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22 अगस्त 2024 को राजस्थान के उदयपुर में 5 राज्यों में कार्यरत नौ क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी) की एक बैठक आयोजित की गई। बैठक, जिसमें इन क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के प्रदर्शन की समीक्षा की गई, की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने की और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने इसमे भाग लिया।

किन राज्यों के आरआरबी के प्रदर्शन की समीक्षा की गई

  • उदयपुर बैठक में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में कार्यरत नौ क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के प्रदर्शन की समीक्षा की गई।

बैठक में कौन शामिल हुआ

  • निर्मला सीतारमण ने बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें केंद्रीय वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नागराजू ने भाग लिया।
  • बैठक में इन नौ क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के अध्यक्षों, इन क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के प्रायोजक बैंकों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय लघु औद्योगिक विकास बैंक (सिडबी), राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), और इन पांच राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

आरआरबी समीक्षा बैठक के मुख्य तथ्य

  • सरकारी योजनाओं की जागरूकता : वित्त मंत्री ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों से विशेष रूप से आकांक्षी जिलों में सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने का आग्रह किया है।
  • प्रौद्योगिकी उन्नयन में सुधार पर जोर देना : 2022 से पश्चिमी मध्य क्षेत्र के नौ आरआरबी के प्रौद्योगिकी उन्नयन में सुधार की सराहना की गई।
  • एमएसएमई क्लस्टर : एमएसएमई क्लस्टरों में छोटे और सूक्ष्म उद्यमों को ऋण सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय पहुँच बनाने पर जोर दिया गया।
  • मुद्रा योजना को विस्तारित करना : केन्द्रीय वित्त मंत्री ने बुंदेलखंड क्षेत्र में मुद्रा योजना के कम उपयोग का उल्लेख किया और इसके प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए विशेष बैठकें आयोजित करने का निर्देश दिया गया।
  • पीएम सूर्य घर योजना के लिए जन जागरूकता पैदा करना : गुजरात और राजस्थान में इस योजना के लिए जागरूकता पैदा करने और ऋण प्रदान करने का आग्रह किया गया।
  • ओडीओपी और पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत ऋण प्रदान करना : क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को इन योजनाओं के तहत संभावित कारोबार की पहचान करने और ऋण प्रदान करने का निर्देश दिया गया।
  • कृषि ऋण वितरण में हिस्सेदारी बढ़ाना : जमीनी स्तर पर कृषि ऋण वितरण में हिस्सेदारी बढ़ाने और प्राथमिकता क्षेत्र ऋण के उद्देश्यों को प्राप्त करने का निर्देश दिया गया।
  • वित्तीय प्रदर्शन पर जोर देना : क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का सीआरएआर वित्त वर्ष 2021 में 7.8% से बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में 13.7% हो गया है और शुद्ध लाभ 2,018 करोड़ रुपये हो गया है।
  • ग्राहक अनुकूलता और स्थानीय संपर्क का लाभ उठाना : वित्त मंत्री ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को और अधिक ग्राहक अनुकूल बनने और अपने स्थानीय संपर्क का लाभ उठाने का निर्देश दिया।
  • प्रायोजक बैंकों की भूमिका सुनिश्चित करना : प्रायोजक बैंकों को तकनीकी सहायता प्रदान करने, सर्वोत्तम तौर-तरीकों को साझा करने और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को आवश्यक संसाधनों तक पहुँच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का निर्देश दिया गया।
  • चुनौतियों की पहचान करने पर जोर देना : प्रायोजक बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को परिसंपत्ति की गुणवत्ता बनाए रखने, डिजिटल सेवाओं का विस्तार करने और मजबूत कॉरपोरेट प्रशासन सुनिश्चित करने की चुनौतियों की पहचान करने पर जोर दिया गया।

 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक

  • इसकी स्थापना नरसिंहम समिति (1975) की सिफारिशों के आधार पर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976 के तहत की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण सुविधाओं को बढ़ाने के लिए इनकी स्थापना की गई है।आरआरबी को वाणिज्यिक बैंकों की तर्ज पर प्राथमिकता क्षेत्र ऋण के दायरे में लाया गया है।इन बैंकों की शेयरधारिता क्रमशः केंद्र सरकार, संबंधित राज्य सरकार और प्रायोजक बैंक के साथ 50:15:35 के अनुपात में होता है।

