फेडरेशन ऑफ ऑब्सटेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसायटीज़ ऑफ इंडिया ने महिलाओं के लिये एक व्यापक टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया है जिसका उद्देश्य समग्र भारत में वयस्क नागरिकों को टीकाकरण के बारे में जागरूक करना है। चूँकि पुरुषों की अपेक्षा, महिलाएँ 25% अधिक समय अस्वस्थता में जीवन निर्वाह करती हैं इसलिये इस पहल का उद्देश्य महिलाओं के स्वास्थ्य की गुणवत्ता में सुधार करना है।यह पहल महिलाओं की वैक्सीन-निवार्य रोगों (Vaccine-Preventable Diseases- VPD) से रक्षा करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है।
VPD जीवाणु या विषाणु के कारण होते हैं और टीकों से इनकी रोकथाम की जा सकती है। इनके कारण दीर्घकालिक व्याधि और मृत्यु भी हो सकती है। चिकनपॉक्स, डिप्थीरिया और पोलियोवायरस संक्रमण VPD के प्रमुख उदाहरण हैं।भारत सरकार ने देश में टीकाकरण कवरेज बढ़ाने के लिये दो व्यापक पहल की हैं।यूनिवर्सल इम्यूनाइज़े शन प्रोग्राम (UIP) में 12 वैक्सीन-निवार्य रोगों के निदान के लिये निःशुल्क टीकाकरण किया जाता है, जिसमें डिप्थीरिया, पर्टुसिस, टेटनस, पोलियो, खसरा, रूबेला, क्षय रोग, हेपेटाइटिस बी और हीमोफिलस इन्फ्लुएंज़ा टाइप बी के कारण होने वाले मेनिन्जाइटिस तथा निमोनिया जैसी 9 राष्ट्रीय स्तर पर लक्षित बीमारियाँ शामिल हैं।इसके अतिरिक्त, UIP के तहत टीकाकरण से छूटे बच्चों के टीकाकरण के लिये वर्ष 2014 में मिशन इंद्रधनुष की शुरुआत की गई थी। इसके चार चरणों के माध्यम से 2.53 करोड़ से अधिक बच्चों और 68 लाख गर्भवती महिलाओं को जीवन रक्षक टीके लगाए गए।FOGSI स्वास्थ्य सेवाओं, प्रजनन संबंधी अधिकारों को बढ़ावा देने और मातृ मृत्यु दर को कम करने के माध्यम से भारत में प्रसूति तथा स्त्री रोग चिकित्सकों का समर्थन करता है।
भारत में मातृ मृत्यु दर बनाम महिलाओं के लिए व्यापक टीकाकरण कार्यक्रम
भारत में मातृ मृत्यु दर और महिलाओं के लिए व्यापक टीकाकरण कार्यक्रम के तहत टीकाकरण कवरेज बढ़ाने के लिए भारत सरकार ने देश में दो महत्वपूर्ण पहलों की शुरूआत की हैं।
- यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (UIP) : इस कार्यक्रम के तहत 12 वैक्सीन-निवार्य रोगों के निदान के लिए नि:शुल्क टीकाकरण किया जाता है। इनमें डिप्थीरिया, पर्टुसिस, टेटनस, पोलियो, खसरा, रूबेला, क्षय रोग, हेपेटाइटिस बी, और हीमोफिलस इन्फ्लुएंज़ा टाइप बी के कारण होने वाले मेनिन्जाइटिस तथा निमोनिया जैसी 9 राष्ट्रीय स्तर पर लक्षित बीमारियाँ शामिल हैं।
- मिशन इंद्रधनुष : UIP के तहत टीकाकरण से छूटे बच्चों के टीकाकरण के लिए वर्ष 2014 में मिशन इंद्रधनुष की शुरुआत की गई थी। इसके चार चरणों के माध्यम से 2.53 करोड़ से अधिक बच्चों और 68 लाख गर्भवती महिलाओं को जीवन रक्षक टीके लगाए गए।फेडरेशन ऑफ ओब्स्टेट्रिक्स और गाइनेकोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (FOGSI) भारत में प्रसूति तथा स्त्री रोग चिकित्सकों का समर्थन करता है, भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच को बढ़ाने के लिए, प्रजनन संबंधी अधिकारों को बढ़ावा देने और मातृ मृत्यु दर को कम करने पर केंद्रित है।
भारत में मातृ मृत्यु दर
- विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, गर्भवती होने पर या गर्भावस्था की समाप्ति के 42 दिनों के भीतर, गर्भावस्था या उसके प्रबंधन से संबंधित किसी भी कारण से हुई महिला की मृत्यु को मातृ मृत्यु माना जाता है। प्रति एक लाख जीवित बच्चों के जन्म पर होने वाली माताओं की मृत्यु को मातृ मृत्यु दर (MMR) कहा जाता है।
- भारत के असम राज्य में सबसे अधिक मातृ मृत्यु दर (MMR) (195) है, जबकि केरल में प्रति लाख जीवित जन्म पर यह आंकड़ा सबसे कम(19) है। यूनेस्को के अनुसार, भारत की MMR में 2000 से 2020 तक 6.36% की गिरावट हुई है, जो वैश्विक गिरावट की दर से तीन गुना अधिक है।
- भारत में दिन – प्रतिदिन अर्थात उतरोत्तर मातृ मृत्यु दर (MMR) में सुधार हो रहा है, जो मातृ स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण आयाम है।
रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया
- रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
