ब्रह्मांड की अलौकिक दुनिया के कई रहस्यों से हबल स्पेस टेलीस्कोप ने पर्दा उठाया है। हाल ही में हबल टेलीस्कोप ने एक ऐसी स्पाइरल गैलेक्सी को कैप्चर किया है, जो अंतरिक्ष में पेंडुलम की तरफ आगे-पीछे झूल रही है। इस गैलेक्सी में एक चमकीली केंद्रीय पट्टी और दो स्पाइरल आर्म्स यानी दो सर्पिल भुजाएं हैं।
सर्पिल आकाशगंगाएँ
- सर्पिल आकाशगंगाएँ तारे और गैस के घुमावदार संग्रह होती हैं, जिनका आकार अक्सर बेहद आकर्षक होता है। ये युवा और गर्म तारों से भरी होती हैं।
विशेषताएँ
- सर्पिल संरचना: सर्पिल आकाशगंगाओं में तारे, गैस, और धूल सर्पिल भुजाओं में व्यवस्थित होते हैं, जो आकाशगंगा के केंद्र से बाहर की ओर फैली होती हैं।
- प्रमुखता: अब तक खोजी गई अधिकांश आकाशगंगाएं सर्पिल हैं, जिनमें लगभग 60% आकाशगंगाएं इस श्रेणी में आती हैं।
- उदाहरण: हमारी मिल्की वे आकाशगंगा एक प्रमुख सर्पिल आकाशगंगा का उदाहरण है।
संरचना: सर्पिल आकाशगंगाओं की संरचना में निम्नलिखित प्रमुख तत्व शामिल होते हैं
- केंद्र का उभार: अधिकांश सर्पिल आकाशगंगाओं में एक केंद्रीय उभार होता है, जो पुराने और मंद तारों से बना होता है। यह उभार एक अतिविशाल ब्लैक होल के आस-पास स्थित होता है।
- सर्पिल भुजाएँ: तारों की डिस्क चारों ओर घूमती हैं और आकाशगंगा की भुजाओं में विभाजित होती हैं, जिनमें गैस और धूल का भंडार होता है।
- युवा तारे: सर्पिल भुजाओं में युवा तारे होते हैं, जो जल्दी जलते हैं और उनकी चमक में कमी आती है।
गतिशीलता और द्रव्यमान
- घूर्णन: अधिकांश सर्पिल आकाशगंगाएँ घूर्णन की दिशा में अपनी भुजाओं को मोड़ती हैं।
- प्रभामंडल: सर्पिल आकाशगंगाओं का दृश्य भाग उनके कुल द्रव्यमान का केवल एक छोटा हिस्सा होता है। ये एक व्यापक प्रभामंडल से घिरी होती हैं, जिसमें अधिकांशतः अंधकारमय पदार्थ होता है।
हबल अंतरिक्ष दूरदर्शी
- हबल अंतरिक्ष दूरदर्शी, जिसे संक्षेप में HST कहा जाता है, एक खगोलीय दूरदर्शी है जो पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया गया है।
- इसे 25 अप्रैल 1990 को अमेरिकी अंतरिक्ष यान डिस्कवरी के माध्यम से लॉन्च किया गया था।
- हबल को नासा ने यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के सहयोग से विकसित किया है और इसका नाम प्रसिद्ध अमेरिकी खगोलज्ञ एडविन पोंवेल हबल के नाम पर रखा गया है।
इतिहास
- लॉन्च की योजना: हबल को पहले 1983 में लॉन्च करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन तकनीकी खामियों और बजट संबंधी समस्याओं के कारण इसमें सात साल की देरी हुई।
- पहली कमी: 1990 में लॉन्च होने के बाद, वैज्ञानिकों ने पाया कि इसके मुख्य दर्पण में कुछ खामियां थीं, जिससे यह अपनी पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पा रहा था।
- सर्विसिंग मिशन: 1993 में, हबल के पहले सर्विसिंग मिशन के दौरान, वैज्ञानिकों ने इन खामियों को ठीक किया। यह हबल की डिजाइन का एक अनोखा पहलू है, जो इसे अंतरिक्ष में सर्विसिंग के लिए तैयार किया गया है।
विशेषताएँ
- प्रमुख वेधशाला: हबल नासा की प्रमुख खगोल वेधशालाओं में से एक है, जिसने ब्रह्मांड के कई रहस्यों को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- सर्विसिंग मिशन: 2009 में इसका अंतिम सर्विसिंग मिशन पूरा हुआ, जिसके बाद इसे 2014 तक सक्रिय रहने की उम्मीद थी।
- भविष्य की योजनाएँ: हबल की कार्यशीलता के बाद, नासा ने जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप को लॉन्च करने की योजना बनाई है, जो हबल के अनुसंधान का विस्तार करेगा और नई खोजों के अवसर प्रदान करेगा।
SOURCE :Times Now Navbharat