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक का महत्व

  • ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएँ प्रदान करने में : क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएँ सीधे लोगों के दरवाजे तक पहुँचाते हैं। इससे ग्रामीण जनता को बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठाने में सुविधा होती है, जो सामान्यतः वाणिज्यिक बैंकों द्वारा उपलब्ध नहीं कराई जाती।
  • कमजोर वर्गों को संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने में : आरआरबी कमजोर वर्गों, जैसे कि छोटे और सीमांत किसान, भूमिहीन मजदूर, और छोटे उद्यमियों को संस्थागत ऋण उपलब्ध कराते हैं। इससे इन वर्गों को आर्थिक सहायता मिलती है और वे अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकते हैं।
  • सहकारी समितियों और स्वयं सहायता समूहों को वित्त उपलब्ध कराने और ग्रामीण क्षेत्रों में सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहन देने में : क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक सहकारी समितियों और स्वयं सहायता समूहों को आसानीपूर्वक और सीधा वित्त उपलब्ध कराते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहन मिलता है और सामुदायिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
  • वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में : क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे उन क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएँ प्रदान करते हैं जहाँ वाणिज्यिक बैंक नहीं पहुँच पाते, जिससे ग्रामीण जनता को वित्तीय सेवाओं का लाभ मिलता है।
  • कृषि और ग्रामीण विकास को प्रोत्साहित करने में : आरआरबी कृषि और ग्रामीण विकास को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न प्रकार के ऋण और वित्तीय सेवाएँ प्रदान करते हैं। इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
  • स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर का सृजन करने में : आरआरबी स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी प्रदान करते हैं। बैंकिंग सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ, इन बैंकों में स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। इस प्रकार, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के समक्ष वर्तमान चुनौतियाँ

  • उच्च स्तर पर घाटे में होना : क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) के कई शाखाओं में पर्याप्त व्यवसाय नहीं है, जिससे उन्हें घाटा हो रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि ये बैंक मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) जैसी सरकारी योजनाओं को लागू करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
  • ऋणों की वसूली दरों में गिरावट का होना : क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की ऋण वसूली दरों में पिछले कुछ वर्षों में गिरावट आई है, जिससे उनकी गैर-निष्पादित परिसंपत्तियाँ (NPA) बढ़ गई हैं। यह स्थिति बैंक की वित्तीय स्थिति को कमजोर करती है और उनके संचालन को प्रभावित करती है।
  • नियंत्रण में एकता का अभाव होना : इन बैंकों को केंद्र सरकार, प्रायोजक बैंकों, नाबार्ड और भारतीय रिजर्व बैंक जैसी विभिन्न एजेंसियों द्वारा नियंत्रित किया जाता है। इस बहु-स्तरीय नियंत्रण प्रणाली के कारण निर्णय लेने में देरी और समन्वय की कमी होती है।
  • क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के संचालन की लागत का अधिक होना : अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की तुलना में आरआरबी के संचालन की लागत अधिक है। सरकार चाहती है कि ये बैंक अपनी कमाई बढ़ाने के लिए काम करें, लेकिन सीमित संसाधनों और उच्च परिचालन लागत के कारण यह चुनौतीपूर्ण है।
  • सीमित गतिविधियाँ और पर्याप्त व्यवसाय का नहीं होना : कई शाखाओं के पास पर्याप्त व्यवसाय नहीं है, जिसके कारण उन्हें घाटा हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में वे मुख्य रूप से प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण जैसी सरकारी योजनाओं की पेशकश करते हैं, जिससे उनकी आय सीमित रहती है।
  • सीमित इंटरनेट बैंकिंग सुविधाओं का होना : वर्तमान समय में केवल कुछ ही क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के पास इंटरनेट बैंकिंग सुविधाएँ हैं। मौजूदा नियम केवल उन्हीं आरआरबी को इंटरनेट बैंकिंग की पेशकश करने की अनुमति देते हैं जो न्यूनतम वैधानिक पूंजी जोखिम-भारित संपत्ति अनुपात (CRAR) 10% से अधिक बनाए रखते हैं।
  • डिजिटलीकरण की कमी होना : सरकार ने आरआरबी को डिजिटलीकरण की ओर बढ़ने के लिए कहा है ताकि वे आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें, लेकिन सीमित संसाधनों और तकनीकी ज्ञान की कमी के कारण क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में यह प्रक्रिया धीमी है।
  • प्रायोजक बैंकों का समर्थन का अभाव होना : सरकार ने प्रायोजक बैंकों से आरआरबी को और मजबूत करने के लिए समयबद्ध तरीके से एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही आरआरबी पर एक कार्यशाला आयोजित करने और परस्पर सर्वोत्तम उपायों को साझा करने का सुझाव दिया गया है। इन चुनौतियों के बावजूद, आरआरबी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनके सुधार के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

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