भारत के प्रधानमंत्री ने लाओ पीडीआर के वियनतियाने में 19वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (EAS) में भाग लिया।प्रधानमंत्री ने विस्तारवाद की जगह विकासोन्मुख हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण की वकालत की।नालंदा विश्वविद्यालय के प्रति समर्थन दोहराया गया तथा EAS सदस्यों को उच्च शिक्षा प्रमुखों के सम्मेलन में आमंत्रित किया गया।इसमें आतंकवाद, साइबर और समुद्री खतरों जैसी वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा की गई तथा संवाद आधारित संघर्ष समाधान पर बल दिया गया।प्रधानमंत्री ने मलेशिया को आसियान के नए अध्यक्ष के रूप में अध्यक्षता करने की शुभकामनाएँ दीं और इसके लिये भारत का पूरा समर्थन व्यक्त किया। आसियान का वर्तमान अध्यक्ष लाओ पीडीआर है।
पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन
- स्थापना: EAS की स्थापना वर्ष 2005 में दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन (ASEAN) के नेतृत्व वाली पहल के रूप में की गई थी।
- इसका पहला शिखर सम्मेलन 14 दिसंबर 2005 को मलेशिया के कुआलालंपुर में आयोजित किया गया था।
- EAS हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एकमात्र नेतृत्वकारी मंच है जो सामरिक महत्त्व के राजनीतिक, सुरक्षात्मक एवं आर्थिक मुद्दों पर चर्चा करने के लिये सभी प्रमुख साझेदारों को एक साथ लाता है।
- पूर्वी एशिया समूह का विचार पहली बार वर्ष 1991 में मलेशिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री महाथिर मोहम्मद द्वारा प्रस्तावित किया गया था।
- उद्देश्य: EAS खुलेपन, समावेशिता, अंतर्राष्ट्रीय कानून के प्रति सम्मान, आसियान की केंद्रीयता तथा प्रेरक शक्ति के रूप में आसियान की भूमिका के सिद्धांतों पर आधारित है।
- सदस्य: EAS हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक वार्ता के लिये एक प्रमुख मंच है जिसमें आसियान सदस्यों सहित 18 देश शामिल हैं।
- EAS में 18 सदस्य अर्थात 10 आसियान देश (ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम) तथा आठ संवाद साझेदार (ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, न्यूजीलैंड, कोरिया गणराज्य, रूस एवं संयुक्त राज्य अमेरिका) शामिल हैं।
महत्त्व
- आर्थिक रूप से: वर्ष 2023 में EAS सदस्य विश्व की लगभग 53% आबादी का प्रतिनिधित्व करेंगे और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 60% का योगदान देंगे।भारत आसियान का सातवाँ सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जबकि आसियान भारत का चौथा सबसे बड़ा साझेदार है। विगत दस वर्षों में भारत-आसियान व्यापार दोगुना होकर 130 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया है।
- रणनीतिक रूप से: दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में बुनियादी ढाँचे और डिजिटल दोनों प्रकार की कनेक्टिविटी परियोजनाएँ भारत की एक्ट ईस्ट नीति के लिये महत्त्वपूर्ण हैं, जिसमें भारत-म्याँमार-थाईलैंड राजमार्ग और कलादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट जैसी प्रमुख पहल पूर्वी एशियाई देशों के साथ क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा दे रही हैं।इसके अतिरिक्त भारत कंबोडिया, लाओस और वियतनाम जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (ITEC) कार्यक्रम के माध्यम से क्षमता निर्माण में भी संलग्न है।
- सांस्कृतिक दृष्टि से: बौद्ध धर्म एक प्रमुख सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा है, जो विभिन्न दक्षिण-पूर्व एशियाई और पूर्वी एशियाई देशों को जोड़ती है, इसकी उत्पत्ति भारत में हुई।नालंदा विश्वविद्यालय का पुनरुद्धार और अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ को समर्थन, म्याँमार, थाईलैंड और कंबोडिया के साथ भारत के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ाएगा तथा बौद्ध परंपराओं को बढ़ावा देने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित करेगा।
