Sat. Jun 13th, 2026

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के विश्व संरक्षण निगरानी केंद्र (यूएनईपी-डब्ल्यूसीएमसी) और आईयूसीएन ने संरक्षित ग्रह रिपोर्ट 2024 जारी की है। यह रिपोर्ट कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क (GBF) के लक्ष्य 3 के तहत संरक्षित और संरक्षित क्षेत्रों (PCA) की स्थिति का आकलन करने के उद्देश्य से पहली बार प्रस्तुत की गई है।

कुनमिंग-मॉन्ट्रियल GBF का लक्ष्य 3

  • KM-GBF को जैवविविधता पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (CBD) की कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़ (COP 15) में अपनाया गया था।
  • यह रूपरेखा वर्ष 2050 तक प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने वाले विश्व हेतु वैश्विक दृष्टिकोण तक पहुँचने के क्रम में एक महत्त्वाकांक्षी मार्ग निर्धारित करने पर केंद्रित है, जिसमें वर्ष 2050 के लिये 4 लक्ष्य और वर्ष 2030 के लिये 23 लक्ष्य निर्धारित किये गए हैं।
  • लक्ष्य 3:  इसके तहत यह सुनिश्चित करना है कि वर्ष 2030 तक कम से कम 30% स्थलीय, अंतर्देशीय जल, तटीय और समुद्री क्षेत्र (विशेष रूप से जैवविविधता के लिये महत्त्वपूर्ण) प्रभावी रूप से संरक्षित एवं प्रबंधित किये जाएँ।
  • इसमें स्वदेशी और पारंपरिक क्षेत्रों को मान्यता देना और इन क्षेत्रों को व्यापक परिदृश्यों एवं समुद्री परिदृश्यों में एकीकृत करना शामिल है साथ ही यह सुनिश्चित करना भी है कि स्थानीय लोगों एवं समुदायों के अधिकारों का सम्मान हो।

प्रमुख शब्दावली

  • संरक्षित क्षेत्र: यह CBD द्वारा भौगोलिक रूप से परिभाषित क्षेत्र है जिसे विशिष्ट संरक्षण उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिये नामित या विनियमित एवं प्रबंधित किया जाता है”।
  • IUCN, UNEP–WCMC के साथ मिलकर संरक्षित क्षेत्रों का वैश्विक डेटाबेस बनाए रखता है।
  • स्थानीय और पारंपरिक क्षेत्र: CBD के अनुसार ये अद्वितीय जैवविविधता वाले क्षेत्र हैं जिनका स्वामित्व/प्रबंधन स्थानीय लोगों एवं समुदायों के पास होता है।

प्रोटेक्टेड प्लेनेट रिपोर्ट 2024 की मुख्य विशेषताएँ

  • वैश्विक कवरेज में प्रगति: 17.6% भूमि और अंतर्देशीय जल तथा 8.4% महासागर एवं तटीय क्षेत्र संरक्षण के अंतर्गत शामिल हैं। हालाँकि इसमें प्रगति हुई है लेकिन वर्ष 2020 के बाद से वृद्धि न्यूनतम (दोनों क्षेत्रों में 0.5% से कम) बनी हुई है।
  • वर्ष 2030 तक 30% लक्ष्य को पूरा करने के लिये अतिरिक्त संरक्षण की आवश्यकता है: 12.4% अधिक भूमि को संरक्षित करने की आवश्यकता है तथा 21.6% अधिक महासागर को सुरक्षित करने की आवश्यकता है।
  • महासागर संरक्षण में प्रगति: वर्ष 2020 के बाद से संरक्षण में सबसे अधिक प्रगति महासागर में हुई है लेकिन इसका अधिकांश हिस्सा राष्ट्रीय जल क्षेत्र के तहत शामिल है।
  • राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर के क्षेत्रों में कवरेज काफी कम है (समुद्री और तटीय संरक्षित क्षेत्रों द्वारा कवर किये गए कुल क्षेत्रफल का <11%)।
  • प्रभावशीलता और प्रशासन से संबंधित चुनौतियाँ: प्रबंधन प्रभावशीलता के तहत 5% से कम भूमि एवं 1.3% समुद्री क्षेत्रों का मूल्यांकन किया गया है। संरक्षित भूमि का केवल 8.5% भाग ही इसमें बेहतर रूप से शामिल है।
  • इसका प्रशासन एक चुनौती बना हुआ है, केवल 0.2% भूमि एवं 0.01% समुद्री क्षेत्रों का ही न्यायसंगत प्रबंधन के लिये मूल्यांकन किया गया है।
  • जैवविविधता का अपर्याप्त प्रतिनिधित्व: जैवविविधता के लिये महत्त्वपूर्ण माने जाने वाले क्षेत्रों में से केवल पाँचवाँ हिस्सा ही पूरी तरह संरक्षित है। जैवविविधता का संरक्षण असमान रूप से हुआ है।
  • यद्यपि दो तिहाई से अधिक प्रमुख जैवविविधता क्षेत्र (KBAs) आंशिक रूप से या पूर्ण रूप से संरक्षित एवं परिरक्षित क्षेत्रों द्वारा आच्छादित हैं, शेष एक तिहाई (32%) KBAs पूरी तरह से इन क्षेत्रों से बाहर हैं तथा औपचारिक संरक्षण से वंचित हैं।
  • स्थानीय लोगों की भूमिका: स्थानीय समुदाय द्वारा 4% से भी कम संरक्षित क्षेत्र प्रशासित हैं, जबकि वैश्विक स्थलीय क्षेत्रों का 13.6% हिस्सा औपचारिक संरक्षण के बाहर है।
  • इन क्षेत्रों के लिये शासन संबंधी आंकड़ों का अभाव है तथा इनके योगदान को प्रायः पूरी तरह मान्यता नहीं दी जाती है।

