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भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने मार्च 2024 के लिए वित्तीय समावेशन सूचकांक (FI-सूचकांक) की घोषणा की है।वित्तीय समावेशन सूचकांक देश भर में वित्तीय समावेशन की सीमा को मापने के लिए एक माप होता है भारत में मार्च 2023 के 60.1 अंक से बढ़कर मार्च 2024 में 64.2 हो गया है।

वित्तीय समावेशन सूचकांक (एफआई-सूचकांक) की ऐतिहासिक प्रगति  

  • भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) द्वारा 17 अगस्त, 2021 को लॉन्च किया गया वित्तीय समावेशन सूचकांक (एफआई-इंडेक्स), देश के कमजोर समूहों के लिए वित्तीय सेवाओं तक पहुंच, समय पर ऋण और सामर्थ्य सुनिश्चित करने की प्रगति को मापने में मदद करता है।

 वित्तीय समावेशन सूचकांक ( एफआई-सूचकांक ) का उद्देश्य और निर्माण

  • वित्तीय समावेशन सूचकांक में 0 से 100 तक का मूल्य होता है, जिसमें 0 पूर्ण वित्तीय बहिष्करण को दर्शाता है जबकि 100 पूर्ण वित्तीय समावेशन को दर्शाता है।
  • वित्तीय समावेशन की गहराई को दर्शाने के लिए यह सूचकांक उप-सूचकांकों के योगदान पर आधारित होता है। यह सूचकांक भारत के वित्तीय समावेशन के महत्वपूर्ण प्रगति का संकेत होता है जो देश के वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है।
  • यह सूचकांक बैंकिंग, निवेश, बीमा, डाक सेवाओं और पेंशन को शामिल करने वाले 97 संकेतकों पर आधारित होता है।
  • इसका उद्देश्य वित्तीय समावेशन की गहराई और उपलब्धता को मापने में मदद करना है।
  • यह सूचकांक बिना किसी आधार वर्ष के निर्मित किया गया है, जो पिछले कई वर्षों में वित्तीय समावेशन की दिशा में सभी हितधारकों के संचयी प्रयासों को दर्शाता है।

उप – सूचकांक और उसका मान / भार

  • वित्तीय सेवाओं तक पहुँच के आधार पर : इसमें वित्तीय सेवाओं तक पहुंच की आसानी को मापा जाता है जिसका मान / भार 35% होता है।
  • उपयोग के आधार पर : इसके तहत वित्तीय सेवाओं के उपयोग की सीमा की गहराई को मापने के लिए किया जाता है , जिसका महत्व 45% होता है।
  • वित्तीय सेवाओं की गुणवत्ता के आधार पर : इसमें वित्तीय सेवाओं की गुणवत्ता को मापने के लिए किया जाता है, जिसका महत्व 20% होता है।

वित्तीय समावेशन सूचकांक का प्रकाशन

  • एफआई-सूचकांक ( FI- INDEX) प्रतिवर्ष जुलाई माह में प्रकाशित किया जाता है।

वित्तीय समावेशन सूचकांक के संदर्भ में आरबीआई का दृष्टिकोण

  • एफआई-इंडेक्स देश भर में आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण ऋण और सुरक्षा जाल तक देश के कमजोर समूहों या वर्गों तक पहुंच को सुगम बनाकर समावेशी विकास का समर्थन करता है।
  • भारत में आधार और मोबाइल प्रसार के विस्तार होने से डिजिटल पहलों से संवर्धित यह रिपोर्ट वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में भुगतान प्रणालियों की भूमिका को रेखांकित करती है।

वित्तीय समावेशन के लिए भारतीय राष्ट्रीय रणनीति

वित्तीय समावेशन के लिए भारतीय राष्ट्रीय रणनीति (NSFI) का मुख्य उद्देश्य वित्तीय सेवाओं को सभी तक पहुंचाना है। इसके लिए कई पहल किए गए हैं। जो निम्नलिखित है –

  • प्रधानमंत्री जन-धन योजना (PMJDY) : यह योजना वित्तीय समावेशन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य वित्तीय सेवाओं को आम लोगों तक सबसे सस्ती और आसानी से पहुंच प्रदान करना है।
  • बैंकिंग बुनियादी ढांचे का विस्तार : प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत बैंकिंग बुनियादी ढांचे का विस्तार किया गया है। इसमें बीमा और पेंशन योजनाओं को एकीकृत करने का प्रयास किया जा रहा है।
  • शैक्षिक फोकस : अनुकूलित मॉड्यूल और विस्तारित साक्षरता केंद्रों का लक्ष्य मार्च 2024 तक राष्ट्रव्यापी कवरेज करना है। इससे वित्तीय साक्षरता में सुधार होगा और आम लोगों को वित्तीय सेवाओं के बारे में जागरूकता बढ़ेगी।
  • वित्तीय मध्यस्थता की दक्षता में वृद्धि : वित्तीय समावेशन के अभाव में बैंकों की सुविधा से वंचित लोग मजबूरीवश अनौपचारिक बैंकिंग क्षेत्र से जुड़ने के लिए बाध्य हो जाते हैं। वित्तीय समावेशन के परिणामस्वरूप न केवल उपलब्ध बचत राशि में वृद्धि होती है, बल्कि वित्तीय मध्यस्थता की दक्षता में भी वृद्धि होती है।
  • इस तरह की तमाम योजनाएं भारतीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं।

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