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नाइजीरियाई सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल के वैज्ञानिकों ने रोगजनक निगरानी के लिये मेटाजीनोमिक्स अनुक्रमण का उपयोग करते हुए एक अध्ययन किया है।कोविड-19 महामारी के कारण हुई तबाही ने मेटाजीनोमिक्स जैसी नई तकनीकों का तेज़ी से विकास किया और उभरते रोगजनकों की पहचान, निगरानी और प्रतिक्रिया करने के तरीके में एक आदर्श परिवर्तन किया।

मेटाजीनोमिक्स

  • मेटाजीनोमिक्स प्राकृतिक वातावरण में रोगाणुओं का अध्ययन है, जिसमें जटिल सूक्ष्मजीव समुदाय शामिल होते हैं जिनमें वे आमतौर पर मौजूद होते हैं।
  • इस अध्ययन में जीव की पूरी जिनोमिक संरचना की जाँच की जाती है, जिसमें उसके अंदर मौजूद प्रत्येक रोगाणु भी शामिल है। यह संक्रामक एजेंट के पूर्व ज्ञान की आवश्यकता को दूर करते हुए रोगी के नमूनों की प्रत्यक्ष अनुक्रमण की सुविधा प्रदान करता है।
  • उदाहरण स्वरूप एक ग्राम मृदा में 4000 से 5000 विभिन्न प्रजातियों के सूक्ष्मजीव होते हैं, जबकि मानव आंँतों में 500 विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया होते हैं।
  • यह हमें किसी भी प्रणाली में रोगाणुओं की विविधता, प्रचुरता और अंतःक्रिया को समझने में सक्षम बनाता है।
  • यह पारंपरिक अनुक्रमण विधियों से भिन्न है, जिसमें उनके जिनोम को अनुक्रमित करने से पहले व्यक्तिगत प्रजातियों को सुसंस्कृत करने या अलग करने की आवश्यकता होती है।

जीनोम अनुक्रमण

  • जीनोम अनुक्रमण किसी जीव के जीनोम के संपूर्ण DNA अनुक्रम को निर्धारित करने की प्रक्रिया है।
  • DNA (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड) न्यूक्लियोटाइड्स के अनुक्रम से बना है, जो चार न्यूक्लियोटाइड आधारों के अनुरूप A, T, C और G अक्षरों द्वारा दर्शाए जाते हैं: एडेनिन, थाइमिन, साइटोसिन और गुआनिन।
  • जीनोम अनुक्रमण में DNA स्ट्रैंड के साथ इन न्यूक्लियोटाइड के क्रम की पहचान करना सम्मिलित है।
  • जीनोम किसी जीव की कोशिकाओं के भीतर आनुवंशिक सामग्री का संपूर्ण समूह है और इसमें उस जीव की वृद्धि, विकास, कार्यप्रणाली तथा प्रजनन के लिये आवश्यक सभी जानकारी शामिल होती है।
  • जीनोमिक निगरानी (Genomic Surveillance) और कोविड-19 महामारी: कोविड-19 महामारी की वैश्विक प्रतिक्रिया ने वैज्ञानिकों को निगरानी उद्देश्यों के लिये जीनोम अनुक्रमण प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाने हेतु प्रेरित किया।
  • GISAID जैसे प्लेटफॉर्मों की स्थापना ने SARS-CoV-2 जीनोम डेटा प्रस्तुत करने तथा साझा करने की सुविधा प्रदान की, जिससे हाई-थ्रूपुट जीनोम (High-Throughput Genome) निगरानी गतिविधियों में सहायता मिली।
  • हाई-थ्रूपुट’ अनुक्रमण तकनीकों को संदर्भित करता है जो एक ही समय में पूरे जीनोम सहित बड़ी मात्रा में DNA को पार्स/पदव्याख्या (Parse) कर सकता है।
  • क्षमता: जीनोम अनुक्रमण की क्षमता ज़िका (Zika) और डेंगू (Dengue) जैसे मौसमी वायरस के साथ-साथ मवेशियों में गाँठदार त्वचा रोग (Lumpy Skin Disease) और दवा प्रतिरोधी तपेदिक (Tuberculosis) जैसी बीमारियों तक फैली हुई है।

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