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वैज्ञानिकों ने पहली बार मंगल ग्रह पर तरल पानी की खोज की है।एक नए अध्ययन के अनुसार, मंगल ग्रह की चट्टानी बाहरी परत के अंदर तरल पानी के महासागर हो सकते हैं।यह पहली बार है जब वैज्ञानिकों ने ग्रह पर तरल पानी की खोज की है।

मंगल ग्रह पर जल से संबंधित हाल की खोजें क्या हैं

  • मंगल ग्रह के ज्वालामुखी पर जल: मंगल ग्रह पर सर्दियों के दौरान प्रत्येक सुबह कुछ घंटों के लिये थार्सिस ज्वालामुखी क्षेत्र के प्रारंभिक कैल्डेरा/ज्वालामुखी कुंड, जिसमें ओलंपस मॉन्स भी शामिल है, में बर्फ जम जाती है। मंगल ग्रह की विषुवत्त रेखा पर सूर्य की रोशनी पड़ने पर बर्फ (Patches of Frost) वाष्पित हो जाती है।
  • यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के ट्रेस गैस ऑर्बिटर और मार्स एक्सप्रेस ऑर्बिटर ने बर्फ/पाले की खोज़ की है। बर्फ/पाला विशेष सूक्ष्म जलवायु द्वारा बनता है जो काल्डेरा और पर्वत चोटियों के आसपास वायु परिसंचरण द्वारा उत्पन्न होता है।

ओलंपस मॉन्स मंगल ग्रह पर सबसे ऊँचा ज्वालामुखी है, जिसकी ऊँचाई 29.9 किलोमीटर (माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई से लगभग 2.5 गुना) है। यह मंगल की विषुवत्त रेखा के निकट पश्चिमी गोलार्द्ध में स्थित है।जब ज्वालामुखी फटकर अंदर की ओर गिरता है तो कैल्डेरा अर्थात् ज्वालामुखी कुंड का निर्माण होता है, जिसके परिणामस्वरूप मंगल की सतह (Mars’ Crust) पर एक गड्ढा (Depression) बन जाता है।थार्सिस क्षेत्र मंगल ग्रह पर सबसे बड़ा ज्वालामुखी क्षेत्र है जिसमें 12 बड़े ज्वालामुखी हैं।

मंगल की सतह पर जल

  • ‘लिक्विड वाटर इन द मार्शियन मिड-क्रस्ट अर्थात् मंगल की मध्य-सतह पर तरल जल’ शीर्षक वाले अध्ययन में NASA के मार्स इनसाइट लैंडर के डेटा का उपयोग किया गया, जो एक भूकंपमापी से सुसज्जित था, जिसने चार वर्षों तक मंगल की भूकंपीय तरंगों को रिकॉर्ड किया।
  • मंगल इनसाइट लैंडर मंगल के आंतरिक भागों अर्थात् इसकी सतह, मैंटल और क्रोड का गहन अध्ययन करने वाला पहला मिशन था।
  • इनसाइट लैंडर (InSight Lander) द्वारा एकत्र डेटा के लिये सबसे अच्छी व्याख्या यह है कि मंगल की सतह के नीचे ग्रेनाइट जैसी टूटी हुई आग्नेय चट्टान की एक परत मौजूद है, जिसकी दरारें जल से भरी हुई हैं।
  • संभवतः यह जल अरबों वर्ष पूर्व सतह से रिसकर अंदर आया होगा, जब मंगल पर नदियाँ, झीलें और संभावित रूप से महासागर थे, जो उस समय ऊपरी सतह के गर्म होने का संकेत देते हैं।
  • हालाँकि यह खोज़ मंगल पर जीवन के अस्तित्व की पुष्टि नहीं करती है, लेकिन यह रहने योग्य वातावरण की संभावना का संकेत देती है क्योंकि जीवन के लिये जल आवश्यक है।

मंगल के संदर्भ में मुख्य तथ्य

  • मंगल सूर्य से चौथा ग्रह है। यह बुध के बाद सौरमंडल का दूसरा सबसे छोटा ग्रह है।
  • इसे ‘लाल ग्रह’ इसलिये कहा जाता है क्योंकि इसके वायुमंडल में लौह खनिज के ऑक्सीकरण के कारण सतह लाल दिखाई देती है।
  • मंगल के दो छोटे चंद्रमा फोबोस (Phobos) और डेमोस (Deimos)हैं।।
मंगल ग्रह के लिये महत्त्वपूर्ण मिशन
मिशन का नाम (वर्ष)अंतरिक्ष एजेंसी/देशउद्देश्य
मेरिनर 4 (1964)नासामंगल ग्रह के निकट उड़ान भरने और ग्रह की तस्वीरें प्रदान करने वाला पहला अंतरिक्ष यान।
वाइकिंग 1 और वाइकिंग 2 (दोनों 1975)नासामंगल ग्रह पर सफलतापूर्वक उतरने वाला पहला अंतरिक्ष यान 
क्यूरियोसिटी रोवर (2011)नासामंगल ग्रह की जलवायु और भूविज्ञान का अध्ययन किया; मंगल ग्रह पर प्रारंभिक काल में जल के साक्ष्य मिले।
मंगलयान (मंगल ऑर्बिटर मिशन) (2013)इसरोमंगल ग्रह पर पहला भारतीय मिशन; मंगल ग्रह की सतह की विशेषताओं, आकृति विज्ञान, वायुमंडल और खनिज विज्ञान का अध्ययन करना।
इनसाइट (2018)नासामंगल ग्रह की भूगर्भीय गतिविधि को समझने के लिये इसकी भूपर्पटी, मेंटल और कोर सहित इसके आंतरिक भाग का अध्ययन करना।
तियानवेन 1 (2020)CNSA (चीन)मंगल ग्रह की स्थलाकृति और भूविज्ञान का अध्ययन करना तथा जलीय-बर्फ की मात्रा की तलाश करना।
पर्सिवियरेंस रोवर (2020)नासामंगल ग्रह की चट्टानों और मृदा से नमूने एकत्र करने का प्रदर्शन करने वाला पहला मिशन।
होप मार्स मिशन (2020)संयुक्त अरब अमीरातमंगल ग्रह के वायुमंडल में मानव जाति का पहला एकीकृत मॉडल बनाना।

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