शिक्षा मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने हाल ही में अस्मिता परियोजना का अनावरण किया, जिसका उद्देश्य भारतीय भाषाओं में शैक्षिक संसाधनों की उपलब्धता को बढ़ाना है।इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लक्ष्य अगले पाँच वर्षों में भारतीय भाषाओं में 22,000 पुस्तकें विकसित करना है। अस्मिता परियोजना (Augmenting Study Materials in Indian Languages through Translation and Academic Writing – ASMITA) के तहत, अनुवाद और अकादमिक लेखन के माध्यम से भारतीय भाषाओं में अध्ययन सामग्री का संवर्धन और संरक्षण किया जाएगा। यह परियोजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 के अनुरूप है, जो भारत के वर्तमान शिक्षा प्रणाली में भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा की गई कई पहलों में से एक है।
अस्मिता परियोजना
- अस्मिता परियोजना केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लॉन्च किया गया एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य शिक्षा में भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना है।
- यह UGC और भारतीय भाषा समिति द्वारा शुरू किया गया एक संयुक्त प्रयास है।
- विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की स्थापना वर्ष 1953 में विश्वविद्यालय शिक्षा में शिक्षण, परीक्षा, और अनुसंधान के मानकों के समन्वय, निर्धारण तथा संरक्षण के लिए किया गया था, जो कुछ वर्षों बाद वर्ष 1956 में भारत में विश्वविद्यालय शिक्षा के लिए एक सांविधिक संगठन बना।
- भारतीय भाषा समिति वर्ष 2021 में शिक्षा मंत्रालय द्वारा भारतीय भाषाओं के प्रचार-प्रसार के लिए गठित की गई एक आधारभूत समिति है।
- इस परियोजना का नेतृत्व करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के सदस्य विश्वविद्यालयों के साथ-साथ 13 नोडल विश्वविद्यालयों की पहचान की गई है।
- विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने प्रत्येक निर्दिष्ट भाषा में पुस्तक-लेखन प्रक्रिया के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाई है।
- इस परियोजना का लक्ष्य पाँच वर्षों के भीतर 22 भारतीय भाषाओं में 1,000 पुस्तकें तैयार करना है, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय भाषाओं में 22,000 पुस्तकें तैयार होंगी।
- इसके अतिरिक्त, इस आयोग का लक्ष्य जून 2025 तक कला, विज्ञान और वाणिज्य संकाय के लिए तक़रीबन 1,800 पाठ्यपुस्तकें तैयार करना है।
- प्रोजेक्ट अस्मिता का मुख्य उद्देश्य भारत में भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा को सुलभ और प्रभावी बनाना है, जिससे भारतीय छात्रों को अपनी मातृभाषा में पढ़ाई का अवसर मिले और भारत की शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो।
- यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत भारतीय भाषाओं के प्रचार और संरक्षण को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भारत में अस्मिता परियोजना का मुख्य उद्देश्य
- भारत में अस्मिता परियोजना का मुख्य उद्देश्य भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 अनुसूचित भाषाओं में शैक्षणिक संसाधनों का एक व्यापक पूल बनाने, भाषाई विभाजन को पाटने, सामाजिक सामंजस्य और एकता को बढ़ावा देने तथा देश के युवाओं को सामाजिक रूप से एक ज़िम्मेदार वैश्विक नागरिक के रूप में बदलने में मदद मिलेगी।
- भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में निम्नलिखित 22 भाषाएँ शामिल हैं –
- असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, सिंधी, तमिल, तेलुगु, उर्दू, बोडो, संथाली, मैथिली और डोगरी।
भारत में अस्मिता परियोजना का महत्व
- भारत में यह कार्यक्रम एनईपी के उद्देश्यों के अनुरूप हैं।
- इन पहलों का उद्देश्य विभिन्न भारतीय भाषाओं में शैक्षिक सामग्री की एक श्रृंखला स्थापित करना है।
- भारत में इससे भाषा संबंधी बाधाएं दूर होंगी, सद्भाव बढ़ेगा और आपसी एकता और भाईचारे को प्रोत्साहन मिलेगा।
- इसके अलावा, इन पहलों का उद्देश्य भारत की नई पीढ़ी को उनके अध्ययन में सहायता प्रदान करके तथा देश की सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा करके वैश्विक नागरिक के रूप में ढालना है।
