राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने पंजाब सरकार पर कई चेतावनियों के बावजूद राज्य में ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन में विफल रहने के लिये 1,000 करोड़ रुपए का ज़ुर्माना लगाया है। यह राशि एक महीने के भीतर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCP) के पास जमा करनी है।
NGT ने पंजाब सरकार पर ज़ुर्माना क्यों लगाया
- पिछले छह महीनों में लगाए गए ज़ुर्माने: NGT ने ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन में विफलता के कारण यह ज़ुर्माना लगाया हैज़ुर्माने की गणना 5.387 मिलियन टन पुरानेहीने की अवधि में ल अपशिष्ट तथा सीवेज उपचार क्षमता में अंतर के कारण अनुपचारित सीवेज के लिये छह मगाए गए पर्यावरणीय ज़ुर्माने के आधार पर की गई थी।
- बार-बार उल्लंघन: न्यायाधिकरण ने पाया कि पंजाब सरकार वर्ष 2022 में अपने पिछले आदेशों का पालन करने में भी विफल रही है, जिसमें NGT अधिनियम, 2010 की धारा 26 के तहत 2,080 करोड़ रुपए के लिये रिंग-फेंस्ड खाता बनाना भी शामिल है।NGT ने पंजाब के मुख्य सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव (शहरी विकास) को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा है।
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016
- इन नियमों ने नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (प्रबंधन और हैंडलिंग) नियम, 2000 को प्रतिस्थापित किया है और स्रोत पर अपशिष्ट को पृथक करने, सैनिटरी एवं पैकेजिंग अपशिष्ट के निपटान के लिये निर्माता की ज़िम्मेदारी, बड़े पैमाने पर अपशिष्ट उत्पादकों से अपशिष्ट का संग्रह, निपटान तथा प्रसंस्करण हेतु उपयोगकर्त्ता शुल्क पर ध्यान केंद्रित किया।
प्रमुख विशेषताएँ
- उत्पादकों की ज़िम्मेदारी यह निर्धारित की गई है कि वे अपशिष्ट को तीन श्रेणियों में विभाजित करें- गीला (जैवनिम्नीकरणीय), सूखा (प्लास्टिक, कागज, धातु, लकड़ी, आदि) और घरेलू खतरनाक अपशिष्ट (डायपर, मच्छर भगाने वाली दवाइयाँ, आदि) तथा अलग किये गए अपशिष्ट को अधिकृत कूड़ा बीनने वालों या अपशिष्ट संग्रहकर्त्ताओं या स्थानीय निकायों को सौंप दें।
अपशिष्ट उत्पादकों को यह भुगतान करना होगा
- अपशिष्ट संग्रहकर्ताओं को ‘उपयोगकर्ता शुल्क’।
- अपशिष्ट फेंकने और अलग न करने पर ‘स्पॉट फाइन’।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत 18 अक्तूबर, 2010 को NGT की स्थापना की गई थी।
- इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, वनों के संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित मामलों का त्वरित और कुशल समाधान करना है।
- इस अधिकरण का नेतृत्व केंद्र सरकार द्वारा CJI के परामर्श से नियुक्त, अध्यक्ष करते हैं, जो मुख्य पीठ पर बैठते हैं और इसमें कम से कम 10-20 न्यायिक सदस्य तथा विशेषज्ञ होते हैं।
क्षेत्राधिकार
- अधिकरण का क्षेत्राधिकार पर्यावरण अधिकारों को लागू करने, व्यक्तियों और संपत्ति को हुए नुकसान के लिये राहत तथा मुआवज़ा देने एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों को हल करने तक फैला हुआ है
- आवेदन दाखिल करने के मूल क्षेत्राधिकार के अलावा NGT के पास न्यायालय (न्यायाधिकरण) के रूप में अपील सुनने का अपीलीय क्षेत्राधिकार भी है।
NGT निम्नलिखित कानूनों के तहत दीवानी मामलों का समाधान करता है
- जल (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम,
- जल (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) उपकर अधिनियम,
- वन (संरक्षण) अधिनियम,
- वायु (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम,
- पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम,
- सार्वजनिक दायित्व बीमा अधिनियम,
- जैविक विविधता अधिनियम, 2002