- यह जनसंख्या की गणना, देश में मृत्यु और जन्म के पंजीकरण के कार्यान्वयन के अलावा नमूना पंजीकरण प्रणाली (Sample Registration System-SRS) का उपयोग करके प्रजनन और मृत्यु दर के संबंध में अनुमान प्रस्तुत करता है।
- SRS देश का सबसे बड़ा जनसांख्यिकीय नमूना सर्वेक्षण है, जिसमें अन्य संकेतक राष्ट्रीय प्रतिनिधि नमूने के माध्यम से मातृ मृत्यु दर का प्रत्यक्ष अनुमान प्रदान करते हैं।
- SRS के तहत दर्ज मौतों के लिए वर्बल ऑटोप्सी (Verbal Autopsy-VA) उपकरणों का नियमित आधार पर उपयोग किया जाता है, ताकि देश में विशिष्ट कारणों से होने वाली मृत्यु दर का पता लगाया जा सके।
भारत में मातृ मृत्यु दर की वर्तमान स्थिति
- भारत वर्ष 2020 तक 100 प्रति लाख जीवित जन्मों के राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (NHP) के लक्ष्य को प्राप्त करने के करीब था और 2030 तक 70 प्रति लाख जीवित जन्मों के संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की राह पर है।
- कई विकसित देशों ने सफलतापूर्वक मातृ मृत्यु दर (MMR) को एकल अंकों में ला दिया है।
- इटली, नॉर्वे, पोलैंड, और बेलारूस में मातृ मृत्यु दर (MMR केवल 2 है, जबकि जर्मनी और यूके में यह 7 है। कनाडा में MMR 10 और अमेरिका में 19 है।
- भारत के अधिकांश पड़ोसी देशों की तुलना में, नेपाल (186), बांग्लादेश (173), और पाकिस्तान (140) का मातृ मृत्यु दर अधिक है।
- हालांकि, चीन और श्रीलंका क्रमशः 18.3 और 36 के MMR के साथ बेहतर स्थिति में हैं।
भारत में विभिन्न राज्यों से संबंधित आँकड़े
- भारत में सतत् विकास लक्ष्य हासिल करने वाले राज्यों की संख्या अब पाँच से बढ़कर सात हो गई है। ये राज्य हैं: केरल (30), महाराष्ट्र (38), तेलंगाना (56), तमिलनाडु (58), आंध्र प्रदेश (58), झारखंड (61), और गुजरात (70)।
- केरल ने सबसे कम मातृ मृत्यु दर दर्ज की है, जो उसे राष्ट्रीय मातृ मृत्यु दर 103 से आगे रखता है।
- केरल के मातृ मृत्यु दर में 12 अंक की गिरावट आई है।
- पिछले SRS बुलेटिन (2015-17) ने राज्य की मातृ मृत्यु दर को 42 के स्तर पर रखा था, जिसे बाद में समायोजित कर 43 कर दिया गया था।
- भारत के 09 राज्य ऐसे हैं जिन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति द्वारा निर्धारित मातृ मृत्यु दर लक्ष्य को हासिल कर लिया है।
- इन राज्यों में ऊपर बताए गए सात राज्य और कर्नाटक (83) एवं हरियाणा (96) शामिल हैं।
- उत्तराखंड (101), पश्चिम बंगाल (109), पंजाब (114), बिहार (130), ओडिशा (136), और राजस्थान (141) में एमएमआर 100-150 के बीच है।
- जबकि छत्तीसगढ़ (160), मध्य प्रदेश (163), उत्तर प्रदेश (167), और असम (205) का मातृ मृत्यु दर 150 से ऊपर है।
भारत में मातृ मृत्यु दर और महिलाओं के लिए व्यापक टीकाकरण कार्यक्रम के तहत भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया कुछ सरकारी पहल
- जननी सुरक्षा योजना (JSY) : राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत यह योजना संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित करने के लिए नकद सहायता प्रदान करती है। इसका उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव सेवाएं उपलब्ध कराना है।
- प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) : इस अभियान के तहत हर महीने की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं के लिए सुनिश्चित, व्यापक और गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व देखभाल की जाती है। यह सुनिश्चित करता है कि गर्भवती महिलाओं को नियमित और समय पर चिकित्सा सेवाएं मिलें।
- प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) : यह योजना गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को पोषण संबंधी सहायता प्रदान करती है। इसके तहत पहली बार गर्भधारण करने वाली महिलाओं को वित्तीय सहायता दी जाती है ताकि वे अपने पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा कर सकें।
- पोषण अभियान : इस अभियान का उद्देश्य मातृ और शिशु पोषण में सुधार करना है। इसके तहत महिलाओं और बच्चों को संतुलित आहार और पोषण संबंधी शिक्षा प्रदान की जाती है।
- लक्ष्य दिशा-निर्देश : इस पहल का उद्देश्य प्रसव के दौरान महिलाओं को उच्च गुणवत्तापूर्ण देखभाल प्रदान करना है। इसके तहत स्वास्थ्य कर्मियों को प्रसव के दौरान महिलाओं की देखभाल के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।
