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भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) से 102 टन स्वर्ण का प्रत्यावर्तन (वापस लाना) किया।RBI की “विदेशी मुद्रा भंडार प्रबंधन पर अर्धवार्षिक रिपोर्ट” के अनुसार, सितंबर 2024 में घरेलू स्तर पर रखे गए स्वर्ण की मात्रा 510.46 मीट्रिक टन है।भारतीय रिज़र्व बैंक के पास भारत की कुल आरक्षित स्वर्ण निधि 854.73 मीट्रिक टन है।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (जून 2024) के अनुसार भारत सॉवरेन गोल्ड होल्डिंग्स के मामले में 8वें स्थान पर है, जबकि अमेरिका इस सूची में शीर्ष पर है।भारत की गोल्ड होल्डिंग्स 840.76 मीट्रिक टन है, जो इसके विदेशी मुद्रा भंडार का 9.57% है।गोल्ड होल्डिंग्स के मामले में भारत से आगे अन्य देश जर्मनी, इटली, फ्राँस, रूस, चीन और जापान हैं।

भारत स्वर्ण का प्रत्यावर्तन क्यों कर रहा है

  • भू-राजनीतिक जोखिम को कम करना: भारत अपने आरक्षित स्वर्ण निधि को घरेलू स्तर पर बनाए रखना चाहता है, ताकि उसे संभावित विदेशी प्रतिबंधों से बचाया जा सके, जो विदेशों में रखी परिसंपत्तियों तक पहुँच को प्रतिबंधित कर सकते हैं।
  • यूक्रेन संघर्ष के दौरान अमेरिका और सहयोगियों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण रूस की 300 बिलियन अमेरिकी डॉलर के स्वर्ण तथा विदेशी मुद्रा भंडार तक पहुँच अवरुद्ध हो गई है।
  • बाज़ार में विश्वास में वृद्धि: स्वर्ण को विशेष रूप से उभरते बाज़ारों में एक “सुरक्षित आश्रय” परिसंपत्ति के रूप में देखा जाता है और इसे राष्ट्रीय सीमाओं के भीतर रखने से वित्तीय प्रणाली में जनता का विश्वास बढ़ जाता है।
  • आर्थिक संप्रभुता: भारत की आरक्षित स्वर्ण निधि अब भारत के विदेशी ऋण के 101% से अधिक है, जो भारत की ऋण चुकौती क्षमता में वृद्धि करती है।
  • घरेलू वित्तीय बाज़ारों को समर्थन: भारत में स्वर्ण की भौतिक उपस्थिति के कारण RBI के पास घरेलू बाज़ारों में स्वर्ण-समर्थित वित्तीय उत्पादों को समर्थन देने के लिये अधिक लचीलापन है।
  • भारत सरकार ने भौतिक स्वर्ण के आयात पर निर्भरता कम करने के लिये सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) जैसी पहल को बढ़ावा दिया है।
  • स्वर्ण प्रत्यावर्तन की वैश्विक प्रवृत्ति: पिछले दशक में केंद्रीय बैंकों द्वारा स्वर्ण प्रत्यावर्तन की व्यापक प्रवृत्ति देखी गई है।
  • उदाहरण के लिये वेनेज़ुएला ने वर्ष 2011 में अमेरिका और यूरोपीय भंडारों से तथा ऑस्ट्रिया ने वर्ष 2015 में स्वर्ण का प्रत्यावर्तन किया।
  • लागत बचत: RBI सामान्यतः बैंक ऑफ इंग्लैंड या फेडरल रिज़र्व जैसी संस्थाओं को उनके स्वर्ण को रखने के लिये बीमा, परिवहन शुल्क, संरक्षक शुल्क और वॉल्ट शुल्क का भुगतान करता है।
  • इस स्वर्ण में से कुछ का प्रत्यावर्तन करके RBI इन आवर्ती लागतों को कम कर सकता है।
  • आयात कवर में वृद्धि: आयात कवर एक महत्त्वपूर्ण व्यापार संकेतक है, जो विदेशी मुद्रा भंडार की पर्याप्तता को दर्शाता है और विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि के साथ-साथ मज़बूत हुआ है।
  • वर्तमान विदेशी भंडार 11.8 महीने के आयात को कवर करने के लिये पर्याप्त है।

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार

  • विदेशी मुद्रा भंडार एक केंद्रीय बैंक द्वारा विदेशी मुद्राओं में आरक्षित रखी गई परिसंपत्तियाँ हैं, जिनमें बॉण्ड, ट्रेजरी बिल और अन्य सरकारी प्रतिभूतियाँ शामिल हो सकती हैं।
  • भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ, आरक्षित स्वर्ण निधि, विशेष आहरण अधिकार और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ रिज़र्व ट्रैन्च स्थिति शामिल हैं।
  • अक्तूबर, 2024 में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति 688.27 बिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान लगाया गया है।

इसमें शामिल है:

  • 598.24 बिलियन अमरीकी डॉलर की विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ (FCA)
  • 67.44 बिलियन अमरीकी डॉलर का स्वर्ण
  • 18.27 बिलियन अमरीकी डॉलर के विशेष आहरण अधिकार (SDR)
  • 4.32 बिलियन अमरीकी डॉलर की रिज़र्व ट्रेंच स्थिति (RTP)।

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