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रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 1,44,716 करोड़ रुपए के 10 रक्षा अधिग्रहण प्रस्तावों के लिये स्वीकृति की आवश्यकता (AoN) प्रदान की।Buy (खरीद) (भारतीय) और buy (भारतीय-आईडीडीएम) श्रेणियों के तहत DAC द्वारा स्वीकृत की गई परियोजनाओं के कुल मूल्य का 99% हिस्सा स्वदेशी स्रोतों का होगा।

AoN का अर्थ है कि सरकार ने उपकरण की ज़रूरत को स्वीकार कर लिया है और यह खरीद (buy ) प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में पहला कदम है। हालाँकि AoN दिये जाने से ज़रूरी नहीं है कि अंतिम आदेश ही मिले।रक्षा खरीद नीति के तहत स्वदेशीकरण के लिये buy (भारतीय-स्वदेशी रूप से डिज़ाइन, विकसित और निर्मित (IDDM)) श्रेणी अधिग्रहण की सबसे महत्त्वपूर्ण श्रेणी है।

प्रमुख अधिग्रहण प्रस्ताव

  • भविष्य के लिये तैयार लड़ाकू वाहन (FRCV): सरकार द्वारा स्वीकृत परियोजनाओं का केंद्रबिंदु बनाते हुए, यह एक उन्नत मुख्य युद्धक टैंक है जिसमें सभी क्षेत्रों में बेहतर गतिशीलता, बहुस्तरीय सुरक्षा, सटीकता, घातक मारक क्षमता और वास्तविक समय की स्थिति के बारे में जानकारी है।इसका उद्देश्य पुराने सोवियत मूल के T-92 टैंकों को बदलना है।भारतीय सेना लगभग 60,000 करोड़ रुपए की लागत से 1,770 FRCV को शामिल करने की योजना बना रही है।रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) की मेक I प्रक्रिया के तहत, FRCV को तीन चरणों में अधिग्रहित किया जाएगा।
  • वायु रक्षा अग्नि नियंत्रण रडार: यह हवाई लक्ष्यों का पता लगा सकता है और उन्हें ट्रैक कर सकता है तथा फायरिंग के लिये बंदूकें आवंटित कर सकता है।वर्तमान खरीद इज़रायल से 2,500 करोड़ रुपए में 66 रडार के पहले आयात के बाद की गई है, जिसका उद्देश्य पुराने फ्लाई-कैचर रडार को बदलना है।इस प्रस्ताव को फॉरवर्ड रिपेयर टीम (ट्रैक्ड) के लिये भी मंजूरी दी गई है, जिसमें मशीनीकृत संचालन के दौरान इन-सीटू मरम्मत करने हेतु उपयुक्त क्रॉस कंट्री मोबिलिटी है।

भारतीय तटरक्षक बल के लिये प्रस्ताव

  • डोर्नियर-228 विमान – ICG की निगरानी और टोही क्षमताओं को बढ़ाने हेतु।
  • अगली पीढ़ी के तेज़ गश्ती पोत – खराब मौसम की स्थिति के लिये उच्च परिचालन सुविधाओं युक्त
  • अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत – समुद्री क्षेत्रों की गश्त, खोज और बचाव तथा आपदा राहत कार्यों को करने के लिये उन्नत लंबी दूरी के संचालन युक्त पोत हैं।

रक्षा अधिग्रहण परिषद

  • रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) सेना, नौसेना, वायु सेना और भारतीय तटरक्षक बल के लिये नई नीतियों और पूंजी अधिग्रहण की स्थापना हेतु रक्षा मंत्रालय में शीर्ष निर्णय लेने वाला प्राधिकरण है।
  • इस परिषद की अध्यक्षता रक्षा मंत्री करते हैं।
  • वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के मद्देनजर ‘राष्ट्रीय सुरक्षा प्रणाली में सुधार’ पर मंत्रियों के समूह की सिफारिशों के बाद वर्ष 2001 में इसकी स्थापना की गई थी।

रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता के लिये भारत के प्रयास

रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। भारत ने आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिये कई कदम उठाए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • सैकड़ों हथियारों और प्रणालियों के आयात पर चरणबद्ध प्रतिबंध
  • स्थानीय स्तर पर निर्मित सैन्य हार्डवेयर खरीदने के लिये अलग बजट
  • FDI को 49% से बढ़ाकर 74% करना एवं व्यापार करने में आसानी में सुधार करना।

बनाना(Make)’ श्रेणियाँ निजी क्षेत्र सहित भारतीय औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र की अधिक भागीदारी को शामिल करके आत्मनिर्भरता के उद्देश्य को प्राप्त करने की एक और पहल है। इसमें निम्नलिखित प्रक्रियाएँ शामिल हैं:

  • Make-I (सरकार द्वारा वित्तपोषित): इसमें उपकरण, सिस्टम, प्रमुख प्लेटफॉर्म या उद्योग द्वारा उनके उन्नयन का डिजाइन और विकास शामिल है। Make-I उप-श्रेणी के तहत परियोजनाओं के लिये, MoD व्यवहार्यता अंतर निधि पद्धति के आधार पर प्रोटोटाइप विकास लागत का अधिकतम 70% तक निधि सहायता प्रदान करता है।
  • Make-II (उद्योग द्वारा वित्तपोषित): इसमें सैन्य हार्डवेयर शामिल है जिसे स्वदेशी रूप से डिज़ाइन और विकसित नहीं किया जा सकता है, लेकिन आयात प्रतिस्थापन के लिये देश में निर्मित किया जा सकता है।कोई सरकारी निधि प्रदान नहीं की जाती है।
  • Make-III (स्वदेशी रूप से निर्मित): ये भारत में उत्पादित उप-प्रणालियाँ, घटक और गोला-बारूद हैं जो मौजूदा हथियार प्रणालियों के आयात को प्रतिस्थापित करने हेतु अक्सर विदेशी भागीदारी या प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से उत्पादित किये जाते हैं।

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