भारतीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय ने लंदन में अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन की परिषद के 132वें सत्र में भाग लिया।अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार में बड़ी रुचि रखने वाले देशों के लिये IMO परिषद के निर्वाचित सदस्य के रूप में भारत ने नाविकों के परित्याग के ज्वलंत मुद्दे पर प्रकाश डाला।नाविक वे लोग होते हैं जो जहाज़ों पर काम करते हैं या जो समुद्र में नियमित रूप से यात्रा करते हैं।भारत ने संयुक्त त्रिपक्षीय कार्य समूह में IMO का प्रतिनिधित्व करने वाली आठ सरकारों में से एक के रूप में अपना स्थान सुरक्षित कर लिया है, जो नाविकों के मुद्दों और समुद्री परिचालनों में मानवीय तत्त्व के समाधान के लिये समर्पित है।अन्य प्रस्तावित सदस्य हैं फिलीपींस, थाईलैंड, लाइबेरिया, पनामा, ग्रीस, अमेरिका और फ्राँस।
अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन के 132वें सत्र का प्रमुख निर्णय और प्रस्ताव
- अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन के अन्य प्रस्तावित सदस्य देशों में फिलीपींस, थाईलैंड, लाइबेरिया, पनामा, ग्रीस, अमेरिका और फ्रांस शामिल हैं।
- लाल सागर, अदन की खाड़ी तथा आस-पास के क्षेत्रों में अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार और परिचालन में व्यवधानों से संबंधित चिंताओं पर भी विचार किया गया, जिससे शिपिंग और व्यापार लॉजिस्टिक्स पर प्रभाव पड़ रहा है।
- भारत ने सतत् समुद्री परिवहन के लिए दक्षिण एशियाई उत्कृष्टता केंद्र (SACE-SMarT) के लिए अपना प्रस्ताव दोहराया।
- इस क्षेत्रीय केंद्र का उद्देश्य भारत और दक्षिण एशिया में समुद्री क्षेत्र को तकनीकी रूप से उन्नत, पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ और डिजिटल रूप से कुशल उद्योग में बदलना है।
- यह केंद्र ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने, तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने, क्षमता निर्माण और डिजिटल परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित करेगा।
अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन
- अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक विशेष एजेंसी है जो वैश्विक शिपिंग को विनियमित करने और जहाजों के कारण होने वाले समुद्री प्रदूषण को रोकने के लिए जिम्मेदार है1।
- IMO की स्थापना 1948 में जिनेवा, स्विट्जरलैंड में संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन के बाद हुई थी, लेकिन आधिकारिक तौर पर यह 1958 में अस्तित्व में आया था।
- इसमें 175 सदस्य देश है और तीन सहयोगी सदस्य देश हैं।
- इसका मुख्यालय लंदन, यूनाइटेड किंगडम में स्थित है।
- भारत ने 1959 में IMO में शामिल होने का निर्णय लिया था और इसमें शामिल हुआ था।
अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) की भूमिका
- अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) एक महत्वपूर्ण संगठन है जो समुद्री परिवहन के क्षेत्र में नियामक और नेतृत्व की भूमिका निभाता है। यह संगठन विश्वभर में समुद्री सुरक्षा, जलयान और जलमार्गों के विकास के लिए मान्यता प्राप्त है।
IMO की मुख्य भूमिका निम्नलिखित है
- समुद्री परिवहन उद्योग के लिए निष्पक्ष और प्रभावी नियामक ढाँचा तैयार करना : IMO का मुख्य उद्देश्य समुद्री परिवहन उद्योग के लिए निष्पक्ष और प्रभावी नियामक ढाँचा तैयार करना है। यह ढाँचा विभिन्न देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, जलयान और जलमार्गों के नियमों को समायोजित करने में मदद करता है।
- अंतर्राष्ट्रीय समुद्री यातायात की सुगमता और सुरक्षित बनाना : IMO द्वारा निर्धारित नियम और मानकों के अनुसार, समुद्री यातायात को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए काम किया जाता है।
- अंतर्राष्ट्रीय समुद्री दिवस का आयोजन करना : IMO हर साल सितंबर के प्रत्येक अंतिम गुरुवार को विश्व समुद्री दिवस मनाता है, जिसका उद्देश्य समुद्री गतिविधियों के महत्व को उजागर करना है।
अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) की संरचना और कार्य
- अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) एक विशिष्ट एजेंसी है जो संयुक्त राष्ट्र संघ के तहत जलयानों के यातायात को नियंत्रित करने के लिए अधिकृत है।
- इसे 1982 तक “अंतर-सरकारी समुद्री सलाहकारी संगठन” (Maritime Consultative Organization / IMCO) कहा जाता था।
- IMO की सदस्यों की सभा (Assembly) द्वारा शासित होती है, जिसकी बैठक द्विवार्षिक रूप से होती है और जिसमें 40 सदस्यों की एक परिषद होती है।
- इस परिषद को दो वर्ष की अवधि के लिए विधानसभा द्वारा चुना जाता है।
- IMO की सर्वोच्च शासी निकाय असेंबली है, जो संगठन के कार्य की निगरानी के लिए जिम्मेदार है।
- यह समुद्री सुरक्षा और प्रदूषण की रोकथाम के मामले में सरकारों को सिफारिशें करने के अलावा असेंबली के कार्यों का निष्पादन करती है।
- IMO के कार्य पांच समितियों और विभिन्न उपसमितियों के माध्यम से संचालित होते हैं, जो अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों, प्रस्तावों और दिशा-निर्देशों के विकास और उनके अनुपालन के लिए जिम्मेदार होती हैं।
भारत और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन
- भारत समुद्री मामलों के प्रति अपनी निरंतर प्रतिबद्धता को उजागर करते हुए IMO (International Maritime Organization) परिषद की श्रेणी-बी में बना हुआ है।
- IMO के साथ भारत का सक्रिय जुड़ाव देश की समुद्री क्षमताओं और वैश्विक समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
