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सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश अंडमान निकोबार की राजधानी पोर्ट ब्लेयर का नाम 234 सालों बाद बदलकर अब ‘श्री विजयपुरम’ कर दिया है। इसकी जानकारी देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ‘श्री विजयपुरम’ नाम हमारे स्वाधीनता के संघर्ष और इसमें अंडमान और निकोबार के योगदान को दर्शाता है।

पोर्ट ब्लेयरनाम की उत्पत्ति

  • पोर्ट ब्लेयर का नाम ब्रिटिश नौसेना सर्वेक्षक आर्चीबाल्ड ब्लेयर के नाम पर रखा गया था, जिन्होंने 1700 के दशक के अंत में अंडमान द्वीपों का पता लगाया था।
  • मूल रूप से, इस जगह को पोर्ट कॉर्नवालिस कहा जाता था, जिसका नाम ब्रिटिश नौसेना अधिकारी कमोडोर विलियम कॉर्नवालिस के नाम पर रखा गया था। हालाँकि, बाद में इसका नाम बदलकर ब्लेयर के सम्मान में रखा गया, जिन्होंने इस क्षेत्र का गहन सर्वेक्षण किया था।

अंडमान द्वीप समूह का औपनिवेशिक इतिहास

  • ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान, ईस्ट इंडिया कंपनी अंडमान द्वीप समूह को सैन्य उद्देश्यों के लिए एक रणनीतिक स्थान के रूप में उपयोग करना चाहती थी।
  • उन्हें इस क्षेत्र में समुद्री डाकुओं से सुरक्षित बंदरगाह की भी आवश्यकता थी। 1857 के विद्रोह के बाद, अंग्रेजों ने द्वीपों पर एक दंडात्मक उपनिवेश स्थापित किया, जहाँ उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों सहित कई कैदियों को भेजा।

पोर्ट ब्लेयर से श्री विजया पुरम

  • अंग्रेजों ने पोर्ट ब्लेयर का नाम ब्रिटिश औपनिवेशिक नौसेना के अधिकारी कैप्टन आर्चीबाल्ड ब्लेयर के नाम पर रखा था । 1788 में, ईस्ट इंडिया कंपनी ने अंडमान द्वीप समूह और चागोस द्वीपसमूह का सर्वेक्षण करने के लिए कैप्टन ब्लेयर को नियुक्त किया। कैप्टन आर्चीबाल्ड ब्लेयर 1789 में अंडमान पहुंचे थे ।
  • श्री विजया पुरम का नया नाम ,श्री विजया साम्राज्य से प्रेरित है जो 7वीं से 13वीं शताब्दी ईस्वी के बीच दक्षिण पूर्व एशिया (वर्तमान इंडोनेशिया) में फेला हुआ था । यह एक शक्तिशाली बौद्ध समुद्री साम्राज्य था।
  • अंडमान एक समय चोल साम्राज्य का नौसैनिक अड्डा भी था।

स्वतंत्रता संग्राम में अंडमान निकोबार का महत्व

  • आज़ाद हिंद फ़ौज के सर्वोच्च कमांडर नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 30 दिसंबर 1943 को पोर्ट ब्लेयर में भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया और अंग्रेजों से देश की स्वतंत्रता की घोषणा की।
  • अंडमान में तीन मंजिला सेल्यूलर जेल भी है जिसका निर्माण 1906 में वीर सावरकर जैसे भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों को जेल में रखने के लिए किया गया था।
  • यह जेल काला पानी के नाम से भी प्रसिद्ध है।

अंडमान और निकोबार में द्वीपों का नाम बदलना

  • जून 2018 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अंडमान निकोबार यात्रा के दौरान तीन प्रमुख द्वीपों के नाम बदल दिए गए।
  • रॉस द्वीप का नाम बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप, नील द्वीप का नाम शहीद द्वीप और हैवलॉक द्वीप का नाम बदलकर स्वराज द्वीप कर दिया गया था ।
  • फिर 23 जनवरी 2023 को, नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिन के अवसर पर, जिसे पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जाता है, भारत सरकार ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के 21 सबसे बड़े अनाम द्वीपों का नाम बदलकर 21 परमवीर चक्र पुरस्कार विजेता के नाम पर रखा दिया था।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह

  • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 836 द्वीप/आइलेट्स/रॉकी आउटक्रॉप्स शामिल हैं, जिनमें से 213 बसे हुए हैं।
  • यह हिंद महासागर में स्थित है और इसमें दो द्वीप समूह शामिल हैं – अंडमान द्वीप समूह और निकोबार द्वीप समूह।
  • 10° उत्तरी अक्षांश,अंडमान द्वीप समूह को निकोबार द्वीप समूह से अलग करते हैं।
  • अंडमान द्वीप समूह का कुल क्षेत्रफल 6,408 वर्ग किमी और निकोबार द्वीप समूह का 1,841 वर्ग किमी है।
  • 1956 में इसे केंद्र शासित प्रदेश बन दिया गया था।
  • उपराज्यपाल: देवेन्द्र कुमार जोशी

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