Tue. Jun 23rd, 2026

भारत सरकार ने 30 अगस्त 2024 को पाकिस्तान सरकार को एक नोटिस भेजा है, जिसमें “मौलिक और अप्रत्याशित” परिवर्तनों के कारण भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित 1960 की सिंधु जल संधि की समीक्षा और संशोधन करने की मांग की गई है। इससे पहले 2023 में भारत सरकार ने सिंधु जल संधि में संशोधन की मांग करते हुए पाकिस्तान सरकार को नोटिस भी भेजा था। मौजूदा नोटिस में सिंधु जल संधि की समीक्षा की बात कही गई है और भारत इस संधि पर दोबारा बातचीत करना चाहता है।

सिंधु जल संधि क्या

  • सिंधु जल संधि सन 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी, जिसमें विश्व बैंक ने मध्यस्थता की थी।
  • इस संधि के तहत सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के जल का बंटवारा भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों के बीच किया गया था।
  • भारत को सतलुज, ब्यास और रावी नदियों पर अधिकार मिला था , जबकि जम्मू और कश्मीर से बहने वाली नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब के पानी पर पाकिस्तान को अधिकार मिला था।

वर्तमान समय में सिंधु जल संधि को लेकर विवाद का मुख्य कारण

  • जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर पाकिस्तान की आपत्ति : भारत ने अपनी सीमा पर कई जलविद्युत परियोजनाओं विशेषकर किशनगंगा और रतले की योजना बनाई है, जिससे पाकिस्तान को आपत्ति है। पाकिस्तान ने इन परियोजनाओं पर तटस्थ विशेषज्ञ की जांच की मांग की है।
  • जल का अनियोजित और असमान वितरण होना : भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर विवाद का मुख्य कारण जल का अनियोजित और असमान वितरण है। भारत के कई जलविद्युत परियोजनाओं के क्रियान्वयन से पाकिस्तान को यह चिंता है कि यह उसके जल संसाधनों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
  • राजनीतिक रूप से उत्पन्न तनाव : सन 2016 में भारत के उरी नामक जगह पर पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवादी हमले के बाद भारतीय प्रधानमंत्री ने “खून और पानी” के बहाव के बारे में बहुत ही तल्ख और कठोर टिप्पणी की थी, जिससे भारत और पाकिस्तान के बीच के आपसी संबंधों में तनाव और बढ़ गया है।
  • दोनों ही देशों के बीच होने वाले आपसी वार्ता में गतिरोध उत्पन्न होना : भारत ने पाकिस्तान के साथ बातचीत की प्रक्रिया को स्थगित कर दिया है, जिससे स्थिति और बिगड़ गई है।
  • सीमापार से पाकिस्तान द्वारा जारी आतंकवाद : भारत ने सीमापार से जारी पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद के प्रभाव को भी इस संधि की समीक्षा की मांग का एक कारण बताया है।
  • जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय संबंधी मुख्य मुद्दे : भारत और पाकिस्तान के बीच के आपसी संबंधों में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय मुद्दे भी विवाद का एक प्रमुख कारण हैं।

 भारत का रूख

  • भारत का मानना है कि संधि के प्रावधानों में बदलाव की आवश्यकता है, ताकि वर्तमान समय की चुनौतियों का सामना किया जा सके।
  • भारत ने पाकिस्तान को वार्ता के लिए आमंत्रित किया है, लेकिन पाकिस्तान ने अभी तक सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
  • भारत ने सिंधु जल संधि के संदर्भ में अपने रूख को दृढ़ता से बनाए रखा है। भारतीय अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तान को अपनी चिंताओं को सुलझाने के लिए संधि के ढांचे के तहत बातचीत करने की आवश्यकता है।
  • भारत ने कई बार यह स्पष्ट किया है कि वह जल संसाधनों का उपयोग अपने विकास के लिए करेगा, जबकि पाकिस्तान को जल की न्यूनतम जरूरतों का सम्मान करना चाहिए।

समाधान की राह

  • आपसी वार्ता और संवाद से सिंधु जल संधि विवाद का समाधान करने की कोशिश करना : भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों को वार्ता के माध्यम से इस समस्या का समाधान निकालने की कोशिश करनी चाहिए। दोनों ही देशों को वार्ता की प्रक्रिया को पुनः शुरू करना चाहिए। यह आवश्यक है कि दोनों पक्ष अपनी चिंताओं और आवश्यकताओं को आपस में साझा करें।
  • अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता का सहारा लेना : यदि भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों के बीच का द्विपक्षीय बातचीत असफल होती है, तो अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता का सहारा लेना एक विकल्प हो सकता है। विश्व बैंक या अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की मध्यस्थता से विवाद का समाधान हो सकता है।
  • पर्यावरणीय और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में आपसी सहयोग करना : जलवायु परिवर्तन और इसके प्रभावों पर दोनों देशों को मिलकर काम करना चाहिए। इससे जल संसाधनों के प्रबंधन में सहयोग बढ़ सकता है।
  • निष्पक्ष मूल्यांकन के लिए तटस्थ विशेषज्ञों की भूमिका तय करना : पाकिस्तान की तटस्थ विशेषज्ञों की मांग का सम्मान करते हुए, एक निष्पक्ष मूल्यांकन करना आवश्यक हो सकता है।

Login

error: Content is protected !!