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हिंद महासागर में तीन उच्चावच संरचनाओं का नाम अशोक, चंद्रगुप्त और कल्पतरु रखा गया, जो समुद्री विज्ञान में भारत के बढ़ते प्रभाव एवं हिंद महासागर की खोज व समझ के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।यह नामकरण भारत द्वारा प्रस्तावित किया गया था और अंतर्राष्ट्रीय हाइड्रोग्राफिक संगठन (IHO) और यूनेस्को के अंतर-सरकारी महासागरीय आयोग (IOC) द्वारा अनुमोदित किया गया था।

अंतर्राष्ट्रीय हाइड्रोग्राफिक संगठन (IHO)

  • यह वर्ष 1921 में स्थापित एक अंतर-सरकारी परामर्शदात्री और तकनीकी निकाय है, जिसका उद्देश्य नौ-वहन सुरक्षा को बढ़ाना और समुद्री पर्यावरण की रक्षा करना है।
  • भारत IHO का सदस्य है।

उद्देश्य

  • राष्ट्रीय हाइड्रोग्राफिक कार्यालयों की गतिविधियों का समन्वय करना।
  • समुद्री चार्ट और दस्तावेज़ों में यथासंभव उच्चतम एकरूपता प्राप्त करना।
  • हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण करने और उनका उपयोग करने हेतु विश्वसनीय और कुशल तरीकों को अपनाने को बढ़ावा देना।
  • हाइड्रोग्राफी के विज्ञान और वर्णनात्मक समुद्र विज्ञान में उपयोग की जाने वाली तकनीकों को आगे बढ़ाना।

यूनेस्को का अंतर-सरकारी महासागरीय आयोग (IOC)

  • यह समुद्री विज्ञान, क्षमता विकास, महासागर अवलोकन और सेवाओं, महासागर विज्ञान, सुनामी चेतावनी एवं महासागर साक्षरता में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है।
  • इसके 150 सदस्य देश हैं और भारत वर्ष 1946 से इसका सदस्य है।
  • IOC का कार्य आर्थिक और सामाजिक प्रगति के लिये विज्ञान एवं इसके अनुप्रयोगों की उन्नति को बढ़ावा देने के यूनेस्को के मिशन में योगदान देता है।
  • IOC सतत् विकास के लिये महासागर विज्ञान के संयुक्त राष्ट्र दशक 2021-2030 का समन्वय कर रहा है, जिसे ‘महासागर दशक’ के रूप में भी जाना जाता है।

अंतर्जलीय संरचनाओं के संदर्भ में मुख्य तथ्य

पृष्ठभूमि और महत्त्व

  • इन अंतर्जलीय संरचनाओं की खोज भारतीय दक्षिणी महासागर अनुसंधान कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसे वर्ष 2004 में शुरू किया गया था, जिसमें राष्ट्रीय ध्रुवीय और महासागर अनुसंधान केंद्र (NCPOR) नोडल एजेंसी है।इस कार्यक्रम का उद्देश्य जैव-भू-रसायन, जैव विविधता और हाइड्रो-डायनामिक्स सहित विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करना है।

कुल संरचनाएँ

  • हाल ही में हिंद महासागर में जोड़ी गई संरचनाओं सहित सात संरचनाओं का नाम अब मुख्य रूप से भारतीय वैज्ञानिकों के नाम पर या भारत द्वारा प्रस्तावित नामों के आधार पर रखा गया है।

पूर्व नामित संरचनाएँ

  • रमन रिज/कटक (वर्ष 1992 में स्वीकृत): इसकी खोज वर्ष 1951 में एक अमेरिकी तेल पोत द्वारा की गई थी। इसका नाम भौतिक विज्ञानी और नोबेल पुरस्कार विजेता सर सी.वी. रमन के नाम पर रखा गया था।
  • पणिक्कर सी-माउंट (वर्ष 1993 में स्वीकृत): इस समुद्री टीले की खोज वर्ष 1992 में भारत के शोध पोत सागर कन्या द्वारा की गई थी। इसका नाम प्रसिद्ध समुद्र विज्ञानी एन.के. पणिक्कर के नाम पर रखा गया है।
  • सागर कन्या सी-माउंट (वर्ष 1991 में स्वीकृत): वर्ष 1986 में इसकी खोज हेतु  सफल 22वें क्रूज़ के लिये, इस समुद्री टीले का नाम शोध पोत सागर कन्या के नाम पर ही रखा गया था।
  • डी.एन. वाडिया निमग्न द्वीप: इसका नाम भू-विज्ञानी डी.एन. वाडिया के नाम पर वर्ष 1993 में रखा गया था, जब वर्ष 1992 में सागर कन्या द्वारा अंतर्जल में ज्वालामुखी पर्वत (निमग्न द्वीप/Guyot) की खोज की गई थी।

हाल ही में नामित संरचनाएँ

  • अशोक सी-माउंट: इसकी खोज वर्ष 2012 में हुई थी। यह लगभग 180 वर्ग किमी. में विस्तृत एक अंडाकार संरचना है और इसकी पहचान रूसी पोत अकादमिक निकोले स्त्राखोव का प्रयोग करके की गई थी।
  • कल्पतरु कटक: इसकी खोज वर्ष 2012 में हुई थी। यह लंबी कटक 430 वर्ग किमी. क्षेत्र में फैली हुई है जो सागरीय जैव विविधता को बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।विशेषज्ञों का मानना ​​है कि यह पर्वतमाला विभिन्न प्रजातियों के लिये आवास, आश्रय और भोजन स्रोत उपलब्ध कराकर समुद्री जीवन हेतु आवश्यक सहायता प्रदान करती रही होगी।
  • चंद्रगुप्त रिज: यह कटक 675 वर्ग किलोमीटर में फैली एक लंबी संरचना है। इसकी पहचान वर्ष 2020 में भारतीय शोध पोत MGS सागर द्वारा की गई थी।

अशोक और चंद्रगुप्त

चंद्रगुप्त मौर्य (350-295 ईसा पूर्व):

  • वह मगध के सम्राट और मौर्य वंश के संस्थापक थे, जिसने मगध में केंद्रित एक महत्त्वपूर्ण साम्राज्य की स्थापना की।
  • उन्होंने नंदों के पतन और कमज़ोरी का लाभ उठाकर चाणक्य (कौटिल्य) की सहायता से नंद वंश के अंतिम शासक धनानंद को पराजित किया और स्वयं को सम्राट घोषित किया।
  • अंत में उन्होंने अपना सिंहासन त्याग दिया और जैन शिक्षक भद्रबाहु के शिष्य बन गए।

अशोक:

  •  वह मौर्य वंश के तीसरे शासक थे (चंद्रगुप्त मौर्य और बिंदुसार के बाद) और उन्होंने लगभग 269 ईसा पूर्व शासन किया था।
  • अशोक की धम्म नीति और बौद्ध धर्म के प्रसार के प्रयास उसके शासन के महत्त्वपूर्ण पहलू हैं।
  • उन्होंने प्रियदासी और देवानामपिय की उपाधियाँ अपनाईं, जो उनके स्तंभ तथा शिलालेखों में देखी जा सकती हैं।

कल्पतरु :

  • कल्पतरु एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है “इच्छा-पूर्ति करने वाला वृक्ष।” हिंदू पौराणिक कथाओं में इसे प्रायः एक दिव्य वृक्ष के रूप में जाना जाता है जो इसका आशीर्वाद मांगने वालों की इच्छाएँ और अभिलाषाएँ पूरी करता है। यह अवधारणा प्रचुरता, समृद्धि और सपनों की पूर्ति का प्रतीक है।

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