RBI गवर्नर की अध्यक्षता में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की 51वीं बैठक संपन्न हुई।
मौद्रिक नीति समिति (MPC) की 51वीं बैठक में लिये गए प्रमुख निर्णय
- रेपो रेट का अपरिवर्तित रहना: मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने लगातार 10 वीं बार रेपो रेट को 6.5% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया।
- मौद्रिक नीति दृष्टिकोण में परिवर्तन: MPC ने नीतिगत रुख को ‘विदड्राल ऑफ एकोमोडेशन’ से बदलकर ‘न्यूट्रल’ कर दिया। न्यूट्रल दृष्टिकोण से MPC को आवश्यकतानुसार मौद्रिक नीति को समायोजित करने के लिये अधिक लचीलापन मिलता है जबकि “विदड्राल ऑफ एकोमोडेशन” का अर्थ प्रतिबंधात्मक मौद्रिक नीति से है, जिसमें RBI का लक्ष्य अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति को कम करना (मुद्रास्फीति दबावों पर अंकुश लगाना) होता है।जब RBI द्वारा रियायतें वापस ली जाती हैं तो यह संकेत मिलता है कि वह कम ब्याज दरों के माध्यम से आर्थिक विकास को समर्थन देने के लिये कम इच्छुक है तथा इसके बजाय वह कीमतों को स्थिर करने पर केंद्रित है।
- मुद्रास्फीति लक्ष्य: RBI ने वित्त वर्ष 2025 के लिये उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति पूर्वानुमान को 4.5% पर बनाए रखा है।आर्थिक विकास को समर्थन देने के लिये अस्थायी विचलन की अनुमति देते हुए 4% (±2%) के लक्ष्य के साथ मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिये वर्ष 2015 में लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्य (FIT) रखा गया था।
- वास्तविक GDP संवृद्धि अनुमान: RBI ने वित्त वर्ष 2025 के लिये वास्तविक GDP संवृद्धि अनुमान को 7.2% पर बनाए रखा है। निजी उपभोग और निवेश मांग से प्रेरित भारत की स्थिति मज़बूत बनी हुई है।
- UPI123PAY की लेन-देन सीमा में वृद्धि: RBI ने UPI123PAY की प्रति लेन-देन सीमा 5,000 रुपए से बढ़ाकर 10,000 रुपए कर दी है।RBI ने UPI लाइट की प्रति लेन-देन सीमा को 500 रुपए से बढ़ाकर 1,000 रुपए करने की घोषणा की है। RBI ने UPI लाइट वॉलेट की सीमा भी वर्तमान 2,000 रुपए से बढ़ाकर 5,000 रुपए कर दी है।UPI123PAY मुख्य रूप से गैर-स्मार्ट फोन/फीचर फोन उपयोगकर्त्ताओं के लिये उपलब्ध भुगतान प्रणाली है जिसके द्वारा ये इंटरनेट कनेक्टिविटी के बिना UPI का उपयोग करके भुगतान कर सकते हैं।
- रिज़र्व बैंक-क्लाइमेट रिस्क इनफाॅर्मेशन सिस्टम (RB-CRIS): RBI ने क्लाइमेट संबंधी आँकड़ों के बीच अंतर को समाप्त करने के लिये RB-CRIS नामक एक डेटा भंडार के निर्माण का प्रस्ताव दिया है, जो वर्तमान में खंडित रूप में उपलब्ध है। इससे वित्तीय संस्थाओं और वित्तीय प्रणाली की बैलेंस शीट की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिये क्लाइमेट रिस्क का आकलन हो सकेगा। यह दो भागों में होगा।पहला भाग एक वेब-आधारित निर्देशिका होगी, जिसमें RBI की वेबसाइट पर विभिन्न सार्वजनिक रूप से सुलभ क्लाइमेट संबंधी और भू-स्थानिक डेटा स्रोतों की सूची होगी।दूसरा भाग मानकीकृत डेटासेट वाला एक डेटा पोर्टल होगा, जो चरणबद्ध तरीके से केवल विनियमित संस्थाओं के लिये सुलभ होगा।
- NBFC को निर्देश: RBI ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC), माइक्रोफाइनेंस संस्थानों (MFI) और आवास वित्त कंपनियों (HFC) को ‘पूर्वानुपालन’ संस्कृति का पालन करने और ग्राहक संबंधी शिकायतों के प्रति ईमानदार दृष्टिकोण अपनाने के लिये सख्त दिशानिर्देश (Strong Advisory) जारी किये।पूर्वानुपालन संस्कृति के तहत अन्य व्यावसायिक विचारों से परे कानूनों, विनियमों और आंतरिक नीतियों के अनुपालन को प्राथमिकता दी जाती है।
मौद्रिक नीति समिति की 51 वीं बैठक में NBFC पर RBI का रुख
- किसी भी कीमत पर विकास का दृष्टिकोण (Growth at Any Cost Approach): RBI गवर्नर ने कुछ NBFC के बीच प्रचलित ” किसी भी कीमत पर विकास” की मानसिकता के संदर्भ में चिंता व्यक्त की, जो सतत् व्यावसायिक प्रथाओं और मज़बूत जोखिम प्रबंधन ढाँचे की अनदेखी करते हैं।
- पारिश्रमिक प्रथाओं की समीक्षा: RBI ने NBFC को निर्देश दिया है, कि वे अपने कर्मचारी पारिश्रमिक की संरचना का, विशेष रूप से अल्पकालिक प्रदर्शन लक्ष्यों से संबंधित बोनस और प्रोत्साहनों के संबंध में, पुनर्मूल्यांकन करें।
- RBI को चिंता है कि इस प्रकार की प्रथाओं से जोखिमपूर्ण या असंवहनीय व्यवहार को बढ़ावा मिल सकता है, जो केवल तात्कालिक परिणामों पर केंद्रित है।
- सूदखोरी प्रथाएँ: NBFC द्वारा उच्च ब्याज दर वसूलने तथा अनुचित रूप से उच्च प्रसंस्करण शुल्क और ज़ुर्माना लगाने के बारे में चिंताएँ व्यक्त की गईं हैं।
- विकास लक्ष्यों का प्रभाव: RBI गवर्नर ने इस बात पर प्रकाश डाला कि आक्रामक विकास लक्ष्यों के कारण खुदरा ऋण वृद्धि हो सकती है, जो वास्तविक मांग के अनुरूप नहीं होगी।
- इससे संभावित रूप से उच्च ऋण के बढ़ने की संभावना है, जिससे वित्तीय स्थिरता को संकट हो सकता है।
- निवेशकों का दबाव: MFI और HFC समेत कुछ NBFC, इक्विटी पर अत्यधिक रिटर्न (ROE) प्राप्त करने के लिये निवेशकों के दबाव से प्रेरित हैं।
- RBI ने NBFC से सतत् कारोबारी लक्ष्य अपनाने का आग्रह किया और कहा कि वे अल्पकालिक लाभ के लिये दीर्घकालिक स्थिरता से समझौता न करें।
