केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत ने वर्ष 2024 में लगभग एक लाख पेटेंट जारी किये हैं, जो पेटेंट अनुमोदन में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।
पेटेंट
- पेटेंट एक आविष्कार का विधिक अधिकार है जो किसी व्यक्ति या संस्था को दूसरों के हस्तक्षेप के बिना दिया जाता है जो इसे दोहराने, उपयोग करने या बेचने की इच्छा रखते हैं
- पेटेंट संरक्षण एक क्षेत्रीय अधिकार है और इसलिये यह केवल भारतीय क्षेत्र के अंर्तगत ही प्रभावी है। वैश्विक पेटेंट की कोई अवधारणा नहीं है।
- भारत में पेटेंट प्रणाली पेटेंट अधिनियम, 1970 द्वारा शासित होती है, जिसमें बदलते परिवेश के अनुरूप पेटेंट नियमों में नियमित रूप से संशोधन किया जाता है, सबसे संशोधन पेटेंट (संशोधन) नियम, 2024 है।
- पेटेंट योग्यता के मानदंड: कोई आविष्कार पेटेंट योग्य विषय वस्तु होता है यदि वह नवीन, स्पष्ट एवं औद्योगिक अनुप्रयोग हेतु सक्षम है।
- इसके अतिरिक्त, इस पर पेटेंट अधिनियम, 1970 की धारा 3 और 4 के प्रावधान लागू नहीं होने चाहिये।
पेटेंट अधिनियम, 1970
- भारत में पेटेंट प्रणाली के लिये यह प्रमुख कानून वर्ष 1972 में लागू हुआ। इसने भारतीय पेटेंट एवं डिज़ाइन अधिनियम, 1911 का स्थान लिया।
- इस अधिनियम को पेटेंट (संशोधन) अधिनियम, 2005 द्वारा संशोधित किया गया, जिसके अंर्तगत उत्पाद पेटेंट को खाद्य, औषधि, रसायन तथा सूक्ष्मजीवों सहित प्रौद्योगिकी के सभी क्षेत्रों तक बढ़ा दिया गया।
- संशोधन के बाद विशेष विपणन अधिकार से संबंधित प्रावधानों को निरस्त कर दिया गया है, और साथ ही अनिवार्य लाइसेंस प्रदान करने के लिये सक्षम बनाने के साथ ही अनुदान-पूर्व तथा अनुदान-पश्चात विरोध से संबंधित प्रावधान भी प्रस्तुत किये गए हैं।
पेटेंट (संशोधन) नियम, 2024 के अंतर्गत प्रमुख परिवर्तन
- परीक्षण के लिये अनुरोध दाखिल करने की समयसीमा को घटाकर प्राथमिकता तिथि से 48 महीने से 31 महीने किया गया।
- ‘आविष्कार प्रमाणपत्र’ की शुरूआत’: आविष्कारकों के पेटेंट किये गए आविष्कारों की पहचान करके उनके योगदान को स्वीकार करना।
- विवरण दाखिल करने की आवृत्ति: वित्तीय वर्ष में एक बार से घटाकर प्रत्येक तीन वित्तीय वर्ष में एक बार कर दिया गया।
- अनुदान-पूर्व तथा अनुदान-पश्चात् विरोध प्रक्रियाओं में संशोधन: विपक्षी बोर्ड द्वारा सिफारिशें प्रस्तुत करने की समय सीमा एवं आवेदकों के लिये प्रतिक्रिया समय को समायोजित किया गया है।
WIPO द्वारा जारी वैश्विक नवाचार सूचकांक (GII), 2023 रैंकिंग में भारत ने 132 देशों में से 40वाँ स्थान प्राप्त किया है। यह वर्ष 2021 में 46वें स्थान और वर्ष 2015 में 81वें स्थान की तुलना में सुधार को दर्शाता है।विश्व बौद्धिक संपदा संगठन द्वारा जारी अध्ययन के अनुसार भारत में वर्ष 2022 में पेटेंट आवेदनों में रिकॉर्ड 31.6% की वृद्धि हुई जो चीन, यू.के. तथा अन्य देशों की तुलना में अधिक है।
पेटेंट प्रदान करने का महत्त्व
- नवाचार और अनुसंधान को प्रोत्साहित करना: पेटेंट के माध्यम से विशेष अधिकार प्रदान करना नवाचार को प्रोत्साहित करता है।
- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आकर्षित करना: बौद्धिक संपदा के संरक्षण हेतु सुदृढ़ व्यवस्था वाले देश अधिक FDI आकर्षित करते हैं। एक अच्छी तरह से संरक्षित IP परिवेश विदेशी निवेशकों को यह विश्वास दिलाता है कि उनके नवाचारों की सुरक्षा की जाएगी, जिससे भारत में निवेश करने के लिये वे प्रोत्साहित होंगे।
- ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था का निर्माण: कॉपीराइट और ट्रेडमार्क का संरक्षण साहित्य, कला, संगीत और ब्रांडिंग जैसे क्षेत्रों में बौद्धिक संपत्तियों के निर्माण और व्यावसायीकरण को प्रोत्साहित करता है, जो ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के विकास में योगदान देता है।
