आयुष मंत्रालय और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जुलाई 2024 में जिनेवा में WHO मुख्यालय में आयोजित एक हस्ताक्षर समारोह में एक दाता समझौते पर हस्ताक्षर किये।यह समझौता गुजरात के जामनगर में WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर (GTMC) की गतिविधियों के लिए वित्तीय शर्तों की रूपरेखा प्रस्तुत करता है। ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर (GTMC) को साक्ष्य-आधारित परंपरागत पूरक और एकीकृत चिकित्सा (Traditional Complementary and Integrative Medicine- TCIM) के लिए ज्ञान के प्रमुख स्रोत के रूप में स्वीकार किया गया है, जिसका उद्देश्य व्यक्तियों और धरती के स्वास्थ्य तथा कल्याण को बढ़ावा देना है।
इस हस्ताक्षर समारोह में प्रमुख हस्ताक्षरकर्ता और उपस्थित लोग
हाल ही में आयोजित इस हस्ताक्षर समारोह में कई उच्च पदस्थ अधिकारियों ने अपनी उपस्थिति से इस अवसर को महत्वपूर्ण बना दिया। इस समारोह में प्रमुख रूप से निम्न लोग शामिल थे:
- महामहिम श्री अरिंदम बागची : संयुक्त राष्ट्र, जिनेवा में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, जिन्होंने आयुष मंत्रालय की ओर से दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए।
- डॉ. ब्रूस आइलवर्ड : सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज और जीवन पाठ्यक्रम के सहायक महानिदेशक, जिन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से हस्ताक्षर किए।
- वैद्य राजेश कोटेचा : आयुष सचिव, जिन्होंने वर्चुअली इस समारोह में भाग लिया।
- डॉ. श्यामा कुरुविल्ला : डब्ल्यूएचओ जीटीएमसी की निदेशक, जिन्होंने इस इवेंट का संचालन किया।
- डॉ. रजिया पेंडसे : शेफ डी कैबिनेट, जिन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक का प्रतिनिधित्व करते हुए इस समारोह में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
वर्तमान समझौते का महत्व
- भारत और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के बीच सहयोग की इस नई पहल के तहत, भारत के गुजरात राज्य के जामनगर में स्थित WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर (GTMC) के संचालन के लिए 10 वर्षों (2022-2032) की अवधि में 85 मिलियन अमेरिकी डॉलर का दान प्रदान करेगा।
- यह कदम पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और विश्व स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- गुजरात के जामनगर में WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर की स्थापना, समग्र विश्व में पारंपरिक चिकित्सा का पहला और एकमात्र वैश्विक आउट-पोस्ट सेंटर (कार्यालय) स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
- पारंपरिक चिकित्सा में स्वास्थ्य बनाए रखने और शारीरिक एवं मानसिक रोगों के उपचार के लिए विभिन्न संस्कृतियों के ज्ञान, कौशल, और अभ्यास शामिल होते हैं।
- भारत में पारंपरिक चिकित्सा की छह प्रमुख मान्यता प्राप्त पद्धतियाँ हैं: आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और होम्योपैथी।
आयुष मंत्रालय और विश्व स्वास्थ्य संगठन के बीच सहयोगात्मक प्रयास
आयुष मंत्रालय और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के बीच सहयोगात्मक प्रयास पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाते हैं। यह साझेदारी निम्नलिखित मुख्य पहलुओं पर केंद्रित है:
- मानक दस्तावेजों का विकास : आयुष मंत्रालय और डब्ल्यूएचओ मिलकर आयुर्वेद, यूनानी, और सिद्ध प्रणालियों के प्रशिक्षण और अभ्यास के लिए मानक दस्तावेज तैयार कर रहे हैं। इन दस्तावेजों का उद्देश्य इन पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की मानकीकरण और विश्वसनीयता को सुनिश्चित करना है।
- डब्ल्यूएचओ शब्दावली का निर्माण : पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के लिए एक विशिष्ट शब्दावली विकसित की जा रही है, जो डब्ल्यूएचओ द्वारा मान्यता प्राप्त होगी। यह शब्दावली पारंपरिक चिकित्सा के सिद्धांतों और प्रक्रियाओं को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार स्पष्ट और समझने योग्य बनाएगी।
- रोगों के अंतर्राष्ट्रीय वर्गीकरण में सुधार : पारंपरिक चिकित्सा को अंतर्राष्ट्रीय रोग वर्गीकरण (ICD) में एक नई श्रेणी के रूप में शामिल करने के लिए एक दूसरा मॉड्यूल पेश किया जा रहा है। यह मॉड्यूल पारंपरिक चिकित्सा के उपचार और तकनीकों को वैश्विक स्तर पर मान्यता देगा।
- एम-योगा ऐप्स का विकास : योग और अन्य पारंपरिक चिकित्सा विधियों को डिजिटल माध्यम से प्रचारित करने के लिए एम-योगा जैसे मोबाइल ऐप्स का निर्माण किया जा रहा है। ये ऐप्स उपयोगकर्ताओं को योग के अभ्यास और अन्य स्वास्थ्य सुझाव प्रदान करेंगे।इन प्रयासों के माध्यम से, जिसमें डब्ल्यूएचओ की ग्लोबल ट्रडिशनल मेडिसिन सेंटर (जीटीएमसी) भी शामिल है, भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इन पहलों से पारंपरिक चिकित्सा को अंतर्राष्ट्रीय – स्तर पर मान्यता मिलेगी और इसके लाभों को वैश्विक स्तर पर फैलाने में मदद मिलेगी।
