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वाणिज्य मंत्रालय ने नई सरकार के लिये 100 दिन का एजेंडा रोडमैप जारी किया है, जिसमें निर्यात हेतु ई-कॉमर्स का उपयोग करने की योजना शामिल है। भारत ने वर्ष 2030 तक 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के व्यापारिक निर्यात का लक्ष्य रखा है, इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये सीमा पार ई-कॉमर्स को एक प्रमुख रणनीति के रूप में पहचाना है।

ई-कॉमर्स में 100 दिवसीय एजेंडा

  • 100 दिवसीय एजेंडा: ऑनलाइन निर्यात को समर्थन देने के लिये ई-कॉमर्स हब विकसित करने का कार्यक्रम सरकार के 100 दिवसीय एजेंडे का मुख्य फोकस है।
  • वाणिज्य विभाग, शुल्क मुक्त रिटर्न और तीव्र सीमा शुल्क निकासी के लिये राजस्व विभाग के साथ मिलकर काम करता है।
  • आर्थिक संभावना: वर्ष 2023 में सीमा पार ई-कॉमर्स व्यापार लगभग 800 बिलियन अमेरिकी डॉलर का होगा और अनुमान है कि वर्ष 2030 तक यह 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच जाएगा।
  • चीन का ई-कॉमर्स निर्यात लगभग 350 बिलियन अमरीकी डॉलर का है, जबकि भारत का ऑनलाइन माध्यम से निर्यात केवल 2 बिलियन अमरीकी डॉलर का है।
  • रिटर्न लॉजिस्टिक्स चुनौती: ई-कॉमर्स में लगभग 25 प्रतिशत वस्तुओं का पुनः आयात किया जाता है, जिससे इन वस्तुओं के लिये शुल्क मुक्त आयात आवश्यक हो जाता है।
  • इन वस्तुओं को शुल्क-मुक्त दर्जा प्रदान करना चुनौतीपूर्ण है।

ई-कॉमर्स

  • ई-कॉमर्स में इंटरनेट के माध्यम से सामान और सेवाएँ खरीदना तथा बेचना शामिल है। वर्ष 2023 तक, भारत वैश्विक स्तर पर आठवें सबसे बड़े ई-कॉमर्स बाज़ार के रूप में स्थान रखता है।
  • ई-कॉमर्स में गतिविधियों का एक व्यापक दायरा शामिल है, जिसमें उत्पादों की खरीद-बिक्री की सुविधा प्रदान करने वाले ऑनलाइन खुदरा प्लेटफॉर्म से लेकर सुरक्षित और सुविधाजनक वित्तीय लेन-देन को सक्षम करने वाली डिजिटल भुगतान प्रणालियाँ शामिल हैं।

वर्गीकरण

  • बाज़ार आधारित मॉडल: इसमें ई-कॉमर्स इकाई खरीदारों और विक्रेताओं को जोड़ने के लिये एक IT प्लेटफॉर्म प्रदान करती है, जिसका उदाहरण अमेज़न तथा फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियाँ हैं।
  • इन्वेंटरी-आधारित मॉडल: इसमें ई-कॉमर्स इकाई का स्वामित्व होता है तथा वह अपनी इन्वेंटरी से वस्तुओं और सेवाओं को सीधे उपभोक्ताओं को बेचती है, जैसा कि मिंत्रा (Myntra) एवं नाइका (Nykaa) जैसे प्लेटफॉर्मों के मामले में देखा गया है।
  • ई-कॉमर्स के इन्वेंट्री आधारित मॉडल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति नहीं है।
  • वर्तमान स्थिति: भारत के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ने एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, वित्त वर्ष 2023 में सकल व्यापारिक मूल्य (GMV) 60 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया है, जो वर्ष 2022 की तुलना में 22% की वृद्धि को दर्शाता है।
  • विगत सात वर्षों में भारतीय खिलौनों के निर्यात में लगभग 30% के चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) के हिसाब से वृद्धि हुई है।
  • वित्त वर्ष 2022-23 में, सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) ने 2011 बिलियन अमरीकी डॉलर का अपना अब तक का सबसे अधिक सकल व्यापारिक मूल्य हासिल किया।
  • वर्ष 2023 तक भारत में ई-कॉमर्स क्षेत्र का मूल्य 70 बिलियन अमरीकी डॉलर है, जो देश के कुल खुदरा बाज़ार का लगभग 7% है।
  • भारत में लगभग 800 मिलियन लोग इंटरनेट के ग्राहक हैं, जिसमें लगभग 350 मिलियन परिपक्व ऑनलाइन उपयोगकर्त्ता सक्रिय ट्रांजेक्शन में शामिल हैं।
  • भविष्य की संभावना: भारतीय ई-कॉमर्स उद्योग के वर्ष 2030 तक 300 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है।
  • आगामी सात वर्षों में थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स प्रदाताओं द्वारा लगभग 17 बिलियन नौवहन प्रबंधित किये जाने का अनुमान है।
  • यह संयुक्त राज्य अमेरिका को पीछे छोड़कर विश्व का दूसरा सबसे बड़ा ई-कॉमर्स का अनुमानित बाज़ार है।
  • भारत में ई-रिटेल बाज़ार के वर्ष 2028 तक 160 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक जाने का अनुमान है।

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