मुख्य सिफारिशें

  • विभिन्न चुनौतियों के बावजूद इसमें आशा बनी हुई है क्योंकि 51 देश पहले ही भूमि के 30% लक्ष्य को पूरा कर चुके हैं तथा 31 देश समुद्र के संदर्भ में ऐसा कर चुके हैं।
  • रिपोर्ट में इस बात पर बल दिया गया है कि अब जब 6 वर्ष शेष हैं तो त्वरित प्रयासों, वैश्विक सहयोग एवं स्थानीय लोगों के समर्थन से 30% का लक्ष्य अभी भी प्राप्त किया जा सकता है।
  • इसमें डेटा की अपर्याप्त उपलब्धता एक दीर्घकालिक मुद्दा है (विशेषकर संरक्षित क्षेत्रों के सकारात्मक जैवविविधता परिणामों, स्थानीय लोगों के लिये न्यायसंगत शासन एवं महिलाओं, स्थानीय लोगों एवं समुदायों के अधिकारों को बनाए रखने के संबंध में)।
  • स्थानीय लोगों को अपनी भूमि के संरक्षक के रूप में कार्य करने के लिये समर्थन दिया जाना चाहिये तथा उनकी मांग पर ध्यान देना चाहिये।
  • इन प्रयासों का बल न केवल संरक्षित क्षेत्र का कवरेज बढ़ाने पर होना चाहिये, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना चाहिये कि ये क्षेत्र अच्छी तरह से संबंधित हों एवं रणनीतिक रूप से जैवविविधता हॉटस्पॉट में स्थित हों।

प्रमुख संस्थान

  • अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN): इसकी स्थापना वर्ष 1948 में हुई थी और यह एक वैश्विक सदस्यता संगठन है जिसमें सरकारी तथा नागरिक समाज संगठन शामिल हैं। यह प्राकृतिक विश्व की स्थिति और इसे बचाने के लिये आवश्यक उपायों पर आधिकारिक निकाय के रूप में कार्य करता है।
  • भारत वर्ष 1969 में IUCN का एक राज्य सदस्य बना, यह वैश्विक स्तर पर प्रकृति संरक्षण के प्रयासों के लिये अमूल्य वैज्ञानिक ज्ञान, नीति मार्गदर्शन एवं समर्थन प्रदान करता है।
  • UNEP-WCMC: प्रकृति के सामने आने वाली समस्या को हल करने और एक सतत् भविष्य को आगे बढ़ाने के लिये, यह जैव विविधता में एक वैश्विक अग्रणी है, जो विज्ञान, नीति और व्यवहार को एकीकृत करता है। यह यूके चैरिटी WCMC और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के बीच साझेदारी के रूप में कार्य करता है।
  • संरक्षित क्षेत्रों पर IUCN विश्व आयोग (WCPA): यह एक वैश्विक नेटवर्क है जो वैज्ञानिक, तकनीकी और नीतिगत सलाह प्रदान करता है, तथा जैवविविधता को लाभ पहुँचाने वाले प्रभावी क्षेत्र-आधारित संरक्षण उपायों का समर्थन करता है।

Login

error: Content is protected !!