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इकोमार्क लेबलिंग प्रणाली खाद्य, सौंदर्य प्रसाधन, साबुन और इलेक्ट्रॉनिक्स आदि श्रेणियों में पर्यावरण अनुकूल उत्पादों को बढ़ावा देगी ।यह LIFE (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) के सिद्धांत के अनुरूप है , जो स्थिरता और संसाधन दक्षता पर ध्यान केंद्रित करता है।

इकोमार्क नियम के मुख्य बिंदु

LIFE सिद्धांत

  • इकोमार्क लेबलिंग प्रणाली का उद्देश्य LIFE (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) के सिद्धांत के अनुरूप स्थिरता और संसाधन दक्षता को बढ़ावा देना है।

अनुदान मानदंड

  • उत्पाद को भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम और/या गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों के तहत भारतीय मानकों के अनुरूप लाइसेंस या प्रमाण पत्र प्राप्त होना चाहिए।
  • उत्पादों को उन नियमों में निर्धारित मानदंडों को पूरा करना होगा, जो संसाधन उपभोग और पर्यावरणीय प्रभावों के संबंध में निर्दिष्ट हैं।

आवेदन प्रक्रिया

  • निर्माताओं को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के माध्यम से इकोमार्क के लिए आवेदन करना होगा।
  • मान्यता की अवधि: इकोमार्क चिह्न तीन वर्ष के लिए वैध रहेगा।
  • निरीक्षण एवं कार्यान्वयन: इसकी निगरानी और कार्यान्वयन पर्यावरण सचिव की अध्यक्षता वाली संचालन समिति द्वारा किया जाएगा।

महत्व

  • उपभोक्ता जागरूकता: यह उपभोक्ताओं को सूचित खरीद निर्णय लेने में सक्षम बनाता है, जिससे वे पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों का चयन कर सकें।
  • उत्पादक प्रोत्साहन: यह निर्माताओं को पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है।
  • भ्रामक जानकारी की रोकथाम: यह उत्पादों के पर्यावरणीय पहलुओं पर भ्रामक जानकारी को रोकने में मदद करेगा, जिससे कम ऊर्जा खपत, संसाधन दक्षता और संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

भारतीय वन एवं काष्ठ प्रमाणन योजना

  • यह योजना टिकाऊ वन प्रबंधन और कृषि वानिकी को बढ़ावा देने के लिए स्वैच्छिक तृतीय-पक्ष प्रमाणन प्रदान करती है।

इसमें विभिन्न प्रमाणन शामिल हैं

  • वन प्रबंधन प्रमाणन
  • वृक्ष प्रमाणन (वन प्रबंधन के बाहर)
  • कस्टडी प्रमाणन

यह विभिन्न संस्थाओं को बाजार प्रोत्साहन प्रदान करता है जो जिम्मेदार वन प्रबंधन और कृषि वानिकी प्रथाओं का पालन करते हैं।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) भारत में पर्यावरण और वानिकी नीतियों के विकास और कार्यान्वयन के लिए एक प्रमुख नोडल एजेंसी है। यह मंत्रालय न केवल पर्यावरण संरक्षण और वनों के विकास की दिशा में कार्य करता है, बल्कि विभिन्न अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण कार्यक्रमों के अनुवर्ती कार्यों के लिए भी जिम्मेदार है।

कार्य

  • संयुक्त राष्ट्र कार्यक्रमों का समन्वय: यह संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी), दक्षिण एशिया सहकारी पर्यावरण कार्यक्रम (एसएसीईपी), अंतर्राष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीय विकास केंद्र (आईसीआईएमओडी) और पर्यावरण एवं विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यूएनसीईडी) के अनुवर्ती कार्यों के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है।
  • बहुपक्षीय और क्षेत्रीय निकायों के साथ समन्वय: मंत्रालय को स्थायी विकास आयोग (सीएसडी), वैश्विक पर्यावरण सुविधा (जीईएफ), आर्थिक और सामाजिक परिषद (ईएससीएपी), और दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) जैसे क्षेत्रीय निकायों से संबंधित मुद्दों का दायित्व सौंपा गया है।

उद्देश्य

  • वन और वन्य जीवन का संरक्षण और सर्वेक्षण करना।
  • प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण के उपायों को लागू करना।
  • क्षीण क्षेत्रों का पुनर्जनन करना और वनरोपण को बढ़ावा देना।
  • पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करना।
  • पशुओं के कल्याण को सुनिश्चित करना।
  • विधायी और विनियामक उपाय

इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए मंत्रालय ने कई विधायी और विनियामक उपायों को लागू किया है, जिनमें शामिल हैं

  • पर्यावरण और विकास पर राष्ट्रीय संरक्षण रणनीति और नीति वक्तव्य, 1992
  • राष्ट्रीय वन नीति, 1988
  • प्रदूषण निवारण पर नीति वक्तव्य, 1992
  • राष्ट्रीय पर्यावरण नीति, 2006

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