं।
औद्योगिक प्रक्रियाएँ
- विभिन्न उद्योग जैसे- क्लोरीन उत्पादन, सीमेंट निर्माण और अपशिष्ट भस्मीकरण, पारा उत्सर्जित करते हैं।
- सीमेंट उद्योग वैश्विक मानवजनित पारा उत्सर्जन के लगभग 11% के लिये ज़िम्मेदार है।
अपशिष्ट निपटान
- पारा युक्त ई-अपशिष्ट उत्पादों, जैसे कि फ्लोरोसेंट बल्ब और बैटरी आदि के अनुचित निपटान से पारा पर्यावरण में घुल जाता है।
संबद्ध प्रभाव
- मिथाइलमरकरी मछली जैसे जलीय जीवों में जमा हो जाता है। लोग मुख्य रूप से मछली (Fish) और शेलफिश (Shellfish) के सेवन से मिथाइलमरकरी के संपर्क में आते हैं।
- इस यौगिक से मिनामाता रोग (Minamata Disease) होने का खतरा अधिक होता है। यह मूल रूप से संवेदी प्रणाली को प्रभावित करता है तथा इससे श्रवण और दृश्य हानि हो सकती है।
- यह बीमारी सबसे पहले जापान के मिनामाता बे (Minamata Bay) के निवासियों में देखी गई थी, जो औद्योगिक अपशिष्ट प्रदूषण के कारण पारा-दूषित मछली का सेवन करते थे।
